इसके बाद अंतरिक्ष यान धीरे‑धीरे अपने वैज्ञानिक अवलोकनों के लिए तय की गई उच्च अंडाकार कक्षा (highly elliptical orbit) में पहुंचने के लिए कक्षीय बदलाव करता है।
सौर गतिविधि से पैदा होने वाला स्पेस वेदर कई बार सैटेलाइट, रेडियो संचार, GPS और यहां तक कि बिजली ग्रिड को भी प्रभावित कर सकता है। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि वे पूरे मैग्नेटोस्फीयर को एक साथ देखकर समझ नहीं पाते कि सौर हवा के झटके से यह प्रणाली कैसे बदलती है।
SMILE इसी कमी को दूर करने की कोशिश करता है। यह मिशन वैश्विक इमेजिंग और स्थानीय मापों को एक साथ जोड़ता है, जिससे वैज्ञानिक सौर हवा में बदलाव को सीधे मैग्नेटोस्फीयर और ऑरोरा (aurora) की गतिविधि से जोड़ सकते हैं।
इस मिशन की खास तकनीक है सॉफ्ट एक्स‑रे इमेजिंग। जब सौर हवा के उच्च‑ऊर्जा आयन पृथ्वी के आसपास मौजूद न्यूट्रल परमाणुओं से टकराते हैं, तो एक्स‑रे पैदा होते हैं। इन्हीं एक्स‑रे को देखकर वैज्ञानिक मैग्नेटोस्फीयर की सीमाओं—जैसे मैग्नेटोपॉज़ और मैग्नेटोशीथ—को पहली बार वैश्विक स्तर पर देख सकते हैं।
इस सैटेलाइट में चार मुख्य वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं, जो मिलकर पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण का विस्तृत अध्ययन करते हैं।
Soft X‑ray Imager (SXI)
यह एक वाइड‑फील्ड एक्स‑रे टेलीस्कोप है जो मैग्नेटोस्फीयर की सीमाओं का नक्शा बनाता है। यह उन एक्स‑रे को पकड़ता है जो सौर हवा के आयनों और पृथ्वी के आसपास मौजूद न्यूट्रल कणों की टक्कर से पैदा होते हैं।
Ultraviolet Imager (UVI)
यह उपकरण उत्तरी गोलार्ध में बनने वाले ऑरोरल ओवल (auroral oval) की अल्ट्रावायलेट तस्वीरें लेता है, जिससे पता चलता है कि सौर हवा में बदलाव के साथ ऑरोरा कैसे बदलते हैं।
Light Ion Analyzer (LIA)
यह प्लाज़्मा उपकरण सौर हवा और मैग्नेटोस्फीयर में मौजूद हल्के आयनों की घनत्व, गति और तापमान मापता है।
Magnetometer (MAG)
यह उपकरण अंतरिक्ष यान के आसपास के चुंबकीय क्षेत्र को मापता है और यह समझने में मदद करता है कि सौर हवा का दबाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की सीमाओं को कैसे बदलता है।
इन चारों उपकरणों की मदद से वैज्ञानिक वैश्विक इमेज और स्थानीय मापों को जोड़कर सौर तूफानों और भू‑चुंबकीय घटनाओं की बेहतर समझ हासिल कर सकते हैं।
SMILE को ऐसी कक्षा में रखा गया है जो पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को बड़े पैमाने पर देखने के लिए खास तौर पर चुनी गई है।
मुख्य विशेषताएँ:
इस अंडाकार कक्षा की वजह से सैटेलाइट हर चक्र में काफी समय ऊँचाई पर बिताता है और लगातार 40 घंटे से अधिक समय तक मैग्नेटोस्फीयर का अवलोकन कर सकता है।
SMILE अंतरिक्ष विज्ञान में यूरोप और चीन के बीच सबसे महत्वपूर्ण मिशन‑स्तरीय सहयोगों में से एक है।
जिम्मेदारियाँ इस तरह बाँटी गई हैं:
ESA की विज्ञान कार्यक्रम समिति ने SMILE मिशन को 2015 में मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य सूर्य‑पृथ्वी संबंध का अध्ययन नई इमेजिंग तकनीक से करना था।
मई 2026 में लॉन्च के बाद सैटेलाइट पहले अपने उपकरणों की जांच और कक्षा समायोजन करता है। शुरुआती योजनाओं के अनुसार नियमित वैज्ञानिक डेटा संग्रह 2026 के बाद के महीनों में शुरू होने की उम्मीद है, जब सभी उपकरण पूरी तरह कैलिब्रेट हो जाएँगे।
मिशन की प्राथमिक वैज्ञानिक अवधि लगभग तीन वर्ष तय की गई है, हालांकि यदि सैटेलाइट स्वस्थ रहा तो इसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
SMILE मिशन से वैज्ञानिक कई अहम सवालों के जवाब खोजने की उम्मीद कर रहे हैं, जैसे:
यदि मिशन सफल रहता है, तो यह पहली बार पृथ्वी के चुंबकीय कवच की वैश्विक, गतिशील तस्वीर प्रदान करेगा—जो स्पेस वेदर को समझने और भविष्य में सौर तूफानों के प्रभाव का बेहतर अनुमान लगाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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