रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने लगभग 400 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम रूस भेजने की पेशकश की है और अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के बजाय लंबे समय तक ‘फ्रीज़’ करने का प्रस्ताव रखा है। तेहरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग से हटकर आर्थिक रियायतों—जैसे प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड तक पहुंच—पर जोर दिया है। पाकिस्त...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does Iran’s amended 14-point peace proposal to the United States include—especially its offer to transfer roughly 400 kilograms of 60%-. Article summary: The amended Iranian proposal reportedly tries to trade a verifiable nuclear pause and economic concessions for de-escalation, rather than accepting full dismantlement of Iran’s nuclear program. Evidence is limited and co. Topic tags: general, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Skip links[Skip to Content](https://www.aljazeera.com/news/2026/5/3/whats-irans-14-point-proposal-to-end-the-war-and-will-trump-accept-it#main-content-area). * [**US-Israel war o" source context "What's Iran's 14-point proposal to end the war? And will Trump ..." Reference image 2: visual subject "Ski
मई 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने अमेरिका के लिए एक संशोधित 14‑सूत्रीय शांति प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव मूल रूप से एक सौदे की तरह है—ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के सबसे संवेदनशील हिस्सों को सीमित करने और क्षेत्रीय तनाव घटाने के कदम उठाए, बदले में उसे आर्थिक राहत और संघर्ष खत्म करने की दिशा में कदम मिलें।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रस्ताव का पूरा आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए ज्यादातर जानकारी मीडिया रिपोर्टों और कूटनीतिक सूत्रों पर आधारित है।
रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान ने बातचीत को नए सिरे से आगे बढ़ाने के लिए कई अहम बिंदु शामिल किए हैं:
• उच्च समृद्ध यूरेनियम रूस भेजने की पेशकश। ईरान ने कथित तौर पर लगभग 400 किलोग्राम 60% तक समृद्ध यूरेनियम रूस को भेजने का प्रस्ताव दिया है, न कि अमेरिका को। इससे ईरान की तत्काल परमाणु क्षमता को लेकर चिंता कम हो सकती है, जबकि उसका बुनियादी परमाणु ढांचा देश में ही बना रहेगा।
• स्थायी समाप्ति नहीं, बल्कि लंबी अवधि का फ्रीज़। प्रस्ताव में परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह खत्म करने के बजाय लंबे समय तक गतिविधियों पर रोक या सीमाएं लगाने की बात कही गई है।
• युद्ध मुआवजे से आर्थिक रियायतों की ओर झुकाव। पहले की स्थिति में ईरान युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा चाहता था, लेकिन संशोधित प्रस्ताव में ध्यान प्रतिबंधों में ढील और जमे हुए ईरानी फंड तक पहुंच जैसे आर्थिक कदमों पर है।
• संघर्ष का तेज़ अंत। पहले सामने आए 14‑सूत्रीय ढांचे में लगभग 30 दिनों के भीतर युद्ध समाप्त करने, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसे प्रस्ताव शामिल बताए गए थे।
कुल मिलाकर, प्रस्ताव का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना नहीं बल्कि उसे सीमित करते हुए तत्काल तनाव घटाना और आर्थिक संबंध सामान्य करना है।
इन वार्ताओं की एक खास बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद सीमित रहे हैं। इसलिए तीसरे देशों के जरिए संदेशों का आदान‑प्रदान हुआ।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान का संशोधित प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया। इससे पहले इस्लामाबाद में हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची थी, जिसके बाद बैक‑चैनल कूटनीति जारी रही।
इसके अलावा कुछ शुरुआती चरणों में ओमान ने भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई—यह देश लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच गुप्त या अप्रत्यक्ष संवाद कराने के लिए जाना जाता है।
कूटनीतिक गतिविधियां तब तेज हुईं जब अमेरिका ने संभावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान से नया प्रस्ताव आने के बाद उन्होंने नियोजित हमले को रोक दिया, ताकि बातचीत को मौका मिल सके। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े पैमाने पर कार्रवाई के लिए तैयार है।
हालांकि ट्रम्प ने प्रस्ताव पर संदेह भी जताया और संकेत दिया कि मौजूदा रूप में यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य न भी हो सकता है।
प्रस्ताव का सबसे संवेदनशील हिस्सा उच्च समृद्ध यूरेनियम का देश से बाहर जाना है।
यह विचार नया नहीं है। 2015 के प्रसिद्ध ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) में भी इसी तरह की व्यवस्था थी। उस समझौते के तहत:
• ईरान ने कम से कम 15 वर्षों तक 3.67% से अधिक यूरेनियम समृद्ध न करने पर सहमति दी थी।
• कम‑समृद्ध यूरेनियम का भंडार 300 किलोग्राम तक सीमित रखा गया था।
• और समझौते के कार्यान्वयन के दौरान ईरान ने अपने लगभग 98% समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर भेज दिया था।
परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार 60% समृद्ध यूरेनियम हथियार‑ग्रेड स्तर के काफी करीब माना जाता है। इसलिए अगर सैकड़ों किलोग्राम सामग्री देश से बाहर चली जाती है तो किसी हथियार के लिए जरूरी सामग्री तैयार करने में लगने वाला समय काफी बढ़ सकता है।
इस कारण ऐसी व्यवस्था अक्सर विश्वास‑निर्माण (confidence‑building) उपाय के रूप में देखी जाती है—जहां परमाणु ढांचा खत्म किए बिना जोखिम कम किया जाता है।
ईरान और अमेरिका के बीच मूल मतभेद यहीं है।
अमेरिका और उसके कुछ सहयोगी लंबे समय से चाहते रहे हैं कि ईरान यूरेनियम संवर्धन क्षमता को बहुत कड़े स्तर तक सीमित करे या खत्म करे। दूसरी ओर ईरान लगातार कहता रहा है कि उसे शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु कार्यक्रम बनाए रखने का अधिकार है।
संशोधित प्रस्ताव इस अंतर को पाटने की कोशिश करता दिखता है—जहां भंडार कम करने और कार्यक्रम को फ्रीज़ करने जैसे कदम उठाए जाएं, लेकिन पूरी तरह समाप्ति न हो।
चूंकि प्रस्ताव का पूरा पाठ सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए कई सवाल अभी खुले हैं:
• रूस को यूरेनियम भेजने की निगरानी कौन करेगा
• परमाणु गतिविधियों पर फ्रीज़ कितने समय के लिए होगा
• आर्थिक रियायतों की सटीक सूची क्या होगी
इसलिए फिलहाल इसे एक रिपोर्टेड कूटनीतिक ढांचा माना जा रहा है, अंतिम समझौता नहीं।
फिर भी इसके मूल विचार—उच्च समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर भेजना और परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना—परमाणु कूटनीति के उसी पुराने फॉर्मूले की याद दिलाते हैं: पहले जोखिम कम करो, फिर बड़े राजनीतिक समझौते की राह बनाओ।
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रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने लगभग 400 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम रूस भेजने की पेशकश की है और अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के बजाय लंबे समय तक ‘फ्रीज़’ करने का प्रस्ताव रखा है।
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने लगभग 400 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम रूस भेजने की पेशकश की है और अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के बजाय लंबे समय तक ‘फ्रीज़’ करने का प्रस्ताव रखा है। तेहरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग से हटकर आर्थिक रियायतों—जैसे प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड तक पहुंच—पर जोर दिया है।
पाकिस्तान और कुछ चरणों में ओमान ने अमेरिका‑ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं में मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि ट्रम्प ने बातचीत को मौका देने के लिए नियोजित सैन्य हमले को रोक दिया।