इस मामले में ऑस्ट्रेलिया की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था ACCC को भी हस्तक्षेप की अनुमति मिली है, जो दिखाता है कि यह केस केवल दो कंपनियों का विवाद नहीं बल्कि पूरे डिजिटल बाजार से जुड़ा मुद्दा है।
Epic अदालत से व्यापक बदलाव की मांग कर रहा है—जैसे कि प्रतिस्पर्धी ऐप स्टोर की अनुमति या कुछ खरीदारी पर Apple की कमीशन समाप्त करना—जबकि Apple चाहता है कि किसी भी बदलाव को सीमित और अस्थायी रखा जाए।
यह विवाद 2020 में शुरू हुआ जब Epic Games ने Fortnite में अपना डायरेक्ट पेमेंट विकल्प जोड़ दिया। इससे खिलाड़ी Apple के इन‑ऐप पेमेंट सिस्टम को बायपास कर सकते थे। Apple इस सिस्टम पर डिजिटल खरीदारी के लिए डेवलपर्स से लगभग 30% तक कमीशन लेता है।
Apple ने इसके तुरंत बाद Fortnite को App Store से हटा दिया और Epic का डेवलपर अकाउंट भी रद्द कर दिया। इसके जवाब में Epic ने एंटीट्रस्ट मुकदमा दायर किया।
Epic का तर्क था कि Apple के नियम प्रतिस्पर्धा को सीमित करते हैं क्योंकि:
• डेवलपर्स को इन‑ऐप खरीदारी के लिए Apple का पेमेंट सिस्टम इस्तेमाल करना पड़ता है।
• Apple इन ट्रांजैक्शन पर भारी कमीशन लेता है।
• ऐप्स को आम तौर पर उपयोगकर्ताओं को सस्ते बाहरी पेमेंट विकल्पों की ओर निर्देशित करने से रोका जाता है।
Apple का कहना है कि उसका नियंत्रित इकोसिस्टम उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करता है और App Store के इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए यह मॉडल जरूरी है।
अमेरिका में इस मामले का नतीजा मिश्रित रहा।
एक संघीय अदालत ने अधिकांश एंटीट्रस्ट दावों पर Apple के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया: Apple डेवलपर्स को ऐप के बाहर उपलब्ध वैकल्पिक पेमेंट विकल्पों के बारे में उपयोगकर्ताओं को बताने से नहीं रोक सकता।
अब विवाद का मुख्य सवाल यह है कि अगर खरीदारी Apple के पेमेंट सिस्टम के बाहर होती है, तो क्या Apple फिर भी कोई शुल्क ले सकता है।
इस कानूनी लड़ाई ने कई बार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने Apple और Epic—दोनों की अपील सुनने से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालत का आदेश लागू रहा।
इसके बाद Apple ने सुप्रीम कोर्ट से आपात राहत मांगते हुए अनुरोध किया कि मामले की आगे की सुनवाई रोकी जाए। लेकिन कोर्ट ने यह अनुरोध भी खारिज कर दिया।
इसका मतलब है कि मामला फिर से निचली अदालत में वापस गया है, जहां यह तय किया जाएगा कि App Store के बाहर होने वाली खरीदारी पर Apple कितना शुल्क ले सकता है।
पूरे विवाद का केंद्र Apple का App Store बिज़नेस मॉडल है।
Epic का आरोप है कि अदालत के आदेश के बाद भी Apple ने नए शुल्क और नियम बनाकर अपनी कमीशन व्यवस्था को बचाए रखने की कोशिश की।
Apple का कहना है कि डेवलपर्स उसके प्लेटफॉर्म, सुरक्षा ढांचे और डेवलपर टूल्स से लाभ उठाते हैं, इसलिए कुछ शुल्क लेना उचित है।
अब अदालतों को तय करना होगा कि App Store के बाहर होने वाले लेनदेन पर Apple कोई शुल्क ले सकता है या नहीं—और अगर ले सकता है तो कितना।
इस केस का असर Fortnite से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।
अगर Epic अपने लक्ष्य में सफल होता है और Apple की बाहरी पेमेंट पर शुल्क लेने की क्षमता सीमित हो जाती है, तो कई डेवलपर्स वेब या थर्ड‑पार्टी पेमेंट सिस्टम के जरिए भुगतान करवाना शुरू कर सकते हैं। इससे Apple की ऐप राजस्व हिस्सेदारी कम हो सकती है।
इस केस पर दुनिया भर के नियामक और अदालतें भी नजर रख रही हैं, क्योंकि इसका फैसला यह तय करने में मदद कर सकता है कि बड़े मोबाइल प्लेटफॉर्म डेवलपर्स से कितनी फीस ले सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में चल रही कार्यवाहियां दिखाती हैं कि मोबाइल ऐप इकोसिस्टम को ज्यादा खुला बनाने का दबाव अलग‑अलग क्षेत्रों में बढ़ रहा है।
Fortnite का App Store पर वापस आना Epic Games के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे उसे Apple के विशाल iOS यूज़र बेस तक दोबारा पहुंच मिल गई है।
लेकिन असली लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले अदालत के फैसले तय करेंगे कि Apple का App Store भविष्य में भी कड़े नियंत्रण वाला प्लेटफॉर्म रहेगा या फिर ऐसा खुला इकोसिस्टम बनेगा जहां डेवलपर्स बाहरी पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल अधिक स्वतंत्रता से कर सकेंगे।
यह फैसला अंततः अरबों डॉलर के मोबाइल ऐप बाजार की दिशा बदल सकता है।
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