अमेरिका ने 30 दिन की छूट बढ़ाकर उन देशों को पहले से जहाजों में लदे रूसी तेल की डिलीवरी लेने की अनुमति दी जो हॉर्मुज़ संकट से ऊर्जा संकट झेल रहे हैं। ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार यह कदम कच्चे तेल के बाजार को स्थिर रखने और चीन जैसे बड़े खरीदारों द्वारा अतिरिक्त भंडारण को सीमित करने के लिए लिया गया। यूरोपीय नेत...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened when the U.S. renewed for a second time its 30-day waiver allowing vulnerable countries to keep buying already-loaded Russian. Article summary: The U.S. extended the Russian-oil sanctions waiver for another 30 days, letting “energy-vulnerable” countries keep taking delivery of Russian seaborne oil already loaded on tankers during the Strait of Hormuz/Iran-war su. Topic tags: general, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "The US has renewed a waiver allowing purchases of Russian oil already loaded on tankers. WASHINGTON -- The United States has again temporarily eased sanctions on Russian oil, issui" source context "US Quietly Renews Russian Oil Waiver Amid Market Turmoil, Policy Confusion" Reference image 2: visual sub
अमेरिका ने रूसी समुद्री तेल पर 30 दिनों की एक और अस्थायी छूट (waiver) बढ़ा दी है। इससे उन देशों को राहत मिली है जिनके लिए ऊर्जा आपूर्ति अचानक प्रभावित हो गई थी, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव पड़ा। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक व्यावहारिक कदम बताया, लेकिन यूरोप और अमेरिका के कई नेताओं ने कहा कि इससे रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध कमजोर पड़ सकते हैं।
अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने एक अस्थायी 30‑दिन का “जनरल लाइसेंस” जारी किया है। इसके तहत उन देशों को रूसी तेल प्राप्त करने की अनुमति है जो पहले ही जहाजों पर लादा जा चुका था और समुद्र में था। यानी यह छूट केवल उन कार्गो पर लागू होती है जो पहले से यात्रा में हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नए रूसी तेल की खरीद की अनुमति नहीं देती। इसका उद्देश्य केवल उन टैंकरों को मंज़िल तक पहुंचने देना है जो पहले से रास्ते में हैं, ताकि अचानक सप्लाई टूटने से बाजार में और झटका न लगे।
यह नीति 2026 में शुरू हुई थी और अब इसे दूसरी बार बढ़ाया गया है, जब ईरान से जुड़े संघर्ष और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया।
अमेरिकी ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम अस्थायी है और इसका मकसद संकट के दौरान ऊर्जा बाजार को संभालना है। उनके अनुसार छूट के पीछे कुछ प्रमुख कारण थे:
अधिकारियों का कहना है कि यदि समुद्र में मौजूद ये कार्गो फंस जाते, तो वैश्विक बाजार में सप्लाई और घट सकती थी और कीमतें और ऊपर जा सकती थीं।
इस निर्णय पर यूरोप में तीखी प्रतिक्रिया आई। कई यूरोपीय अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर रूसी तेल को वैश्विक बाजार में आने दिया गया तो इससे मॉस्को की आय बढ़ सकती है।
यूरोपीय नेताओं और यूक्रेन के अधिकारियों ने पहले भी कहा था कि ऐसे अपवाद रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव को कमजोर करते हैं, खासकर तब जब पश्चिमी देश यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं।
अमेरिका के भीतर भी इस नीति का विरोध हुआ। सीनेटर माइकल बेनेट और उनके साथ कई सांसदों ने ट्रेज़री विभाग से आग्रह किया कि रूसी तेल पर पूरे प्रतिबंध फिर से लागू किए जाएँ। उनका तर्क था कि ऐसी छूटें क्रेमलिन की युद्ध वित्तपोषण क्षमता को बनाए रखती हैं।
कुछ अन्य सांसदों ने पहले भी चेतावनी दी थी कि इस तरह की छूट से “पुतिन के तेल मुनाफे” को बढ़ावा मिल सकता है।
आलोचकों का यह भी कहना है कि छूट के बावजूद वैश्विक तेल कीमतें ऊँची ही रहीं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इससे वास्तव में उपभोक्ताओं को राहत मिली।
उनका तर्क है कि अगर ईंधन कीमतों में खास कमी नहीं आई, तो रूस को मिलने वाली अतिरिक्त आय के मुकाबले यह नीति कम प्रभावी साबित हो सकती है।
यह विवाद एक बड़ी रणनीतिक दुविधा को दिखाता है:
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह छूट स्थायी नहीं है और केवल मौजूदा आपूर्ति संकट को संभालने के लिए दी गई है।
लेकिन आलोचकों का मानना है कि हर नई छूट यह सवाल फिर खड़ा करती है—क्या ऊर्जा संकट के समय प्रतिबंधों को ढीला करना अनिवार्य हो जाता है, या इससे उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है।
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अमेरिका ने 30 दिन की छूट बढ़ाकर उन देशों को पहले से जहाजों में लदे रूसी तेल की डिलीवरी लेने की अनुमति दी जो हॉर्मुज़ संकट से ऊर्जा संकट झेल रहे हैं।
अमेरिका ने 30 दिन की छूट बढ़ाकर उन देशों को पहले से जहाजों में लदे रूसी तेल की डिलीवरी लेने की अनुमति दी जो हॉर्मुज़ संकट से ऊर्जा संकट झेल रहे हैं। ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार यह कदम कच्चे तेल के बाजार को स्थिर रखने और चीन जैसे बड़े खरीदारों द्वारा अतिरिक्त भंडारण को सीमित करने के लिए लिया गया।
यूरोपीय नेताओं और कई अमेरिकी सीनेटरों ने कहा कि यह फैसला रूस पर दबाव कम करता है और क्रेमलिन की तेल आय बढ़ा सकता है, जबकि ईंधन कीमतों पर इसका असर सीमित रहा।