यूरोप के लिए इसका मतलब है कि वैश्विक बाजार में उपलब्ध "लचीली" LNG आपूर्ति का एक अहम हिस्सा अस्थायी रूप से कम हो गया।
इसी समय एशिया में LNG की मांग फिर से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
चीन और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातकों में गर्मियों और स्टोरेज के लिए LNG खरीद बढ़ने लगी है। इससे स्पॉट बाजार में कार्गो के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है ।
LNG व्यापार का एक साधारण नियम है: कार्गो अक्सर उसी क्षेत्र में जाते हैं जहां बेहतर कीमत मिलती है। अगर एशिया ज्यादा कीमत देता है, तो व्यापारी जहाजों को यूरोप के बजाय पूर्व की ओर मोड़ देते हैं।
इसका नतीजा यह है कि यूरोप को अब LNG आकर्षित करने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
नीदरलैंड्स का Title Transfer Facility (TTF) यूरोप का प्रमुख गैस बेंचमार्क है। हाल के हफ्तों में इसकी कीमत €50/MWh से ऊपर पहुंच गई है।
बाजार में यह कीमत दरअसल एक संकेत है कि यूरोप को LNG कार्गो चाहिए। जब TTF कीमतें एशियाई LNG कीमतों के मुकाबले बढ़ती हैं, तो यूरोप के लिए कार्गो आकर्षित करना आसान हो जाता है।
लेकिन ऊंची कीमतें इस बात का भी संकेत हैं कि बाजार भू‑राजनीतिक जोखिम और आपूर्ति अनिश्चितता को लेकर अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम जोड़ रहा है। विश्लेषकों के अनुसार अगर एशियाई मांग और बढ़ती है या आपूर्ति बाधाएं जारी रहती हैं, तो यूरोप में गैस कीमतें और बढ़ सकती हैं ।
यूरोप की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इस साल स्टोरेज स्तर अपेक्षाकृत कम हैं।
1 अप्रैल तक यूरोपीय संघ के गैस स्टोरेज केवल लगभग 28% भरे हुए थे — करीब 314 TWh या लगभग 29 अरब घन मीटर। यह पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है और सदस्य देशों के बीच असमान भी है ।
कम शुरुआती स्टोरेज का मतलब है कि गर्मियों के महीनों में यूरोप को बड़ी मात्रा में LNG आयात करना होगा ताकि सर्दियों के लिए पर्याप्त भंडार बनाया जा सके।
गर्मियों में भी गैस बाजार पर दबाव बना रहता है।
गर्म मौसम में बिजली उत्पादन के लिए गैस का उपयोग बढ़ जाता है क्योंकि एयर‑कंडीशनिंग और कूलिंग की मांग बढ़ती है। साथ ही गैस कंपनियां भूमिगत स्टोरेज में गैस भरती हैं ताकि सर्दियों के लिए तैयारी हो सके।
यानी गर्मियों में एक साथ दो तरह की मांग रहती है — मौजूदा खपत और स्टोरेज इंजेक्शन। इसी समय एशिया में भी मांग बढ़ती है, जिससे वैश्विक LNG संतुलन और तंग हो जाता है।
भविष्य को लेकर ऊर्जा संस्थानों के अनुमान अलग‑अलग हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का मानना है कि 2025 की गिरावट के बाद 2026 में एशिया का LNG आयात फिर बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजार और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा ।
ING का दृष्टिकोण अपेक्षाकृत सकारात्मक है। बैंक का अनुमान है कि अमेरिका और कतर से बढ़ती LNG निर्यात क्षमता आने वाले समय में आपूर्ति बढ़ा सकती है और औसत कीमतें लगभग €30/MWh तक आ सकती हैं, हालांकि कम स्टोरेज के कारण अल्पकालिक उतार‑चढ़ाव बने रह सकते हैं ।
Bank of America इससे ज्यादा सतर्क है। बैंक के अनुसार 2026 में यूरोपीय गैस कीमतें औसतन लगभग €55/MWh रह सकती हैं क्योंकि स्टोरेज स्तर कम हैं और उन्हें जल्दी भरना आसान नहीं होगा ।
Goldman Sachs ने भी चेतावनी दी है कि बाजार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जुड़े जोखिम और एशियाई मांग के संभावित उछाल को कम करके आंक रहा है। अगर प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तो यूरोप में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं ।
फिलहाल यूरोप को तत्काल गैस संकट का सामना करने की संभावना कम है। लेकिन बाजार की मौजूदा संरचना में गलती की गुंजाइश बहुत कम बची है।
रूस की पाइपलाइन गैस कम होने के बाद यूरोप अब वैश्विक LNG बाजार पर अधिक निर्भर है। इसका मतलब है कि भू‑राजनीतिक घटनाएं, शिपिंग व्यवधान और एशियाई मांग सीधे यूरोप की कीमतों और आपूर्ति को प्रभावित करती हैं।
कम स्टोरेज, बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अनिश्चित आपूर्ति के इस मिश्रण ने स्थिति को नाजुक बना दिया है। इसी वजह से यूरोप के LNG आयात में लगातार दो महीनों की गिरावट ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है — खासकर तब, जब सर्दियों से पहले स्टोरेज भरना अभी बाकी है।
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