संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा कि दुनिया भर में LGBTIQ+ समुदाय के खिलाफ हिंसा और भेदभाव अभी भी व्यापक है। उनके अनुसार:
उन्होंने कुछ हालिया उदाहरण भी दिए:
टर्क ने यह भी चेतावनी दी कि कुछ देशों में ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं जो LGBTIQ+ मुद्दों से जुड़ी जानकारी साझा करने तक को दंडनीय बना सकते हैं। इससे मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों और कार्यकर्ताओं की आवाज़ सीमित हो सकती है। उन्होंने बेलारूस और कज़ाख़स्तान जैसे देशों में ऐसे प्रतिबंधों का उल्लेख किया ।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर LGBTIQ+ समुदाय—खासकर ट्रांसजेंडर लोगों—के खिलाफ बढ़ती नफरत को अक्सर कुछ राजनीतिक नेताओं की तीखी बयानबाज़ी बढ़ावा देती है। उन्होंने सरकारों और टेक कंपनियों से ऑनलाइन दुर्व्यवहार पर कार्रवाई करने का आह्वान किया ।
UNDP के प्रशासक अलेक्जेंडर डे क्रू ने कहा कि समानता और समावेशन लोकतंत्र के लिए अतिरिक्त मूल्य नहीं, बल्कि उसका मूल आधार हैं। उनके शब्दों में, “समानता और समावेशन लोकतंत्र का धड़कता हुआ दिल हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि जब LGBTIQ+ लोगों को समाज से बाहर किया जाता है या उन्हें अपराधी बनाया जाता है, तो इससे:
इस संदर्भ में UN Trans Advocacy Week जैसी पहल भी महत्वपूर्ण बताई गई। इस कार्यक्रम के तहत ट्रांस और जेंडर‑डायवर्स समुदाय के नेताओं को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मंचों पर लाकर अंतरराष्ट्रीय नीति‑निर्माताओं से सीधे संवाद का अवसर दिया जाता है ।
नागरिक समाज संगठनों के अनुसार यह पहल इसलिए जरूरी है क्योंकि ट्रांस लोगों के बारे में अक्सर चर्चा तो होती है, लेकिन उनकी अपनी आवाज़ कम सुनी जाती है। यह कार्यक्रम उन्हें अपने अनुभव और मांगें सीधे वैश्विक मंच तक पहुंचाने का मौका देता है ।
2026 के इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र का केंद्रीय संदेश साफ था: लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब हर व्यक्ति—चाहे उसकी लैंगिक पहचान या यौन अभिविन्यास कुछ भी हो—बिना डर के जी सके और समाज में समान रूप से भाग ले सके ।
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