संयुक्त राष्ट्र के नेताओं ने चेतावनी दी कि LGBTIQ+ अधिकारों पर वैश्विक स्तर पर संगठित तरीके से पीछे हटने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है—कुछ देशों में आपराधिककरण बढ़ रहा है, नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित हो रही हैं और ऑनलाइन... 2026 की थीम “At the Heart of Democracy” इस बात पर जोर देती है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब स...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did UN leaders warn on the 2026 International Day Against Homophobia, Biphobia and Transphobia about the global rollback of LGBTIQ+ rig. Article summary: UN leaders warned that LGBTIQ+ rights are facing a coordinated global rollback: criminalization is increasing again, civic freedoms are being restricted, hate is spreading online, and funding cuts are weakening life-savi. Topic tags: general, government, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Secretary-General's message on the International Day against Homophobia, Biphobia and Transphobia. On the International Day Against Homophobia, Biphobia and Transphobia, we affir" source context "Secretary-General's message on the International Day against Homophobia, Biphobia and Transphobia | Secretary-General" R
17 मई को मनाया जाने वाला इंटरनेशनल डे अगेंस्ट होमोफोबिया, बाइफोबिया और ट्रांसफोबिया (IDAHOBIT) दुनिया भर में LGBTIQ+ समुदाय के खिलाफ भेदभाव और हिंसा के मुद्दों को उजागर करने का दिन है। 2026 में इसका वैश्विक विषय था “At the Heart of Democracy”—यानी यह याद दिलाना कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर व्यक्ति को बराबरी, गरिमा और सुरक्षा मिले ।
लेकिन इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेताओं ने चेतावनी दी कि दुनिया के कई हिस्सों में LGBTIQ+ अधिकारों पर पीछे हटने (rollback) की चिंताजनक प्रवृत्ति दिखाई दे रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि दुनिया ने पिछले दशकों में LGBTIQ+ अधिकारों पर कुछ प्रगति देखी है, लेकिन अब कई जगह इन अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशें बढ़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा:
उन्होंने चेतावनी दी कि कई देशों में:
गुटेरेस ने यह भी बताया कि कई वर्षों बाद पहली बार ऐसे देशों की संख्या बढ़ी है जो सहमति से होने वाले समान‑लिंग संबंधों को अपराध घोषित करते हैं ।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा कि दुनिया भर में LGBTIQ+ समुदाय के खिलाफ हिंसा और भेदभाव अभी भी व्यापक है। उनके अनुसार:
उन्होंने कुछ हालिया उदाहरण भी दिए:
टर्क ने यह भी चेतावनी दी कि कुछ देशों में ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं जो LGBTIQ+ मुद्दों से जुड़ी जानकारी साझा करने तक को दंडनीय बना सकते हैं। इससे मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों और कार्यकर्ताओं की आवाज़ सीमित हो सकती है। उन्होंने बेलारूस और कज़ाख़स्तान जैसे देशों में ऐसे प्रतिबंधों का उल्लेख किया ।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर LGBTIQ+ समुदाय—खासकर ट्रांसजेंडर लोगों—के खिलाफ बढ़ती नफरत को अक्सर कुछ राजनीतिक नेताओं की तीखी बयानबाज़ी बढ़ावा देती है। उन्होंने सरकारों और टेक कंपनियों से ऑनलाइन दुर्व्यवहार पर कार्रवाई करने का आह्वान किया ।
UNDP के प्रशासक अलेक्जेंडर डे क्रू ने कहा कि समानता और समावेशन लोकतंत्र के लिए अतिरिक्त मूल्य नहीं, बल्कि उसका मूल आधार हैं। उनके शब्दों में, “समानता और समावेशन लोकतंत्र का धड़कता हुआ दिल हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि जब LGBTIQ+ लोगों को समाज से बाहर किया जाता है या उन्हें अपराधी बनाया जाता है, तो इससे:
इस संदर्भ में UN Trans Advocacy Week जैसी पहल भी महत्वपूर्ण बताई गई। इस कार्यक्रम के तहत ट्रांस और जेंडर‑डायवर्स समुदाय के नेताओं को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मंचों पर लाकर अंतरराष्ट्रीय नीति‑निर्माताओं से सीधे संवाद का अवसर दिया जाता है ।
नागरिक समाज संगठनों के अनुसार यह पहल इसलिए जरूरी है क्योंकि ट्रांस लोगों के बारे में अक्सर चर्चा तो होती है, लेकिन उनकी अपनी आवाज़ कम सुनी जाती है। यह कार्यक्रम उन्हें अपने अनुभव और मांगें सीधे वैश्विक मंच तक पहुंचाने का मौका देता है ।
2026 के इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र का केंद्रीय संदेश साफ था: लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब हर व्यक्ति—चाहे उसकी लैंगिक पहचान या यौन अभिविन्यास कुछ भी हो—बिना डर के जी सके और समाज में समान रूप से भाग ले सके ।
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संयुक्त राष्ट्र के नेताओं ने चेतावनी दी कि LGBTIQ+ अधिकारों पर वैश्विक स्तर पर संगठित तरीके से पीछे हटने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है—कुछ देशों में आपराधिककरण बढ़ रहा है, नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित हो रही हैं और ऑनलाइन...
संयुक्त राष्ट्र के नेताओं ने चेतावनी दी कि LGBTIQ+ अधिकारों पर वैश्विक स्तर पर संगठित तरीके से पीछे हटने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है—कुछ देशों में आपराधिककरण बढ़ रहा है, नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित हो रही हैं और ऑनलाइन... 2026 की थीम “At the Heart of Democracy” इस बात पर जोर देती है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब सभी लोगों—समेत LGBTIQ+ समुदाय—को समान अधिकार, सुरक्षा और भागीदारी मिले [10][11]।
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि ‘आप जो हैं, वह होना कभी अपराध नहीं होना चाहिए’ और चेतावनी दी कि कई जगह अभिव्यक्ति व शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता पर रोक लगाकर अधिकारों को पीछे धकेला जा रहा है [10]।