इन ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से संयुक्त सैन्य खरीद या रणनीतिक क्षमताओं के विकास के लिए किया जाना है—जैसे एयर‑डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और अन्य उन्नत सैन्य तकनीक। कार्यक्रम स्वैच्छिक है और देश अपनी जरूरत के अनुसार लंबी अवधि के कम‑ब्याज ऋण ले सकते हैं।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने चेतावनी दी है कि अगर EU अपने वित्तीय नियमों में अधिक लचीलापन नहीं देता, तो SAFE में इटली की भागीदारी सीमित हो सकती है। उनका प्रस्ताव है कि EU की “नेशनल एस्केप क्लॉज”, जो फिलहाल रक्षा खर्च पर लागू है, उसे अस्थायी रूप से ऊर्जा संकट से निपटने वाले निवेश और राहत उपायों तक भी बढ़ाया जाए।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को लिखे पत्र में रोम ने तर्क दिया कि सरकारों को ऊर्जा संकट से जुड़े निवेश और सहायता कार्यक्रमों का खर्च बजट घाटे की गणना से बाहर रखने की अनुमति मिलनी चाहिए।
सरल शब्दों में, इटली का संदेश है: अगर EU रक्षा खर्च के लिए बजट नियमों में छूट दे सकता है, तो ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भी वैसी ही छूट देनी चाहिए।
इटली का यह रुख मुख्य रूप से बढ़ती ऊर्जा कीमतों से पैदा हुए आर्थिक दबाव से जुड़ा है।
सरकारी योजना दस्तावेजों के अनुसार ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और कमजोर आर्थिक वृद्धि ने पहले ही इटली की रक्षा खर्च बढ़ाने की योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं और व्यवसायों को ऊर्जा बिलों से राहत देना राजनीतिक रूप से जरूरी है। लेकिन यदि सरकार एक साथ रक्षा निवेश बढ़ाए और ऊर्जा सब्सिडी भी दे, तो इससे सार्वजनिक वित्त पर भारी दबाव पड़ेगा।
इसी वजह से इटली ने फिलहाल रक्षा खर्च से पहले ऊर्जा राहत को प्राथमिकता दी है। उदाहरण के तौर पर, रोम ने उस EU तंत्र का उपयोग भी नहीं किया जिससे लगभग €12 अरब अतिरिक्त रक्षा खर्च संभव हो सकता था।
इस विवाद के पीछे इटली की पुरानी वित्तीय चुनौतियाँ भी हैं।
EU के स्थिरता और विकास समझौते के तहत सदस्य देशों को अपना बजट घाटा GDP के 3% से नीचे रखना होता है।
इटली की सरकार धीमी आर्थिक वृद्धि और बढ़ती ऊर्जा लागत के बीच इसी सीमा के भीतर रहने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बड़े नए रक्षा कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त उधारी लेना कठिन हो जाता है।
रोम का तर्क है कि अगर यूरोप रक्षा निवेश को असाधारण रणनीतिक प्राथमिकता मानता है, तो ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखना भी उसी स्तर की प्राथमिकता माना जाना चाहिए।
कई विश्लेषकों के अनुसार मेलोनी की यह चेतावनी EU रक्षा सहयोग के खिलाफ सीधा विरोध नहीं है, बल्कि एक मोलभाव की रणनीति है।
SAFE में भागीदारी को ऊर्जा खर्च के लिए वित्तीय लचीलेपन से जोड़कर इटली ब्रसेल्स में “रणनीतिक खर्च” की परिभाषा को व्यापक करने की कोशिश कर रहा है। रोम का तर्क है कि ऊर्जा सुरक्षा भी सैन्य सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है।
हालाँकि यूरोपीय आयोग ने अभी तक नियमों में बदलाव का संकेत नहीं दिया है और उसने इटली को मौजूदा EU फंड और उपलब्ध वित्तीय विकल्पों का उपयोग करने की सलाह दी है।
यह विवाद एक व्यापक समस्या को भी उजागर करता है। आज कई यूरोपीय देशों को एक साथ तीन बड़े लक्ष्य पूरे करने पड़ रहे हैं:
खासतौर पर इटली जैसे उच्च कर्ज वाले देशों के लिए इन तीनों लक्ष्यों को संतुलित करना बेहद कठिन होता जा रहा है। SAFE को लेकर मेलोनी और EU के बीच चल रहा टकराव इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यूरोप की रक्षा और आर्थिक नीति दोनों पर ऐसे दबाव और बढ़ सकते हैं।
आखिरकार इटली SAFE कार्यक्रम में पूरी तरह शामिल होगा या नहीं, यह रक्षा नीति से ज्यादा इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या ब्रसेल्स ऊर्जा खर्च के लिए वह बजट लचीलापन देने को तैयार होता है जिसकी मांग रोम कर रहा है।