मध्य मई तक भी स्टोरेज लगभग 34% भरा हुआ था, जबकि यूरोपीय संघ का लक्ष्य है कि सर्दियों से पहले इसे लगभग 80% तक पहुँचाया जाए ।
इसका मतलब है कि अप्रैल से अक्टूबर के बीच यूरोप को बहुत बड़ी मात्रा में गैस खरीदकर स्टोरेज में भरनी होगी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। क़तर जैसे बड़े LNG निर्यातक देशों की अधिकांश गैस इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुँचती है।
यदि इस मार्ग पर संघर्ष, हमले या शिपिंग में बाधा आती है, तो LNG जहाज़ों की आवाजाही धीमी हो सकती है या अस्थायी रूप से रुक सकती है। इससे वैश्विक बाजार में गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ जाती है ।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्रीय संघर्ष और हमलों ने पहले ही क़तर की LNG निर्यात क्षमता के एक हिस्से को प्रभावित किया है और जलडमरूमध्य से गुजरने वाली शिपिंग को धीमा कर दिया है ।
चूँकि दुनिया की लगभग एक‑पाँचवां हिस्सा LNG सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है, इसलिए आंशिक बाधा भी वैश्विक गैस बाजार को कस सकती है और कीमतों को ऊपर धकेल सकती है ।
यूरोप का गैस स्टोरेज सिस्टम मूल रूप से एक मौसमी बफर की तरह काम करता है:
लेकिन स्टोरेज भरने के लिए लगातार सप्लाई चाहिए। यदि खाड़ी क्षेत्र से आने वाले LNG कार्गो देर से पहुँचते हैं या कम हो जाते हैं, तो यूरोप को बाकी दुनिया के खरीदारों के साथ अधिक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
ऐसे हालात में यूरोप अक्सर अधिक कीमत देकर जहाज़ों को अपनी ओर मोड़ता है। इसलिए वास्तविक कमी न होने पर भी कीमतों में तेज उतार‑चढ़ाव आ सकता है और स्टोरेज भरना महंगा या धीमा हो सकता है ।
असल चुनौती सिर्फ मौजूदा संकट नहीं है—बल्कि पिछले कुछ वर्षों में यूरोप की ऊर्जा प्रणाली में आया बड़ा बदलाव है।
2022 के बाद यूरोप ने रूसी पाइपलाइन गैस पर निर्भरता तेजी से कम कर दी और उसकी जगह बड़े पैमाने पर LNG आयात शुरू किया।
इससे एक फायदा जरूर हुआ—सप्लाई के स्रोत विविध हो गए। लेकिन इसके साथ कुछ नई कमजोरियाँ भी जुड़ गईं।
पाइपलाइन गैस आम तौर पर तय मार्गों और दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से आती है। इसके विपरीत LNG एक वैश्विक शिपिंग बाजार पर निर्भर करता है, जो कई कारकों से प्रभावित होता है:
इस वजह से यूरोप की गैस आपूर्ति अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू‑राजनीतिक घटनाओं से कहीं अधिक जुड़ गई है ।
आज की LNG‑आधारित व्यवस्था में यूरोप आम तौर पर गैस हासिल कर सकता है—लेकिन अक्सर ज्यादा कीमत देकर। यानी ऊर्जा सुरक्षा अब तय पाइपलाइन सप्लाई से नहीं, बल्कि बाजार कीमतों से तय होती है।
जब स्टोरेज कम हो और सप्लाई जोखिम बढ़ जाए, तो बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है—जैसा कि हाल में €50/MWh से ऊपर की कीमतों में देखा गया।
आने वाले महीनों में यूरोप की गैस स्थिति कुछ प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:
यूरोपीय आयोग का कहना है कि मौजूदा बुनियादी ढाँचा नवंबर तक स्टोरेज को कम से कम 80% तक भरने में सक्षम है, लेकिन यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि LNG सप्लाई कितनी उपलब्ध रहती है ।
इसका मतलब है कि 2026 का गैस स्टोरेज सीज़न यूरोप के लिए हाल के वर्षों में सबसे चुनौतीपूर्ण में से एक हो सकता है—जहाँ हजारों किलोमीटर दूर होने वाली भू‑राजनीतिक घटनाएँ भी सीधे यूरोप की ऊर्जा कीमतों और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
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