Anthropic का Mythos AI बड़े सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमजोरियाँ तेजी से खोज सकता है और अब तक प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम व ब्राउज़रों में हजारों संभावित खामियाँ पहचान चुका है। [8] कंपनी ने इस मॉडल को सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया है और केवल चुनिंदा तकनीकी व साइबर सुरक्षा संगठनों को Project Glasswing के तहत सीमित एक्सेस...

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब साइबर सुरक्षा की दुनिया को तेजी से बदल रहा है। इसी बदलाव का सबसे चर्चित उदाहरण है Anthropic का अभी तक सार्वजनिक रूप से जारी न किया गया मॉडल — Claude Mythos। यह एक उन्नत AI सिस्टम है जो विशाल सॉफ्टवेयर सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर में छिपी सुरक्षा कमजोरियों को पहचानने के लिए बनाया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार यह मॉडल इतनी तेजी और सटीकता से कमजोरियाँ खोज सकता है कि कंपनी ने इसे सार्वजनिक रूप से जारी करने के बजाय वैश्विक वित्तीय नियामकों को ब्रीफ करना शुरू कर दिया है। इसमें Financial Stability Board (FSB) और G20 से जुड़े केंद्रीय बैंक व वित्त मंत्रालय शामिल हैं। मुख्य चिंता यह है कि यही तकनीक यदि गलत हाथों में चली गई तो साइबर हमलों को भी तेज कर सकती है।
Claude Mythos एक “फ्रंटियर” AI मॉडल है जिसे बड़े पैमाने के सॉफ्टवेयर सिस्टम का विश्लेषण करने और सुरक्षा कमजोरियाँ खोजने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसकी कोड समझने और तर्क करने की क्षमता इसे जटिल कोडबेस, ऑपरेटिंग सिस्टम और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर का विश्लेषण करने में सक्षम बनाती है।
रिपोर्टों के मुताबिक यह मॉडल पहले ही प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउज़रों में हजारों कमजोरियाँ पहचान चुका है—जिनमें से कई सालों से छिपी रह सकती थीं।
सुरक्षा टीमों के लिए यह बेहद उपयोगी हो सकता है, क्योंकि अगर कमजोरियाँ जल्दी मिल जाएँ तो उन्हें पैच करके हमले से पहले ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन यही क्षमता इसे विवादास्पद भी बनाती है: अगर कोई AI तेजी से कमजोरियाँ खोज सकता है, तो हमलावर भी उनका उतनी ही तेजी से फायदा उठा सकते हैं।
Financial Stability Board (FSB) एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो G20 देशों के केंद्रीय बैंकों, वित्त मंत्रालयों और नियामकों के बीच समन्वय करता है। इसका काम वैश्विक वित्तीय प्रणाली की स्थिरता से जुड़े जोखिमों पर नज़र रखना है।
रिपोर्टों के अनुसार Anthropic का Mythos मॉडल वैश्विक वित्तीय सिस्टम से जुड़े कुछ साइबर जोखिमों की पहचान कर चुका है। इसी वजह से Bank of England के गवर्नर एंड्रयू बेली—जो FSB के चेयर भी हैं—ने कंपनी को G20 देशों के अधिकारियों के सामने प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया है।
आज की बैंकिंग प्रणाली भारी मात्रा में डिजिटल तकनीक पर निर्भर है—जैसे क्लाउड प्लेटफॉर्म, भुगतान नेटवर्क, ऑथेंटिकेशन सिस्टम और बैंकिंग सॉफ्टवेयर। यदि इनमें इस्तेमाल होने वाले किसी व्यापक सॉफ्टवेयर में गंभीर कमजोरी हो, तो उसका असर कई वित्तीय संस्थानों पर एक साथ पड़ सकता है।
Anthropic ने Mythos को आम उपयोग के लिए जारी नहीं किया है। कारण यह है कि यह मॉडल सॉफ्टवेयर कमजोरियाँ खोजने की लागत, समय और तकनीकी कठिनाई को काफी कम कर सकता है।
यदि ऐसा टूल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाए, तो अपराधी गिरोह या राज्य समर्थित हैकर बड़े पैमाने पर ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र या अन्य महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर में कमजोरियाँ ढूँढकर उनका दुरुपयोग कर सकते हैं।
इसी वजह से कंपनी इसे सामान्य AI उत्पाद की तरह नहीं बल्कि संवेदनशील साइबर सुरक्षा तकनीक की तरह संभाल रही है।
सार्वजनिक लॉन्च के बजाय Anthropic ने Project Glasswing नाम की पहल शुरू की है। इसके तहत केवल चुनिंदा संगठनों को Mythos मॉडल का शुरुआती एक्सेस दिया गया है ताकि वे अपने सिस्टम में कमजोरियाँ खोजकर उन्हें ठीक कर सकें।
इन भागीदार संगठनों में दुनिया की कुछ प्रमुख टेक और साइबर सुरक्षा कंपनियाँ शामिल हैं, जैसे:
इन संगठनों के पास ऐसे प्लेटफॉर्म और इंफ्रास्ट्रक्चर हैं जिन पर अरबों लोग निर्भर हैं। Project Glasswing का लक्ष्य है कि हमलावरों से पहले ही इन सिस्टमों की कमजोरियाँ खोजकर उन्हें ठीक किया जाए।
वित्तीय नियामक अब उन्नत AI‑आधारित साइबर टूल्स को सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता से जुड़ा जोखिम मानने लगे हैं।
Financial Stability Board ने पहले भी चेतावनी दी है कि AI कई तरह से वित्तीय प्रणाली की कमजोरियों को बढ़ा सकता है, जैसे:
क्योंकि बैंक, भुगतान नेटवर्क और वित्तीय बाजार अक्सर एक ही सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म या क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर होते हैं, इसलिए एक गंभीर कमजोरी कई संस्थानों को एक साथ प्रभावित कर सकती है। यदि AI कमजोरियाँ खोजने या उनका दुरुपयोग करने की गति बढ़ा देता है, तो उसका प्रभाव पूरे वैश्विक वित्तीय सिस्टम तक फैल सकता है।
Mythos के बारे में अभी भी कई महत्वपूर्ण बातें सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
Anthropic ने यह नहीं बताया है कि मॉडल ने किन खास कमजोरियों की पहचान की, वे कितनी गंभीर हैं, या क्या स्वतंत्र सुरक्षा शोधकर्ताओं ने उन्हें सत्यापित किया है। उपलब्ध जानकारी का बड़ा हिस्सा कंपनी के बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।
यह गोपनीयता भी उसी दुविधा को दिखाती है: अगर कमजोरियों के बारे में बहुत अधिक जानकारी सार्वजनिक कर दी जाए, तो वही जानकारी नए साइबर हमलों का कारण बन सकती है।
Mythos एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है। भविष्य में AI ऐसे काम कर सकता है जिनके लिए पहले सुरक्षा शोधकर्ताओं को महीनों लगते थे—और वह भी कुछ मिनटों या घंटों में।
सरकारों, तकनीकी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के सामने अब एक नई चुनौती है: AI को इतनी तेजी से तैनात करना कि वह महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा कर सके—लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना कि वही तकनीक बड़े पैमाने के साइबर हमलों को आसान न बना दे।
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Anthropic का Mythos AI बड़े सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमजोरियाँ तेजी से खोज सकता है और अब तक प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम व ब्राउज़रों में हजारों संभावित खामियाँ पहचान चुका है। [8]
Anthropic का Mythos AI बड़े सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमजोरियाँ तेजी से खोज सकता है और अब तक प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम व ब्राउज़रों में हजारों संभावित खामियाँ पहचान चुका है। [8] कंपनी ने इस मॉडल को सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया है और केवल चुनिंदा तकनीकी व साइबर सुरक्षा संगठनों को Project Glasswing के तहत सीमित एक्सेस दिया है ताकि पहले से कमजोरियाँ ठीक की जा सकें। [3][10]
Financial Stability Board और G20 नियामकों को चिंता है कि यदि ऐसा AI गलत हाथों में पहुँच गया तो यह वैश्विक बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों के लिए सिस्टम‑स्तरीय जोखिम पैदा कर सकता है। [1][2][20]