केमिकल उद्योग के लिए तेल और गैस केवल ऊर्जा ही नहीं बल्कि कच्चा माल भी हैं। इसलिए जब कच्चे तेल, एलएनजी और शिपिंग की कीमतें बढ़ती हैं तो इन कंपनियों के मार्जिन पर सीधा दबाव पड़ता है ।
खनन कंपनियों की लागत कई स्तरों पर बढ़ी है, जैसे:
खाद्य और दैनिक उपयोग के सामान बनाने वाली कंपनियों को भी महंगे पैकेजिंग मटेरियल, कच्चे माल और परिवहन लागत का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन कमजोर उपभोक्ता मांग के कारण वे सभी लागतें सीधे ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहीं ।
फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है।
इसी मार्ग से दुनिया के करीब 20% एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का व्यापार भी होता है। इसलिए अगर इस रास्ते में बाधा आती है तो तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इसका असर कई स्तरों पर दिखाई देता है:
विशेष रूप से यूरोप और एशिया जैसे क्षेत्र, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं, कीमतों में बढ़ोतरी से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं ।
बढ़ते जोखिम को देखते हुए कई कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। उदाहरण के तौर पर:
कुछ कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं, जबकि कई ने अपने वित्तीय पूर्वानुमान (forecasts) घटा दिए हैं क्योंकि वे बढ़ी हुई लागत पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहीं ।
विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है। कई कंपनियों के पास ईंधन हेजिंग, पुराने अनुबंध या इन्वेंट्री बफर हैं, जिससे वास्तविक लागत का असर देर से दिखाई देता है ।
अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा लंबी चली या बढ़ी, तो ऊर्जा और कच्चे माल की महंगाई धीरे‑धीरे परिवहन, केमिकल, खाद्य, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल जैसे और क्षेत्रों तक फैल सकती है ।
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