क्यूबा के नेताओं ने इन आरोपों को तुरंत खारिज कर दिया।
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज़ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह एक "धोखाधड़ीपूर्ण मामला" गढ़ रहा है ताकि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों या संभावित सैन्य हस्तक्षेप को सही ठहराया जा सके।
रोड्रिगेज़ ने कहा कि क्यूबा "न तो युद्ध चाहता है और न ही किसी को धमकी देता है" और देश केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बाहरी आक्रमण से अपनी रक्षा की तैयारी करता है।
क्यूबा के विदेश मंत्रालय ने भी इसी तरह का बयान देते हुए कहा कि यदि द्वीप पर हमला हुआ तो देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत वैध आत्मरक्षा के अपने अधिकार का उपयोग करेगा।
क्यूबा के उप विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांदेज़ दे कोस्सियो ने भी अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह लगातार बढ़ते आरोपों के जरिए क्यूबा के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार यह अभियान "घंटे‑घंटे तेज़ हो रहा है" और दावे "दिन-ब-दिन अधिक अविश्वसनीय" होते जा रहे हैं।
ड्रोन से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका क्यूबा पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है।
1 मई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत क्यूबा के अधिकारियों और संस्थाओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा दिया गया।
इस आदेश ने पहले से मौजूद प्रतिबंध ढांचे को विस्तारित किया और अमेरिकी सरकार को उन व्यक्तियों, कंपनियों या विदेशी संस्थानों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया जो क्यूबा सरकार से जुड़े माने जाते हैं।
क्योंकि ड्रोन से जुड़ी रिपोर्ट इसी समय सामने आई, इसलिए क्यूबा के अधिकारियों और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस कथित खतरे की कहानी को कड़े प्रतिबंधों या अन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस विवाद में फिलहाल दो बिल्कुल अलग‑अलग दावे सामने हैं:
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस खुफिया जानकारी का हवाला दिया जा रहा है वह अभी भी गोपनीय है, और सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण जारी नहीं हुआ है जो कथित ड्रोन सौदों या किसी हमले की योजना की स्वतंत्र पुष्टि करता हो।
फिलहाल यह विवाद दिखाता है कि ड्रोन जैसी नई सैन्य तकनीकें पुराने भू‑राजनीतिक टकरावों—जैसे अमेरिका और क्यूबा के लंबे तनावपूर्ण रिश्ते—को और तेज़ कर सकती हैं।
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