इसी समय EU संस्थानों ने LGBTQ अधिकारों से जुड़ी व्यापक नीतियों को भी सामने रखा, खासकर यूरोपीय आयोग की नई LGBTIQ+ Equality Strategy 2026–2030 को।
EU के नियमों के अनुसार यदि किसी European Citizens’ Initiative को कम से कम 10 लाख वैध हस्ताक्षर मिल जाते हैं, तो यूरोपीय आयोग को उस प्रस्ताव की समीक्षा कर आधिकारिक प्रतिक्रिया देनी होती है।
मई 2026 में आयोग ने “Ban on conversion practices in the European Union” नामक इस पहल पर औपचारिक संचार (communication) जारी किया। यह प्रतिक्रिया IDAHOBIT से कुछ ही दिन पहले आई और इसमें LGBTQ अधिकारों के प्रति EU की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
हालाँकि उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट है कि आयोग ने अभी तक पूरे EU में तुरंत लागू होने वाला कानूनी प्रतिबंध प्रस्तावित नहीं किया है। इसके बजाय आयोग ने संभावित कानूनी विकल्पों का अध्ययन करने और व्यापक समानता नीति ढांचे के भीतर इस मुद्दे पर आगे काम करने की बात कही है।
साथ ही, EU अधिकारियों ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी प्रथाओं को रोकने या प्रतिबंधित करने के उपाय करें, क्योंकि इन्हें व्यक्तियों की पहचान को दबाने वाले हानिकारक हस्तक्षेप माना जाता है।
यूरोपीय आयोग की नई रणनीति अगले पाँच वर्षों के लिए LGBTQ समानता से जुड़ी EU नीतियों की दिशा तय करती है। इसका आधार यह सिद्धांत है कि EU में हर व्यक्ति सुरक्षित रहे और अपनी पहचान के साथ स्वतंत्र रूप से जी सके।
रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
1. Protection (सुरक्षा)
LGBTIQ+ लोगों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और भेदभाव को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करना, जिसमें हेट क्राइम और हानिकारक प्रथाओं के खिलाफ बेहतर कार्रवाई शामिल है।
2. Empowerment (सशक्तिकरण)
समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति में समान भागीदारी सुनिश्चित करना। इसमें समानता संस्थाओं को मजबूत करना और रोजगार तथा सार्वजनिक सेवाओं में भेदभाव रोकना शामिल है।
3. Engagement (सहभागिता)
EU संस्थानों, सदस्य देशों और नागरिक समाज के बीच सहयोग बढ़ाकर समावेशी नीतियों को लागू करना।
रणनीति का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य यह भी है कि LGBTIQ+ समानता को EU की विभिन्न नीतियों में मुख्यधारा (mainstream) का हिस्सा बनाया जाए, ताकि “Union of Equality” की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा सके।
इस साल IDAHOBIT के आसपास हुई गतिविधियाँ इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं क्योंकि यूरोप में LGBTQ समुदाय के खिलाफ भेदभाव और उत्पीड़न अब भी व्यापक है।
यूरोपीय आयोग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार लगभग हर तीन में से एक LGBTIQ+ व्यक्ति ने पिछले 12 महीनों में भेदभाव का अनुभव किया।
EU की एजेंसी Fundamental Rights Agency (FRA) के बड़े सर्वेक्षणों में भी पाया गया है कि यूरोप में कई लोग अब अपनी पहचान के साथ खुलकर जी रहे हैं, लेकिन उत्पीड़न और हिंसा के मामले अभी भी व्यापक हैं।
ऐसे माहौल में कन्वर्ज़न प्रैक्टिस पर प्रतिबंध की मांग करने वाली पहल को कम समय में मिले लाखों हस्ताक्षर यह दिखाते हैं कि नागरिक स्तर पर भी मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग बढ़ रही है।
इस साल IDAHOBIT के दौरान जो घटनाएँ सामने आईं, वे यह संकेत देती हैं कि यूरोपीय संघ अब जागरूकता अभियानों को ठोस नीतिगत कदमों और नागरिक भागीदारी से जोड़ रहा है।
कन्वर्ज़न प्रैक्टिस पर EU‑व्यापी प्रतिबंध को लेकर अंतिम निर्णय अभी दूर हो सकता है। फिर भी नागरिकों की बड़ी पहल, यूरोपीय संसद की सक्रियता और नई 2026–2030 रणनीति यह संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में EU की राजनीति और नीति‑निर्माण में LGBTIQ+ अधिकार एक प्रमुख मुद्दा बने रहेंगे।
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