कैलास के शब्दों में, यदि यूरोप एक साथ खड़ा रहता है तो वह अन्य बड़ी शक्तियों के बराबर ताकत बन सकता है।
कैलास की यह चेतावनी उस समय आई है जब EU और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में तनाव दिखाई दे रहा है। जुलाई 2025 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टैरिफ और व्यापार को लेकर एक राजनीतिक समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य व्यापार में “स्थिरता” और “पूर्वानुमेयता” लाना था।
लेकिन उस समझौते को लागू करने की प्रक्रिया आसान नहीं रही। यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं, और वार्ताकारों का कहना है कि अभी भी समझौते को अंतिम रूप देने में समय लगेगा।
यूरोपीय संसद के प्रमुख वार्ताकार बर्न्ड लांगे ने भी कहा कि कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अभी “काफी रास्ता तय करना बाकी है।”
इसी पृष्ठभूमि में कैलास का तर्क है कि यदि EU देश अमेरिका से अलग‑अलग समझौते करेंगे तो पूरे यूरोपीय एकल बाजार की सामूहिक ताकत कमजोर हो जाएगी और ब्रसेल्स के लिए एक साझा रणनीति बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
एक और बड़ी चुनौती यह है कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूस से सीधे संवाद होना चाहिए या नहीं—इस मुद्दे पर EU के सदस्य देश खुद बंटे हुए हैं। कुछ देश मानते हैं कि बातचीत शुरू करनी चाहिए, जबकि अन्य का मानना है कि पहले रूस की स्थिति कमजोर होने का इंतजार करना बेहतर होगा।
कैलास ने यह भी कहा है कि रूस फिलहाल शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं ले रहा और यूरोप को सावधानी से कदम उठाने चाहिए।
रूस की ओर से भी कैलास की भूमिका पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अगर EU और रूस के बीच कभी बातचीत होती है तो कैलास के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाना “आसान नहीं होगा।” उन्होंने संकेत दिया कि मॉस्को ऐसे वार्ताकार को प्राथमिकता देगा जिसने रूस के खिलाफ कठोर बयान न दिए हों।
इन घटनाओं से साफ है कि यूरोप इस समय कई दबावों के बीच है—यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के साथ बदलते संबंध, और EU के अंदर नीतिगत मतभेद। ऐसे माहौल में कैलास की अपील का मूल संदेश यही है: यदि यूरोप एकजुट नहीं रहा, तो उसकी वैश्विक राजनीतिक ताकत कमजोर पड़ सकती है और बाहरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है।
दूसरे शब्दों में, यह बहस केवल कूटनीति की नहीं बल्कि यूरोप की भविष्य की सामूहिक शक्ति की भी है।
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