बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर अमेरिकी सीनेट की सख्ती, बड़े टेक CEO को फिर तलब
अमेरिकी सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने Meta, Alphabet, TikTok और Snap के CEO को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर संभावित सुनवाई के लिए बुलाया है। कांग्रेस का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब भी बच्चों को हानिकारक कंटेंट, ऑनलाइन शोषण और एल्गोरिदमिक ‘आदत लगाने वाले’ फीचर्स से पर्याप्त रूप से नहीं बचा पा रहे। संघीय स्तर पर...
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अमेरिकी सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने Meta, Alphabet, TikTok और Snap के CEO को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर संभावित सुनवाई के लिए बुलाया है।
कांग्रेस का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब भी बच्चों को हानिकारक कंटेंट, ऑनलाइन शोषण और एल्गोरिदमिक ‘आदत लगाने वाले’ फीचर्स से पर्याप्त रूप से नहीं बचा पा रहे।
संघीय स्तर पर नए कानूनों पर बहस जारी है, जबकि कई अमेरिकी राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अपने नियम बनाना शुरू कर दिया है।
What is happening with the renewed U.SU.S. lawmakers are increasing pressure on major social media platforms over how their services affect children and teenagers online.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is happening with the renewed U.S. Senate push to question Meta, Alphabet, TikTok, and Snap CEOs about children’s online safety, who ha. Article summary: The Senate Judiciary Committee is trying to bring major social-media CEOs back to Capitol Hill for a June hearing on children’s online safety, reflecting bipartisan frustration that prior hearings and voluntary platform . Topic tags: general, government, general web, education, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "US senators have invited the CEOs of Meta, Alphabet, TikTok and Snap to testify about children’s online safety as lawmakers intensify scrutiny of social media platforms and their i" source context "Tech CEOs invited to Capitol Hill to answer questions about kids online safety" Reference ima
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बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर अमेरिका की राजनीति के केंद्र में आ गई है। इसी वजह से अमेरिकी सीनेट की Judiciary Committee ने बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को वॉशिंगटन डी.सी. में संभावित सुनवाई के लिए बुलाया है।
Meta, Alphabet (Google), TikTok और Snap के CEO से यह पूछा जाएगा कि उनके प्लेटफॉर्म बच्चों को किस तरह प्रभावित करते हैं और नाबालिग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं। यह पहल इस बात का संकेत है कि दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों—डेमोक्रेट और रिपब्लिकन—के बीच सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव बढ़ाने को लेकर व्यापक सहमति बनती जा रही है।
किन‑किन CEO को बुलाया गया है
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी के चेयरमैन चक ग्रासली ने चार प्रमुख टेक नेताओं को जून में संभावित सुनवाई के लिए आमंत्रित किया है:
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अमेरिकी सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने Meta, Alphabet, TikTok और Snap के CEO को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर संभावित सुनवाई के लिए बुलाया है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
अमेरिकी सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने Meta, Alphabet, TikTok और Snap के CEO को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर संभावित सुनवाई के लिए बुलाया है। कांग्रेस का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब भी बच्चों को हानिकारक कंटेंट, ऑनलाइन शोषण और एल्गोरिदमिक ‘आदत लगाने वाले’ फीचर्स से पर्याप्त रूप से नहीं बचा पा रहे।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
संघीय स्तर पर नए कानूनों पर बहस जारी है, जबकि कई अमेरिकी राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अपने नियम बनाना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस के सदस्य उनसे यह जानना चाहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए मौजूद जोखिमों—जैसे अनुचित सामग्री, ऑनलाइन शोषण और एल्गोरिदमिक कंटेंट—को कैसे संभालते हैं। इससे पहले भी कई हाई‑प्रोफाइल सुनवाई में सांसदों ने टेक कंपनियों पर आरोप लगाया था कि वे युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं।
कांग्रेस फिर क्यों उठा रही है यह मुद्दा
पिछले कई वर्षों में अमेरिकी संसद में इस विषय पर जांच, सुनवाई और कई सुधार प्रस्ताव आए हैं। लेकिन कई सांसदों का मानना है कि इन प्रयासों से अभी तक वास्तविक बदलाव नहीं आया है।
कांग्रेस के अनुसार सोशल मीडिया पर बच्चों के सामने कुछ बड़े खतरे बने हुए हैं:
हानिकारक या उम्र के लिहाज से अनुचित सामग्री
ऑनलाइन शोषण या शिकारी व्यवहार
एल्गोरिदम द्वारा लगातार दिखाया जाने वाला ‘आदत लगाने वाला’ कंटेंट
डेटा गोपनीयता और लक्षित विज्ञापन से जुड़े जोखिम
कई सांसदों का कहना है कि कंपनियों द्वारा स्वैच्छिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए अब कड़े कानूनी नियमों पर विचार किया जा रहा है।
किन संघीय कानूनों पर चल रही है बहस
बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में कई प्रमुख विधेयक चर्चा में हैं।
Kids Online Safety Act (KOSA)
यह प्रस्ताव सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक प्रकार की "ड्यूटी ऑफ केयर" लागू करने की बात करता है। इसका मतलब होगा कि कंपनियों को सक्रिय रूप से उन खतरों को कम करना होगा जो बच्चों को ऑनलाइन नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाल के संस्करण में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (First Amendment) से जुड़े चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ संशोधन भी किए गए हैं।
COPPA 2.0
Children and Teens’ Online Privacy Protection Act, जिसे आम तौर पर COPPA 2.0 कहा जाता है, 1998 के मूल COPPA कानून का अपडेटेड संस्करण है। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों के व्यक्तिगत डेटा की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करना है और गोपनीयता सुरक्षा को किशोर उपयोगकर्ताओं तक भी विस्तारित करना है।
Kids Off Social Media Act
2026 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में पेश इस प्रस्ताव का लक्ष्य बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित हानिकारक वातावरण से दूर रखना और माता‑पिता व नियामकों को अधिक नियंत्रण देना है।
हालांकि इन बिलों पर वर्षों से चर्चा हो रही है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, उम्र सत्यापन (age verification), गोपनीयता और कानून लागू करने की शक्तियों जैसे मुद्दों पर मतभेद के कारण अंतिम कानून बनने की प्रक्रिया धीमी रही है।
राज्यों ने शुरू कर दी है तेज कार्रवाई
जहां संघीय स्तर पर कानून अटकते रहे हैं, वहीं अमेरिका के कई राज्य अपने स्तर पर सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं।
2026 में ही लगभग 40 राज्यों और प्यूर्टो रिको में बच्चों के डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोग से जुड़े करीब 300 विधेयक पेश किए गए।
इनमें से कई प्रस्ताव निम्न मुद्दों पर केंद्रित हैं:
उपयोगकर्ताओं की आयु सत्यापन की अनिवार्यता
नाबालिगों के लिए माता‑पिता की अनुमति
एल्गोरिदमिक या “addictive” फीचर्स पर सीमाएं
हानिकारक सामग्री के लिए प्लेटफॉर्म की जवाबदेही
बच्चों के डेटा संग्रह पर प्रतिबंध
हालांकि इन कानूनों को अदालतों में चुनौती भी दी जा रही है। टेक उद्योग से जुड़े संगठन कहते हैं कि उम्र सत्यापन जैसे नियम First Amendment (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन कर सकते हैं और उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को भी खतरे में डाल सकते हैं।
TikTok पर अलग तरह का दबाव
Meta, Google और Snap के मुकाबले TikTok की स्थिति थोड़ी अलग है, क्योंकि उसके मामले में बच्चों की सुरक्षा के साथ‑साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस भी जुड़ी हुई है।
2024 में अमेरिकी कांग्रेस ने एक कानून पारित किया था जिसके तहत TikTok को अपनी चीनी मूल कंपनी ByteDance से अलग होना या अमेरिका में प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता था। सांसदों का तर्क था कि चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के कारण अमेरिकी उपयोगकर्ताओं के डेटा तक चीनी सरकार की पहुंच हो सकती है या एल्गोरिदम पर प्रभाव डाला जा सकता है।
इसके बाद TikTok ने अमेरिकी निवेशकों के साथ एक पुनर्गठन समझौता किया, जिसमें प्लेटफॉर्म के अमेरिकी संचालन को एक नए संयुक्त उद्यम के माध्यम से चलाने की योजना बनी और सुरक्षा निगरानी तंत्र भी शामिल किया गया।
फिर भी कई सांसदों को संदेह है कि इससे ByteDance का प्रभाव पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं। इसलिए TikTok से दो तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं:
क्या प्लेटफॉर्म बच्चों की पर्याप्त सुरक्षा करता है?
क्या उसकी मालिकाना संरचना राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम पैदा करती है?
क्यों बढ़ रहा है Big Tech पर दबाव
आज बड़ी टेक कंपनियां केवल जनमत की आलोचना ही नहीं बल्कि कई दिशाओं से बढ़ते दबाव का सामना कर रही हैं:
कांग्रेस की जांच और सार्वजनिक सुनवाई
संभावित नए संघीय नियम
राज्यों द्वारा पारित अलग‑अलग कानून
अदालतों में चल रही कानूनी चुनौतियां
सीनेट की संभावित सुनवाई इस बात का संकेत है कि अमेरिकी सांसद सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार जवाबदेह बनाए रखना चाहते हैं। कई दौर की सुनवाई और प्लेटफॉर्म बदलावों के बावजूद, यह विषय अभी भी अमेरिकी टेक नीति बहस का एक केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है।