arXiv अब ऐसे पेपर पर एक साल का बैन लगा सकता है जिनमें बिना जाँचे AI‑जनरेटेड कंटेंट के स्पष्ट संकेत हों, जैसे नकली रेफरेंस या चैटबॉट टिप्पणियाँ। स्पष्ट सबूतों में LLM द्वारा बनाए गए काल्पनिक संदर्भ, चैटबॉट प्रॉम्प्ट या मॉडल की मेटा‑टिप्पणियाँ शामिल हो सकती हैं। बैन के बाद लेखक तभी दोबारा arXiv पर पोस्ट कर पाएँगे जब उ...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What new policy is arXiv implementing to crack down on careless AI-generated scientific papers, including what counts as evidence of uncheck. Article summary: Insufficient evidence. The provided evidence does not include the alleged new arXiv policy details about careless AI-generated scientific papers, the evidentiary standard for unchecked LLM use, author penalties, whether . Topic tags: general, general web, academic, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Dietterich, chair of arXiv's computer science moderators, a submission that contains "incontrovertible evidence that the authors did not check the results of LLM generation", examp" source context "arXiv imposes one-year ban for unchecked LLM output | Let's Data Science" Reference image 2: visual subjec
शोध प्रीप्रिंट प्लेटफ़ॉर्म arXiv ने हाल ही में अपने मॉडरेशन नियमों को सख़्ती से लागू करने की बात स्पष्ट की है। यदि किसी सबमिशन में यह स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि लेखकों ने बड़े भाषा मॉडल (LLM) द्वारा बनाए गए कंटेंट की ठीक से जाँच नहीं की, तो पेपर अस्वीकार किया जा सकता है और सभी सूचीबद्ध लेखकों पर एक साल का बैन लगाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नियम AI के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगाता। बल्कि यह अकादमिक प्रकाशन के पुराने सिद्धांत को दोहराता है: पेपर में मौजूद हर सामग्री की पूरी ज़िम्मेदारी लेखकों की होती है—चाहे वह इंसान ने लिखी हो या AI ने।
जनरेटिव AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मॉडरेटरों को कई ऐसे पेपर दिखने लगे जिनमें भाषा मॉडल के साफ़‑साफ़ निशान रह गए थे—जैसे काल्पनिक रेफरेंस या ऐसे कमेंट जो असल में चैटबॉट के लिए लिखे गए थे।
ऐसी गलतियाँ प्रीप्रिंट पर भरोसा कम कर सकती हैं, क्योंकि पाठकों या समीक्षकों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि पेपर के बाकी हिस्से कितने विश्वसनीय हैं। इसी वजह से arXiv ने स्पष्ट किया कि उसका Code of Conduct AI‑जनरेटेड सामग्री पर कैसे लागू होगा।
नीति उन स्थितियों पर केंद्रित है जहाँ साफ़ दिखता है कि AI आउटपुट बिना जाँचे सीधे पेपर में डाल दिया गया। उदाहरण के तौर पर:
ऐसे संकेत मिलने पर मॉडरेटर मान सकते हैं कि लेखकों ने सामग्री की जाँच नहीं की, जिससे पूरे पेपर की विश्वसनीयता संदिग्ध हो सकती है।
यदि arXiv मॉडरेटर तय करते हैं कि सबमिशन में बिना जाँचे LLM आउटपुट का स्पष्ट प्रमाण है, तो कई परिणाम हो सकते हैं:
यह नियम सभी लेखकों पर लागू होता है क्योंकि arXiv के अनुसार पेपर पर नाम देने वाला हर लेखक उसकी सामग्री के लिए ज़िम्मेदार होता है।
नहीं। arXiv ने जनरेटिव AI के उपयोग पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है। प्लेटफ़ॉर्म का कहना है कि AI टूल्स लेखन या विश्लेषण में मदद कर सकते हैं, लेकिन अंतिम सामग्री की जाँच और सटीकता की ज़िम्मेदारी पूरी तरह लेखकों की ही है।
यह वही मानक है जो अकादमिक जगत में पहले से लागू है: चाहे सॉफ़्टवेयर, सांख्यिकीय टूल या AI—आख़िरकार ज़िम्मेदारी शोधकर्ताओं की होती है।
arXiv के मॉडरेशन फैसले अंतिम नहीं होते। यदि लेखक मानते हैं कि उनका पेपर गलत तरीके से अस्वीकार किया गया है, तो वे arXiv की आधिकारिक अपील प्रक्रिया के माध्यम से पुनर्विचार का अनुरोध कर सकते हैं।
कुछ मामलों में, arXiv यह भी कह सकता है कि अपील पर विचार करने से पहले पेपर को किसी पारंपरिक जर्नल में स्वीकार किया जाए।
arXiv दुनिया भर में शुरुआती वैज्ञानिक शोध साझा करने के सबसे अहम प्लेटफ़ॉर्मों में से एक है। नई सख्ती यह दिखाती है कि अकादमिक समुदाय AI के फायदे स्वीकार करता है, लेकिन साथ ही नकली संदर्भों और तथ्यात्मक गलतियों के जोखिम को लेकर सतर्क भी है।
संदेश साफ़ है: AI से मदद लेना ठीक है, लेकिन बिना जाँचे AI आउटपुट के साथ शोध प्रकाशित करना स्वीकार्य नहीं है।
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arXiv अब ऐसे पेपर पर एक साल का बैन लगा सकता है जिनमें बिना जाँचे AI‑जनरेटेड कंटेंट के स्पष्ट संकेत हों, जैसे नकली रेफरेंस या चैटबॉट टिप्पणियाँ।
arXiv अब ऐसे पेपर पर एक साल का बैन लगा सकता है जिनमें बिना जाँचे AI‑जनरेटेड कंटेंट के स्पष्ट संकेत हों, जैसे नकली रेफरेंस या चैटबॉट टिप्पणियाँ। स्पष्ट सबूतों में LLM द्वारा बनाए गए काल्पनिक संदर्भ, चैटबॉट प्रॉम्प्ट या मॉडल की मेटा‑टिप्पणियाँ शामिल हो सकती हैं।
बैन के बाद लेखक तभी दोबारा arXiv पर पोस्ट कर पाएँगे जब उनका पेपर पहले किसी भरोसेमंद peer‑reviewed जर्नल में स्वीकार हो जाए।