मॉस्को की आर्बिट्रेशन कोर्ट ने यूरोक्लियर को रूस के केंद्रीय बैंक को 18.17 ट्रिलियन रूबल (लगभग 249 अरब डॉलर) का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह मामला EU द्वारा यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की लगभग €210 अरब की संपत्तियां फ्रीज़ करने और उनसे मिलने वाले मुनाफे को यूक्रेन के समर्थन में इस्तेमाल करने की योजना से जुड़ा है। यूरोक...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did a Moscow arbitration court justify ordering Euroclear to pay Russia’s central bank 18.17 trillion rubles ($249 billion) over frozen. Article summary: The Moscow court treated Euroclear’s compliance with EU asset-freeze measures as unlawful harm to Russia’s central bank and awarded the full claimed damages tied to immobilized sovereign assets. Euroclear rejects the rul. Topic tags: general, general web, government, education. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "A Russian court on Friday ordered Belgian financial group Euroclear to pay around $250 billion in damages over the freezing of billions of dollars worth of Russian assets in the Eu" source context "Russian court orders Euroclear to pay around $250 bn over frozen assets | Macau Business" Reference image 2: v
मॉस्को की एक आर्बिट्रेशन अदालत ने बेल्जियम स्थित सिक्योरिटीज़ डिपॉजिटरी Euroclear को रूस के केंद्रीय बैंक को 18.17 ट्रिलियन रूबल (लगभग 249 अरब डॉलर) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला उन रूसी सरकारी संपत्तियों से जुड़ा है जिन्हें यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद यूरोप में फ्रीज़ कर दिया गया था। यह रूस की अदालत द्वारा दिए गए सबसे बड़े वित्तीय फैसलों में से एक माना जा रहा है और पश्चिमी प्रतिबंधों को लेकर बढ़ते कानूनी टकराव को दिखाता है।
मॉस्को आर्बिट्रेशन कोर्ट ने रूस के केंद्रीय बैंक द्वारा दायर मुकदमे को पूरी तरह स्वीकार कर लिया। बैंक का दावा था कि यूरोक्लियर के पास रखी उसकी संपत्तियों को फ्रीज़ करने से उसे भारी वित्तीय नुकसान हुआ क्योंकि रूस उन फंड और सिक्योरिटीज़ का प्रबंधन या उपयोग नहीं कर सका।
रूसी केंद्रीय बैंक के अनुसार, विदेशी भंडार तक पहुंच रुकने से राज्य की संपत्ति प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गई। रूसी अधिकारियों ने कहा कि अदालत ने माना कि यूरोक्लियर की कार्रवाई गैरकानूनी थी और इससे केंद्रीय बैंक को नुकसान हुआ।
मामले की सुनवाई बंद दरवाजों के पीछे हुई और अदालत ने लगभग €200 अरब के बराबर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
यह विवाद सीधे तौर पर 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद लगाए गए यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिबंधों से जुड़ा है। इन प्रतिबंधों के तहत पश्चिमी वित्तीय संस्थानों में रखे रूसी केंद्रीय बैंक के भंडार को फ्रीज़ कर दिया गया था।
यूरोप में लगभग €210 अरब की रूसी केंद्रीय बैंक संपत्तियां अभी भी जमी हुई हैं, जिनमें से अधिकांश ब्रसेल्स स्थित यूरोक्लियर के पास रखी हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यूरोक्लियर ने अपने स्तर पर यह फैसला नहीं लिया था। उसने केवल EU के प्रतिबंधों का पालन किया, जो रूस के केंद्रीय बैंक से जुड़े फंड के लेन-देन पर रोक लगाते हैं। इन नियमों के कारण रूस इन संपत्तियों का उपयोग नहीं कर सका।
रूस के मुकदमे में इसी अनुपालन को गैरकानूनी बताते हुए कहा गया कि इससे उसकी संप्रभु संपत्ति और आय पर गलत तरीके से रोक लगी।
कानूनी विवाद को और तीखा बनाने वाला एक कारण EU की वह योजना है जिसमें फ्रीज़ की गई रूसी संपत्तियों से मिलने वाले मुनाफे को यूक्रेन की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
EU के Regulation (EU) 2024/1469 के तहत इन जमी हुई संपत्तियों के निवेश से मिलने वाली शुद्ध आय को यूक्रेन के पुनर्निर्माण, आर्थिक सहायता और रक्षा के लिए भेजा जा सकता है।
इनसे अरबों यूरो की आय पैदा हुई है। उदाहरण के लिए, यूरोक्लियर ने रिपोर्ट किया कि उसने इन फ्रीज़ संपत्तियों से होने वाली कमाई में से कई अरब यूरो यूक्रेन के समर्थन के लिए ट्रांसफर किए हैं।
रूस का तर्क है कि यह नीति उसके राज्य के धन का इस्तेमाल यूक्रेन की मदद के लिए करने के बराबर है। इसलिए यह मुकदमा सिर्फ संपत्ति फ्रीज़ करने के खिलाफ नहीं बल्कि उस पूरी पश्चिमी रणनीति को चुनौती देता है जिसमें इन संपत्तियों की आर्थिक कीमत को यूक्रेन के समर्थन में लगाया जा रहा है।
यूरोक्लियर ने मॉस्को अदालत के फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि वह इसके खिलाफ अपील करेगा। कंपनी का कहना है कि रूस का दावा निराधार है और वह रूसी अदालत के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देती।
कंपनी के वकीलों का यह भी कहना है कि बंद कमरे में सुनवाई होने के कारण निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हुआ।
यूरोक्लियर का मुख्य तर्क है कि उसने केवल EU कानून का पालन किया। यूरोपीय संघ में संचालित एक वित्तीय अवसंरचना संस्था होने के नाते उस पर रूसी संपत्तियों को फ्रीज़ करना कानूनी रूप से अनिवार्य था।
इस फैसले को रूस के बाहर लागू करना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।
यूरोक्लियर का मुख्यालय बेल्जियम में है और विवादित संपत्तियां EU कानून के तहत अभी भी फ्रीज़ हैं। इसलिए रूस को यह पैसा वसूलने के लिए अन्य देशों की अदालतों—खासकर यूरोपीय अदालतों—से इस फैसले को मान्यता दिलानी होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होना कठिन है क्योंकि यह EU के उन्हीं प्रतिबंधों से टकराएगा जिनके कारण संपत्तियां फ्रीज़ की गई थीं।
रूस संभवतः अपने देश के भीतर यूरोक्लियर से जुड़े किसी भी व्यापारिक हित या संपत्ति को निशाना बना सकता है, लेकिन विदेशों में पूरी राशि वसूल करना लगभग असंभव माना जा रहा है।
यह फैसला उस व्यापक विवाद का हिस्सा है जो रूस की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को लेकर चल रहा है।
पश्चिमी देश कहते हैं कि संपत्तियों को फ्रीज़ करना और उनसे होने वाली आय का इस्तेमाल करना यूक्रेन युद्ध के जवाब में एक वैध कदम है।
दूसरी ओर रूस इसे अपनी संप्रभु संपत्ति की अवैध जब्ती बताता है और कई कानूनी चुनौतियां शुरू कर चुका है।
इस स्थिति में एक तरह का कानूनी गतिरोध बन गया है:
भले ही मॉस्को अदालत का फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करना कठिन हो, लेकिन यह दिखाता है कि जमी हुई रूसी संपत्तियों को लेकर संघर्ष अब सिर्फ आर्थिक प्रतिबंधों का मुद्दा नहीं रहा—यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय कानून और भू-राजनीति का बड़ा विवाद बन चुका है।
Studio Global AI
Use this topic as a starting point for a fresh source-backed answer, then compare citations before you share it.
मॉस्को की आर्बिट्रेशन कोर्ट ने यूरोक्लियर को रूस के केंद्रीय बैंक को 18.17 ट्रिलियन रूबल (लगभग 249 अरब डॉलर) का मुआवजा देने का आदेश दिया।
मॉस्को की आर्बिट्रेशन कोर्ट ने यूरोक्लियर को रूस के केंद्रीय बैंक को 18.17 ट्रिलियन रूबल (लगभग 249 अरब डॉलर) का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह मामला EU द्वारा यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की लगभग €210 अरब की संपत्तियां फ्रीज़ करने और उनसे मिलने वाले मुनाफे को यूक्रेन के समर्थन में इस्तेमाल करने की योजना से जुड़ा है।
यूरोक्लियर ने फैसले को खारिज करते हुए कहा है कि अदालत का अधिकार क्षेत्र मान्य नहीं है और वह इसके खिलाफ अपील करेगा।