ये सभी अलग‑अलग गणितीय दृष्टिकोणों पर आधारित हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार इन्हें मोटे तौर पर निम्न क्रिप्टोग्राफिक परिवारों में वर्गीकृत किया जाता है:
NIST जानबूझकर अलग‑अलग गणितीय आधार वाले एल्गोरिदम का परीक्षण करता है। कारण यह है कि अगर भविष्य में किसी एक तकनीक में कमजोरी मिलती है, तो पूरी पोस्ट‑क्वांटम सुरक्षा व्यवस्था खतरे में न पड़े।
इस कार्यक्रम के दूसरे चरण में कुल 14 एल्गोरिदम शामिल थे।
तीसरे राउंड में आगे नहीं बढ़ पाए पांच उम्मीदवार हैं:
उपलब्ध स्रोत पुष्टि करते हैं कि ये एल्गोरिदम पहले चरणों में शामिल थे, लेकिन NIST ने इन्हें हटाने के विस्तृत तकनीकी कारण सार्वजनिक रूप से इन स्रोतों में नहीं बताए हैं—जैसे संभावित सुरक्षा सीमाएँ, प्रदर्शन संबंधी चुनौतियाँ या कार्यान्वयन की जटिलता। इसलिए सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं।
NIST के अनुसार, अब बचे हुए नौ उम्मीदवारों का और गहराई से विश्लेषण और परीक्षण किया जाएगा।
क्रिप्टोग्राफी के ऐसे मानकीकरण कार्यक्रमों में आमतौर पर इन पहलुओं पर विस्तृत जांच होती है:
हालांकि उपलब्ध स्रोतों में तीसरे राउंड के लिए पूर्ण समयसीमा या संभावित स्पेसिफिकेशन अपडेट के नियमों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
आज इंटरनेट की अधिकांश सुरक्षा RSA और elliptic‑curve cryptography (ECC) जैसे सार्वजनिक‑कुंजी एल्गोरिदम पर आधारित है। लेकिन सिद्धांत रूप में शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर इन प्रणालियों को तोड़ सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में पोस्ट‑क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर काम चल रहा है।
अगस्त 2024 में NIST ने PQC के पहले आधिकारिक मानक जारी किए:
इसके अलावा FALCON को भी चुना गया है, जिसे भविष्य में FIPS 206 के रूप में प्रकाशित किया जाना है।
फिर भी NIST केवल कुछ एल्गोरिदम पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसलिए Additional Digital Signatures कार्यक्रम के तहत और विकल्प तैयार किए जा रहे हैं ताकि:
संक्षेप में, तीसरे राउंड में पहुंचे ये नौ एल्गोरिदम भविष्य के संभावित पोस्ट‑क्वांटम डिजिटल सिग्नेचर मानकों की अगली पीढ़ी माने जा रहे हैं—जो सरकारों, टेक कंपनियों और महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को क्वांटम युग के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।