NUS की टीम ने जो पदार्थ बनाया वह इस धारणा को चुनौती देता है।
उनका पदार्थ SmNiO₂ (समेरियम‑निकेल‑ऑक्साइड) है—जिसमें कॉपर की जगह निकेल मौजूद है। प्रयोगों से पता चला कि इसमें लगभग 40 K पर सुपरकंडक्टिविटी दिखाई देती है।
इस खोज की कुछ खास बातें:
कंडेंस्ड‑मैटर फिजिक्स में Nature जैसी शीर्ष पत्रिका में प्रकाशित होना बड़ी उपलब्धि माना जाता है—खासकर करियर के शुरुआती चरण में।
चाउ उस शोधपत्र के सह‑लेखक थे जिसमें hole‑doped SmNiO₂ में लगभग 40 K पर सुपरकंडक्टिविटी का वर्णन किया गया था, और उस समय वे NUS के भौतिकी विभाग से जुड़े थे।
इस शोध ने उन्हें 2025 में सुपरकंडक्टिविटी के क्षेत्र में चर्चा के केंद्र में ला दिया।
इस वैज्ञानिक उपलब्धि के बाद चाउ ने झेजियांग यूनिवर्सिटी (Zhejiang University) जॉइन की—जो चीन की प्रमुख शोध संस्थाओं में गिनी जाती है। वहाँ वे शोध कार्यक्रमों और डॉक्टोरल छात्रों के मार्गदर्शन से जुड़े बताए जाते हैं।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब चीन के कई शीर्ष विश्वविद्यालय सक्रिय रूप से वैश्विक वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आकर्षित करने में निवेश कर रहे हैं।
इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
बड़े शोध अनुदान, आधुनिक प्रयोगशालाएँ और प्रतिभा‑भर्ती कार्यक्रमों ने चीन के विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बना दिया है।
चाउ का करियर कदम तीन बड़े रुझानों को उजागर करता है।
1. सुपरकंडक्टिविटी अनुसंधान की नई दिशा
SmNiO₂ की खोज से संकेत मिलता है कि उच्च तापमान सुपरकंडक्टिविटी केवल कॉपर‑ऑक्साइड तक सीमित नहीं हो सकती। इससे नए पदार्थों की खोज के लिए वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ा क्षेत्र खुलता है।
2. ब्रेकथ्रू वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा
जिन शोधकर्ताओं का नाम बड़े वैज्ञानिक परिणामों से जुड़ता है, उन्हें विश्व‑भर के विश्वविद्यालय आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।
3. एशिया का उभरता वैज्ञानिक केंद्र
सिंगापुर और चीन जैसे देशों ने उन्नत सामग्री विज्ञान और भौतिकी में बड़े निवेश किए हैं, जिससे यह क्षेत्र तेजी से वैश्विक अनुसंधान केंद्र बन रहा है।
स्टीफन लिन एर चाउ का करियर दिखाता है कि एक बड़ा वैज्ञानिक परिणाम किसी शोधकर्ता की अंतरराष्ट्रीय पहचान को कितनी जल्दी बदल सकता है।
उनका काम—लगभग 40 K पर काम करने वाला कॉपर‑फ्री सुपरकंडक्टर—अब भी कई नए सवाल खड़े करता है: क्या निकेल‑ऑक्साइड परिवार में और भी अधिक तापमान पर सुपरकंडक्टिविटी मिल सकती है?
इसका जवाब भविष्य के शोध में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस खोज ने न केवल सुपरकंडक्टिविटी रिसर्च की दिशा को प्रभावित किया है, बल्कि उन वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी उजागर किया है जो ऐसी खोजों के पीछे होते हैं।
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