पारंपरिक पेट्रोल जहाजों के विपरीत, इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनका प्रणोदन ईंधन के बजाय समुद्री लहरों जैसी नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित है।
इस तकनीक में एक इंजीनियरिंग तरीका इस्तेमाल किया जाता है जिसे ऑस्सिलेटिंग हाइड्रोफॉइल आधारित वेव‑ड्रिवन प्रणोदन कहा जाता है।
आमतौर पर इसमें दो मुख्य हिस्से होते हैं:
जब समुद्री लहरें सतह पर तैर रहे हिस्से को ऊपर‑नीचे करती हैं, तो नीचे लगे हाइड्रोफॉइल को भी ऊपर‑नीचे की सापेक्ष गति मिलती है। इससे हाइड्रोफॉइल पानी में फड़फड़ाने या दोलन करने लगते हैं, जिससे हाइड्रोडायनामिक लिफ्ट बल पैदा होता है और नाव आगे बढ़ती है।
इस तरह यह प्रणाली समुद्री लहरों की गतिज ऊर्जा को सीधे आगे बढ़ने की शक्ति में बदल देती है, इसलिए मूल गति के लिए पारंपरिक इंजन की आवश्यकता नहीं रहती। अध्ययन बताते हैं कि फ्लैपिंग हाइड्रोफॉइल और पानी के बीच की फ्लुइड‑स्ट्रक्चर इंटरैक्शन से यह थ्रस्ट उत्पन्न होता है।
कई डिज़ाइनों में नाव के नीचे कई जुड़े हुए हाइड्रोफॉइल लगे होते हैं। जैसे‑जैसे लहरें गुजरती हैं, ये लगातार पिच और हीव मूवमेंट करते हैं और नाव को निरंतर आगे बढ़ाते रहते हैं।
हालाँकि नाव की गति लहरों से मिलती है, लेकिन बाकी सिस्टम अलग स्रोतों से चलते हैं, जैसे:
इस मिश्रित ऊर्जा व्यवस्था से नाव बहुत कम ऊर्जा खर्च में लंबे समय तक काम कर सकती है।
AI खुद नाव को चलाने की शक्ति नहीं देता, लेकिन इसे स्वायत्त रूप से काम करने में सक्षम बनाता है।
AI सॉफ्टवेयर इन कार्यों में मदद कर सकता है:
यह स्वायत्तता महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी नावों का उपयोग अक्सर तट से बहुत दूर लंबे समय तक किया जाना प्रस्तावित है, जहाँ लगातार मानव नियंत्रण या संचार संभव नहीं होता।
शोधकर्ताओं के अनुसार वेव‑पावर्ड USV का सबसे बड़ा लाभ है कम लागत पर लगातार समुद्री उपस्थिति बनाए रखना।
क्योंकि नाव की गति लहरों से मिलती है और इलेक्ट्रॉनिक्स सौर ऊर्जा से चल सकते हैं, इसलिए सिद्धांततः यह कई महीनों तक बिना ईंधन भरे समुद्र में रह सकती है।
क्योंकि इन पर चालक दल नहीं होता, इसलिए दूरस्थ या संवेदनशील क्षेत्रों में काम करते समय मानव जोखिम कम हो जाता है।
लहरों से चलने वाली प्रणोदन प्रणाली बहुत कम शोर पैदा करती है और प्लेटफ़ॉर्म छोटा होता है, जिससे यह निरंतर निगरानी या पर्यावरणीय मॉनिटरिंग के लिए उपयोगी हो सकता है।
दूर‑दराज के द्वीपों, रीफ या समुद्री क्षेत्रों के आसपास लगातार गश्त बनाए रखना पारंपरिक जहाजों के लिए महंगा और जटिल हो सकता है। स्वायत्त सिस्टम तटरक्षक या नौसेना के जहाजों की निगरानी क्षमता को पूरक बना सकते हैं।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार यह तकनीक अभी मुख्य रूप से शोध प्रस्ताव और तकनीकी दिशा के रूप में सामने आई है, न कि बड़े पैमाने पर तैनात किसी वास्तविक बेड़े के रूप में।
हालाँकि चीन और कई अन्य देश समुद्री ड्रोन और स्वायत्त नौकाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं, लेकिन इन विशेष AI‑सहायित वेव‑पावर्ड गश्ती नौकाओं के बड़े पैमाने पर संचालन के स्पष्ट प्रमाण फिलहाल सीमित हैं।
फिर भी यह अवधारणा एक व्यापक तकनीकी रुझान को दिखाती है—जहाँ नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, स्वायत्त रोबोटिक्स और AI नेविगेशन को मिलाकर ऐसे प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं जो समुद्र में लंबे समय तक लगातार निगरानी कर सकें।
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