यू.के. AI Security Institute के अनुसार Anthropic का Claude Mythos Preview एक पूर्ण कॉर्पोरेट नेटवर्क साइबरअटैक सिमुलेशन अपने‑आप पूरा करने वाला पहला AI मॉडल बना—ऐसा काम जिसे एक कुशल मानव विशेषज्ञ को लगभग 20 घंटे लगते। यह मॉडल रिकॉनिसेंस, कमजोरियों की पहचान और एक्सप्लॉइटेशन जैसे कई चरणों को जोड़कर पूरा अटैक वर्कफ़्लो...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has Anthropic’s newer Mythos AI improved in autonomous cyberattack simulations according to the U.K. AI Security Institute, what does th. Article summary: Anthropic’s Claude Mythos Preview appears to have crossed an important threshold: the U.K. AI Security Institute said it was a “step up” over prior frontier models and the first model it tested that completed an end-to-e. Topic tags: general, government, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Claude Mythos Preview completes full cyberattack simulation for the first time. Featued image for: Claude Mythos Preview completes full cyberattack simulation for the first time." source context "Claude Mythos Preview completes full cyberattack simulation for the ..." Reference image 2: visual subje
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन हालिया परीक्षणों ने एक नई चिंता भी पैदा कर दी है: कुछ AI सिस्टम अब पूरे साइबर हमले की प्रक्रिया खुद संचालित करने के करीब पहुँच रहे हैं।
यू.के. के AI Security Institute (AISI) द्वारा किए गए परीक्षणों में पाया गया कि Anthropic का Claude Mythos Preview साइबर क्षमताओं में पिछले अग्रणी मॉडलों से एक कदम आगे है। नियंत्रित वातावरण में इस मॉडल ने एक कॉर्पोरेट नेटवर्क पर पूरा साइबरअटैक सिमुलेशन शुरू से अंत तक पूरा कर लिया—ऐसा काम जो आम तौर पर किसी कुशल मानव विशेषज्ञ को लगभग 20 घंटे लग सकते हैं।
यह उपलब्धि केवल एक मॉडल की बात नहीं है; यह इस बात का संकेत है कि AI अब उन जटिल साइबर प्रक्रियाओं को भी स्वचालित करना शुरू कर रहा है जिन्हें पहले विशेषज्ञ मानव हैकर ही कर सकते थे।
AISI के मूल्यांकन के अनुसार Mythos Preview ने कई साइबर सुरक्षा बेंचमार्क पर पुराने मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन किया और संस्थान द्वारा परीक्षण किए गए मॉडलों में पहला बना जिसने कॉर्पोरेट नेटवर्क अटैक सिमुलेशन को पूरी तरह पूरा किया।
इस सिमुलेशन में घुसपैठ के कई चरण शामिल होते हैं, जैसे:
परीक्षण के दौरान, जब मॉडल को नेटवर्क एक्सेस और स्पष्ट निर्देश दिए गए, तो वह इन कई चरणों को जोड़कर बहु‑स्तरीय हमले खुद संचालित करने में सक्षम रहा।
यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि AI अब केवल सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब देने या कोड लिखने तक सीमित नहीं रहा—वह पूरे अटैक प्लान को समझकर कई कदमों में उसे अंजाम देने लगा है।
ब्रिटेन सरकार ने पहले ही चेतावनी दी है कि नई पीढ़ी के AI मॉडल ऐसे काम करने लगे हैं जिनके लिए पहले दुर्लभ साइबर विशेषज्ञता की जरूरत होती थी। इनमें शामिल हैं:
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे साइबर ऑपरेशनों की गति और पैमाना दोनों बढ़ सकते हैं, क्योंकि अब हर हमले के लिए अत्यधिक कुशल मानव हैकर जरूरी नहीं होगा।
सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में असली सवाल यह नहीं रह सकता कि कुशल हैकर मौजूद हैं या नहीं—बल्कि यह कि किसके पास ऐसे AI सिस्टम तक पहुँच है जो इस काम का बड़ा हिस्सा स्वचालित कर सकते हैं।
इन्हीं कारणों से Mythos जैसे मॉडल व्यापक रूप से सार्वजनिक नहीं किए जा रहे।
Anthropic ने इस मॉडल को कंप्यूटर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में बेहद सक्षम बताया है और इसकी उपलब्धता सीमित रखी है, ताकि इसे मुख्य रूप से रक्षात्मक शोध और सॉफ्टवेयर कमजोरियों की खोज जैसे नियंत्रित उपयोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
तर्क साफ है: वही AI उपकरण जो सुरक्षा विशेषज्ञों को कमजोरियाँ जल्दी खोजने में मदद करते हैं, गलत हाथों में पड़कर हमलावरों को भी उतनी ही ताकत दे सकते हैं।
भले ही इन मॉडलों पर प्रतिबंध हों, विशेषज्ञों को चिंता है कि जैसे‑जैसे इन्हें साझेदारों, शोधकर्ताओं या विक्रेताओं के साथ साझा किया जाता है, इन्हें पूरी तरह सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एक छोटे समूह ने किसी थर्ड‑पार्टी विक्रेता के वातावरण के जरिए Mythos तक अनधिकृत पहुँच हासिल की थी। हालांकि Anthropic ने कहा कि उसे अपने स्वयं के सिस्टम से समझौता होने का कोई सबूत नहीं मिला। इस मामले की जानकारी द्वितीयक रिपोर्टिंग पर आधारित है, इसलिए पूरी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
फिर भी यह घटना एक बड़े जोखिम की ओर इशारा करती है: ऐसे शक्तिशाली साइबर‑क्षम AI मॉडल चोरी या दुरुपयोग के आकर्षक लक्ष्य बन सकते हैं।
नीतिनिर्माताओं और साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं की एक और चिंता है जिसे अक्सर "defense inequality" कहा जाता है।
जिन संगठनों के पास उन्नत AI‑आधारित सुरक्षा उपकरण होंगे, वे अपने सिस्टम को जल्दी स्कैन कर सकेंगे, कमजोरियाँ पहचान सकेंगे और पैच लागू कर सकेंगे। वहीं जिन संगठनों के पास ऐसे उपकरण नहीं होंगे, वे AI‑संचालित हमलों के सामने कमजोर पड़ सकते हैं।
इसका मतलब यह हो सकता है कि बड़े और संसाधन‑समृद्ध संस्थान AI‑समर्थित सुरक्षा से लाभ उठाएँ, जबकि छोटे संगठन तेज़ और अधिक स्वचालित साइबर खतरों का सामना करें।
AISI के परिणाम यह नहीं कहते कि AI अभी वास्तविक दुनिया के सुरक्षित नेटवर्क को बिना सीमाओं के हैक कर सकता है। परीक्षण एक नियंत्रित वातावरण में किया गया था और इसमें सक्रिय रक्षात्मक सिस्टम शामिल नहीं थे।
लेकिन यह स्पष्ट संकेत जरूर देता है कि अग्रणी AI मॉडल अब यथार्थवादी परिस्थितियों में जटिल साइबर ऑपरेशन को स्वायत्त रूप से संचालित करने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।
सरकारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अब चुनौती केवल बेहतर AI बनाने की नहीं है—बल्कि यह भी है कि इन शक्तिशाली प्रणालियों तक किसे पहुँच मिलती है और उनका उपयोग रक्षा के लिए कितनी तेजी से किया जाता है।
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यू.के. AI Security Institute के अनुसार Anthropic का Claude Mythos Preview एक पूर्ण कॉर्पोरेट नेटवर्क साइबरअटैक सिमुलेशन अपने‑आप पूरा करने वाला पहला AI मॉडल बना—ऐसा काम जिसे एक कुशल मानव विशेषज्ञ को लगभग 20 घंटे लगते।
यू.के. AI Security Institute के अनुसार Anthropic का Claude Mythos Preview एक पूर्ण कॉर्पोरेट नेटवर्क साइबरअटैक सिमुलेशन अपने‑आप पूरा करने वाला पहला AI मॉडल बना—ऐसा काम जिसे एक कुशल मानव विशेषज्ञ को लगभग 20 घंटे लगते। यह मॉडल रिकॉनिसेंस, कमजोरियों की पहचान और एक्सप्लॉइटेशन जैसे कई चरणों को जोड़कर पूरा अटैक वर्कफ़्लो चला सकता है, जिससे स्पष्ट होता है कि AI की साइबर क्षमताएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों को चिंता है कि ऐसे शक्तिशाली मॉडल अगर नियंत्रित वातावरण से बाहर पहुँच गए या सीमित संस्थानों तक ही रहे तो सुरक्षा असमानता और दुरुपयोग का जोखिम बढ़ सकता है।