वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 के मध्य तक एल नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है, जो वैश्विक स्तर पर हीटवेव, सूखा, बाढ़ और जंगल की आग के जोखिम को बढ़ा सकता है, हालांकि अभी “सुपर एल नीनो” की पुष्टि नहीं हुई है। एल नीनो समुद्र के तापमान में प्राकृतिक उतार‑चढ़ाव है, लेकिन आज की ज्यादा गर्म जलवायु में वही घटना पहले की तुलना में...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What are scientists warning about a possible super El Niño in 2026, how could it intensify wildfires, heatwaves, floods, and drought worldwi. Article summary: Scientists are warning that a developing El Niño in 2026 could amplify global extremes, but the best official forecasts do not yet prove a “super El Niño.” NOAA and WMO point to rising El Niño odds from mid-2026, while r. Topic tags: general, government, general web, user generated, education. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "**TEMPO.CO, Jakarta** - The world could see a "particularly severe year" of wildfires fueled by climate change and a potentially strong El Nino weather phenomenon after a record-br" source context "El Nino Could Trigger Extreme Fires Worldwide in 2026" Reference image 2: visual subject "**T
दुनिया भर के जलवायु वैज्ञानिक प्रशांत महासागर में हो रहे बदलावों पर नज़र रख रहे हैं क्योंकि संकेत मिल रहे हैं कि 2026 में एल नीनो दोबारा विकसित हो सकता है। एल नीनो अपने‑आप में एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, लेकिन वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि आज की गर्म होती पृथ्वी में इसके प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा तीव्र हो सकते हैं।
यदि यह घटना बनती है तो यह अस्थायी रूप से वैश्विक तापमान को और ऊपर धकेल सकती है और दुनिया भर में बारिश और तूफानों के पैटर्न बदल सकती है—जिससे कुछ जगहों पर हीटवेव और सूखा बढ़ सकता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं का ज़ोर है कि मूल समस्या एल नीनो नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन है जो इन प्रभावों को और अधिक शक्तिशाली बना रहा है।
अमेरिकी मौसम और महासागर एजेंसी NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) के अनुसार फिलहाल प्रशांत महासागर में ENSO‑न्यूट्रल स्थिति है। लेकिन वर्ष के आगे बढ़ने के साथ एल नीनो की संभावना बढ़ रही है।
NOAA के अनुमान के मुताबिक मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो विकसित होने की लगभग 61% संभावना है, और अगर यह शुरू होता है तो साल के अंत तक जारी रह सकता है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ा विश्व मौसम संगठन (WMO) भी कहता है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो मध्य‑2026 से एल नीनो की वापसी का संकेत दे सकता है और इससे वैश्विक तापमान तथा वर्षा पैटर्न प्रभावित हो सकते हैं।
हालाँकि अभी तक आधिकारिक एजेंसियाँ “सुपर एल नीनो” की पुष्टि नहीं कर रही हैं। यह शब्द बहुत शक्तिशाली घटनाओं के लिए इस्तेमाल होता है, और फिलहाल वैज्ञानिक सिर्फ संभावना बढ़ने की बात कर रहे हैं, इसकी ताकत के बारे में निश्चित नहीं हैं।
एल नीनो तब होता है जब मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण बदल जाता है और दुनिया के कई हिस्सों में बारिश, तूफान और तापमान के पैटर्न बदल जाते हैं।
इस बदलाव से कई तरह की चरम मौसम घटनाएँ तेज हो सकती हैं:
• हीटवेव: एल नीनो आमतौर पर वैश्विक औसत तापमान को थोड़ा बढ़ा देता है। पहले से गर्म होती जलवायु में यह अतिरिक्त गर्मी हीटवेव को और तीव्र बना सकती है।
• जंगल की आग: अधिक तापमान और बारिश में बदलाव से वनस्पति सूख सकती है, जिससे कई क्षेत्रों में आग का मौसम लंबा और ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
• बाढ़: कुछ क्षेत्रों में बारिश कम होती है जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी वर्षा हो सकती है क्योंकि तूफानों और बादलों के रास्ते बदल जाते हैं।
• सूखा: वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव कुछ क्षेत्रों में वर्षा घटा सकता है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
इसलिए एल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता। यह पूरे ग्रह पर गर्मी, बारिश और सूखे का वितरण बदल देता है।
वैज्ञानिक लगातार इस बात पर जोर देते हैं कि एल नीनो कोई नई घटना नहीं है—यह हजारों सालों से मौजूद प्राकृतिक चक्र है। समस्या यह है कि पृथ्वी का मूल जलवायु तंत्र अब पहले से ज्यादा गर्म हो चुका है।
मानव गतिविधियों से पैदा हुए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ने वैश्विक तापमान बढ़ाया है और वायुमंडल में नमी धारण करने की क्षमता भी बढ़ा दी है। इसी कारण आज का एल नीनो पहले की तुलना में अधिक तीव्र हीटवेव, भारी वर्षा और गहरे सूखे पैदा कर सकता है।
इसी बदलती पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए NOAA ने हाल ही में एक नया मापदंड पेश किया है जिसे Relative Oceanic Niño Index (RONI) कहा जाता है। यह समुद्र के दीर्घकालिक गर्म होने के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एल नीनो की ताकत का बेहतर आकलन करने में मदद करता है।
मौसम की घटनाएँ तब बड़ी आपदाओं में बदलती हैं जब वे कमजोर समुदायों से टकराती हैं। आज कई संरचनात्मक कारण इस जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
एक प्रमुख कारण है जलवायु जोखिम से जुड़ा बढ़ता आर्थिक दबाव। चरम मौसम घटनाएँ घरों को नुकसान पहुँचा रही हैं और कई क्षेत्रों में घर का बीमा महंगा या मुश्किल होता जा रहा है। इससे परिवारों के लिए आपदाओं के बाद आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
शोध यह भी दिखाता है कि जलवायु‑जनित नुकसान आवास की कीमतों और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब बीमा पर्याप्त न हो या पुनर्निर्माण बहुत महंगा हो।
इसके अलावा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों में संसाधन या विशेषज्ञता कम हो जाए तो समुदायों की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है।
संकेत बताते हैं कि 2026 में एल नीनो लौट सकता है, और यदि ऐसा होता है तो यह दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाओं को अस्थायी रूप से तेज कर सकता है।
लेकिन वैज्ञानिक एक बड़ी बात स्पष्ट करते हैं: सबसे बड़ा खतरा एल नीनो नहीं है। असली कारण वह गर्म होती जलवायु है जिसने प्राकृतिक मौसम चक्रों को पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली बना दिया है।
इस नए जलवायु परिदृश्य में, एक सामान्य या मध्यम एल नीनो भी अतीत की तुलना में कहीं अधिक तीव्र हीटवेव, अस्थिर वर्षा और व्यापक जंगल‑आग के जोखिम पैदा कर सकता है—यानी एक प्राकृतिक घटना अब वैश्विक स्तर पर बड़ी परीक्षा बन सकती है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 के मध्य तक एल नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है, जो वैश्विक स्तर पर हीटवेव, सूखा, बाढ़ और जंगल की आग के जोखिम को बढ़ा सकता है, हालांकि अभी “सुपर एल नीनो” की पुष्टि नहीं हुई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 के मध्य तक एल नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है, जो वैश्विक स्तर पर हीटवेव, सूखा, बाढ़ और जंगल की आग के जोखिम को बढ़ा सकता है, हालांकि अभी “सुपर एल नीनो” की पुष्टि नहीं हुई है। एल नीनो समुद्र के तापमान में प्राकृतिक उतार‑चढ़ाव है, लेकिन आज की ज्यादा गर्म जलवायु में वही घटना पहले की तुलना में अधिक खतरनाक मौसम चरम पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जीवन‑यापन लागत, महंगा बीमा और कमजोर होती आपदा‑तैयारी प्रणालियाँ वास्तविक दुनिया में इन मौसम घटनाओं के असर को और गंभीर बना सकती हैं।