Android को दूसरे AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने की EU योजना पर Apple की आपत्ति
EU का Digital Markets Act Google को Android के सिस्टम‑लेवल फीचर्स प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने के लिए मजबूर कर सकता है ताकि मोबाइल AI सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़े। Apple और Google दोनों का तर्क है कि इतने गहरे सिस्टम एक्सेस से यूज़र डेटा की गोपनीयता, डिवाइस सुरक्षा और प्लेटफॉर्म नियंत्रण कमजोर पड़ सकते...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.5 से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
EU का Digital Markets Act Google को Android के सिस्टम‑लेवल फीचर्स प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने के लिए मजबूर कर सकता है ताकि मोबाइल AI सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़े।
Apple और Google दोनों का तर्क है कि इतने गहरे सिस्टम एक्सेस से यूज़र डेटा की गोपनीयता, डिवाइस सुरक्षा और प्लेटफॉर्म नियंत्रण कमजोर पड़ सकते हैं।
यह विवाद तय कर सकता है कि भविष्य के AI असिस्टेंट्स बंद इकोसिस्टम में काम करेंगे या मोबाइल प्लेटफॉर्म पर खुले, इंटरऑपरेबल सिस्टम के रूप में।
What is Apple’s objection to the EU’s proposed Digital Markets Act measures requiring Google to open core Android features to rival AI assisEU regulators want Android to give rival AI assistants the same system-level access as Google’s own services, a proposal Apple and Google both warn could raise privacy and security risks.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is Apple’s objection to the EU’s proposed Digital Markets Act measures requiring Google to open core Android features to rival AI assis. Article summary: Apple’s objection is that the EU’s draft DMA interoperability measures for Android go too far: forcing Google to help rival AI services access Android-related services could expose sensitive user data, weaken platform se. Topic tags: general, general web, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Apple slams EU’s push to force Google to share Android access with AI rivals, citing privacy and security risks. In a significant development in the ongoing battle over Big Tech" source context "Apple slams EU’s push to force Google to share Android access with AI rivals, citing privacy and security risks" Referenc
openai.com
यूरोपीय संघ (EU) एक ऐसा नियम लागू करने पर विचार कर रहा है जो Google को Android के कुछ महत्वपूर्ण फीचर्स प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने के लिए बाध्य कर सकता है। यह प्रस्ताव Digital Markets Act (DMA) का हिस्सा है—एक बड़ा नियामकीय ढांचा जिसका उद्देश्य बड़ी टेक कंपनियों के प्रभाव को सीमित करना और डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर Apple ने Google का समर्थन किया है। Apple का कहना है कि अगर कई बाहरी AI सिस्टम्स को Android के अंदर गहरा सिस्टम‑लेवल एक्सेस दिया गया, तो इससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता, सुरक्षा और डिवाइस सेफ्टी पर गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। कंपनी के अनुसार नियामक इन जोखिमों को कम करके आंक रहे हैं।
EU Google से क्या चाहता है
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"Android को दूसरे AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने की EU योजना पर Apple की आपत्ति" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
EU का Digital Markets Act Google को Android के सिस्टम‑लेवल फीचर्स प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने के लिए मजबूर कर सकता है ताकि मोबाइल AI सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़े।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
EU का Digital Markets Act Google को Android के सिस्टम‑लेवल फीचर्स प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स के लिए खोलने के लिए मजबूर कर सकता है ताकि मोबाइल AI सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़े। Apple और Google दोनों का तर्क है कि इतने गहरे सिस्टम एक्सेस से यूज़र डेटा की गोपनीयता, डिवाइस सुरक्षा और प्लेटफॉर्म नियंत्रण कमजोर पड़ सकते हैं।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
यह विवाद तय कर सकता है कि भविष्य के AI असिस्टेंट्स बंद इकोसिस्टम में काम करेंगे या मोबाइल प्लेटफॉर्म पर खुले, इंटरऑपरेबल सिस्टम के रूप में।
DMA के तहत यूरोपीय आयोग बड़ी टेक कंपनियों—जिन्हें “गेटकीपर” कहा जाता है—को अपने प्लेटफॉर्म को प्रतिस्पर्धियों के लिए अधिक इंटरऑपरेबल बनाने के लिए मजबूर कर सकता है। जनवरी 2026 में आयोग ने एक प्रक्रिया शुरू की ताकि यह तय किया जा सके कि Android को इन नियमों का पालन किस तरह करना होगा।
ड्राफ्ट प्रस्तावों के अनुसार Google को यह सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि Android और तीसरे पक्ष की AI सेवाओं के बीच “प्रभावी एक्सेस और इंटरऑपरेबिलिटी” हो।
इसका मतलब यह हो सकता है कि अन्य कंपनियों के AI असिस्टेंट भी Android डिवाइसों में लगभग उसी तरह काम कर सकें जैसे Google के अपने AI सिस्टम। उदाहरण के लिए:
वॉइस एक्टिवेशन या “wake‑word” फीचर
सिस्टम सर्च और डिवाइस फंक्शन्स के साथ इंटीग्रेशन
ऐप्स के साथ मिलकर काम करना—जैसे ई‑मेल भेजना, फोटो शेयर करना या खाना ऑर्डर करना
EU नियामकों का तर्क है कि अगर ऐसा एक्सेस नहीं दिया गया तो ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियां अपने ही AI असिस्टेंट्स को अधिक शक्तिशाली बनाकर प्रतिस्पर्धा को सीमित कर सकती हैं।
Apple की मुख्य चिंता: प्राइवेसी और सुरक्षा
Apple ने EU को दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कई अलग‑अलग AI सिस्टम्स को गहरा सिस्टम एक्सेस देना जोखिम भरा हो सकता है। AI असिस्टेंट अक्सर उपयोगकर्ता के बहुत निजी डेटा—जैसे संदेश, संपर्क, ऐप गतिविधि और वॉइस इनपुट—को प्रोसेस करते हैं।
Apple के अनुसार अगर कई बाहरी AI सेवाओं को Android की सेवाओं तक व्यापक पहुंच दी गई तो इससे:
संवेदनशील यूज़र डेटा के उजागर होने का खतरा बढ़ सकता है
डिवाइस पर केंद्रीकृत सुरक्षा नियंत्रण कमजोर पड़ सकते हैं
साइबर हमलों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं
कंपनी का कहना है कि ऑपरेटिंग सिस्टम को सिस्टम‑लेवल एक्सेस पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए ताकि उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Google की आपत्ति क्यों है
Google की चिंताएं भी आंशिक रूप से सुरक्षा से जुड़ी हैं, लेकिन इसमें प्रतिस्पर्धा का पहलू भी शामिल है।
अगर EU के प्रस्ताव लागू होते हैं तो Google को अपने Android प्लेटफॉर्म के कई फीचर्स प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स के लिए भी उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं—वही फीचर्स जो अभी Google के अपने AI सिस्टम को फायदा देते हैं।
इससे Android एक तरह का तटस्थ प्लेटफॉर्म बन सकता है जहां अलग‑अलग कंपनियों के AI असिस्टेंट समान स्तर पर काम कर सकें। Google के लिए इसका मतलब होगा कि वह इन चीज़ों पर कम नियंत्रण रख पाएगा:
सिस्टम‑लेवल असिस्टेंट फीचर्स
ऐप्स और AI सेवाओं के बीच इंटरेक्शन
Android और AI प्रदाताओं के बीच डेटा फ्लो
तकनीकी चुनौती: AI असिस्टेंट साधारण ऐप नहीं होते
सामान्य मोबाइल ऐप्स के विपरीत AI असिस्टेंट्स को कई सिस्टम क्षमताओं तक गहरी पहुंच चाहिए होती है। उदाहरण के लिए:
स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट तक एक्सेस
वॉइस इनपुट और ऑडियो प्रोसेसिंग
मैसेजिंग और कम्युनिकेशन ऐप्स
डिवाइस ऑटोमेशन और सिस्टम कंट्रोल
जब कई अलग‑अलग कंपनियों के AI असिस्टेंट्स को ऐसा एक्सेस देना पड़े, तो परमिशन, डेटा सुरक्षा और निगरानी से जुड़े जटिल तकनीकी सवाल सामने आते हैं। नियामकों को तय करना होगा कि प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हुए उपयोगकर्ता डेटा को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
नियामक संतुलन: प्रतिस्पर्धा बनाम सुरक्षा
इस विवाद के केंद्र में टेक नीति का एक पुराना सवाल है।
Digital Markets Act का लक्ष्य बड़े प्लेटफॉर्म्स की शक्ति को सीमित करना और नए प्रतिस्पर्धियों के लिए रास्ता खोलना है। लेकिन प्लेटफॉर्म कंपनियां कहती हैं कि जब सिस्टम को जबरन अधिक खुला बनाया जाता है तो इससे सुरक्षा और गोपनीयता की जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो सकता है।
EU के सामने चुनौती यह है कि वह ऐसे नियम बनाए जो:
AI सेवाओं के बीच वास्तविक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करें
मजबूत सुरक्षा और प्राइवेसी सुरक्षा बनाए रखें
मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को असुरक्षित साझा इंफ्रास्ट्रक्चर में न बदल दें
Android उपयोगकर्ताओं के लिए इसका क्या मतलब
अगर EU की योजना लागू होती है तो Android उपयोगकर्ताओं को AI असिस्टेंट्स के मामले में ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं।
भविष्य में संभव है कि लोग केवल Google के असिस्टेंट पर निर्भर रहने के बजाय अन्य कंपनियों के AI असिस्टेंट भी उसी स्तर के सिस्टम इंटीग्रेशन के साथ इस्तेमाल कर सकें।
लेकिन इसके साथ कुछ संभावित चुनौतियां भी हो सकती हैं:
अधिक जटिल परमिशन सेटिंग्स
कई AI सेवाओं के साथ व्यक्तिगत डेटा साझा होना
अलग‑अलग असिस्टेंट्स में सुरक्षा मानकों का अंतर
क्यों यह विवाद AI के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है
यह मामला सिर्फ Android नीति का सवाल नहीं है। यह इस बात से भी जुड़ा है कि भविष्य में AI असिस्टेंट खुद एक नया प्लेटफॉर्म लेयर बन सकते हैं—ऐसा इंटरफेस जिसके माध्यम से लोग ऐप्स, डिवाइस और ऑनलाइन सेवाओं से बातचीत करेंगे।
अगर EU का मॉडल लागू होता है तो यह लेयर अधिक खुला और इंटरऑपरेबल हो सकता है। लेकिन Apple और Google का तर्क है कि अत्यधिक खुलापन प्लेटफॉर्म की बुनियादी सुरक्षा को कमजोर कर सकता है।
अंतिम निर्णय यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा कि आने वाली पीढ़ी के AI असिस्टेंट्स खुले प्रतिस्पर्धी सिस्टम होंगे या फिर ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों के साथ गहराई से जुड़े, नियंत्रित प्लेटफॉर्म फीचर्स के रूप में विकसित होंगे।