ब्रेंट क्रूड 2.9% चढ़कर $104.21 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान सीजफायर “life support” पर है . दूसरी रिपोर्टों में भी ब्रेंट के $100 प्रति बैरल से ऊपर बने रहने का जिक्र है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति की चिंता कम नहीं हुई है
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तेल की कीमतें इसलिए इतनी अहम हैं क्योंकि महंगा कच्चा तेल सिर्फ ऊर्जा कंपनियों का मुद्दा नहीं रहता। यह परिवहन, उत्पादन लागत, महंगाई की उम्मीदों और केंद्रीय बैंकों की ब्याज-दर सोच तक असर डाल सकता है। बाजार पहले से अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं, इसलिए तेल की नई तेजी निवेशकों को और सतर्क बना रही है .
इस पूरे संकट में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz केंद्रीय जोखिम है। यह खाड़ी क्षेत्र से समुद्री ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। जब भी इस मार्ग पर शिपमेंट बाधित होने की आशंका बढ़ती है, बाजार तुरंत तेल की कीमतों में जोखिम-प्रीमियम जोड़ने लगते हैं।
पहले शांति की उम्मीदों से शेयरों को सहारा मिला और तेल नीचे आया था, लेकिन ईरानी बंदरगाहों और हॉर्मुज़ के रास्ते शिपमेंट में व्यवधान की खबरों ने तनाव फिर बढ़ा दिया . इसी वजह से निवेशकों की निगाह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी पर नहीं, बल्कि जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति के वास्तविक संकेतों पर भी है।
करेंसी बाजार में डॉलर की मजबूती साफ संकेत दे रही है कि निवेशक सुरक्षित मानी जाने वाली परिसंपत्तियों की तरफ झुक रहे हैं . एशियाई बाजारों के लिए यह दोहरा दबाव है: एक तरफ तेल महंगा है, दूसरी तरफ डॉलर मजबूत है। ऐसी स्थिति में एशियाई शेयरों और मुद्राओं पर जोखिम-सentiment का असर जल्दी दिखता है।
एशियाई शेयरों में भी यही बेचैनी दिखी—कुछ बाजार टिके रहे, कुछ फिसले, और कुल मिलाकर निवेशकों के पास मजबूत खरीदारी का भरोसा कम रहा .
भू-राजनीतिक झटका अकेला जोखिम नहीं है। अमेरिकी बैंकों के नतीजे भी बाजार की नजर में हैं; रिपोर्टों के अनुसार बड़े बैंक earnings बाजार का अहम फोकस बनने वाले हैं .
यहां सावधानी जरूरी है: उपलब्ध स्रोत यह नहीं कहते कि बैंक नतीजे व्यापक रूप से कमजोर आ चुके हैं। लेकिन अगर earnings कमजोर रहती हैं, तो शेयर बाजार के लिए झटका संभालना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि तब भू-राजनीतिक जोखिम के साथ क्रेडिट, ट्रेडिंग या लोन-ग्रोथ को लेकर भी सवाल जुड़ जाएंगे।
एयरलाइन सेक्टर पर नजर रखने की वजह समझ में आती है। महंगा ईंधन और संभावित रूट व्यवधान एयरलाइंस की लागत और यात्रा भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन उपलब्ध स्रोतों में मौजूदा एयरलाइन व्यवधान का पैमाना साफ तौर पर मापा नहीं गया है। इसलिए अभी इसे संभावित जोखिम कहना उचित है, पक्के बाजार-व्यापी झटके की तरह पेश करना नहीं।
ट्रंप की चीन यात्रा अब बाजारों के लिए अहम कूटनीतिक घटना बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने से इस यात्रा के दांव बढ़ गए हैं, क्योंकि ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ईरान पर दबाव डालने की बात उठा सकते हैं .
अगर चीन से कोई ऐसा संकेत मिलता है जिससे वार्ता फिर पटरी पर आती दिखे, तो तेल में जोखिम-प्रीमियम घट सकता है और शेयरों को राहत मिल सकती है। लेकिन फिलहाल यह संभावना है, गारंटी नहीं। बाजार इसलिए हर कूटनीतिक बयान को तेजी से पढ़ रहे हैं, पर उसे स्थायी समाधान मानने से बच रहे हैं।
आने वाले दिनों में बाजार खास तौर पर पांच चीजों पर नजर रखेंगे:
कुल मिलाकर, बाजार अभी संकट की पूरी कीमत नहीं लगा रहे हैं। लेकिन वे यह मानकर चल रहे हैं कि अगर शांति प्रयास विफल रहे, तेल ऊंचा रहा और हॉर्मुज़ पर जोखिम बना रहा, तो महंगाई, करेंसी और शेयर—तीनों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
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