एक रिपोर्ट ने इसे तुर्किये के लिए अमेरिकी आपातकालीन तेल भंडार से भेजी जा रही पहली खेप कहा है। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक स्रोत इससे आगे की बुनियादी जानकारी नहीं देते—जैसे टैंकर का नाम, कच्चे तेल का ग्रेड, अमेरिका में लोडिंग टर्मिनल या अनुमानित पहुंच तारीख।
इसका जवाब तेल बाजार की घबराहट में छिपा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के युद्ध के बाद तेल कीमतें तेजी से बढ़ीं; इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के SPR का इस्तेमाल करने का रुख अपनाया, जो IEA सदस्य देशों की साझा आपात कार्रवाई का हिस्सा था।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency/IEA) के 32 सदस्य देशों की कार्रवाई में आपात भंडारों से कुल 400 मिलियन बैरल, यानी 40 करोड़ बैरल, तेल और रिफाइंड उत्पाद जारी करने की बात कही गई। Politico ने इसे IEA के इतिहास की सबसे बड़ी ऐसी आपात रिलीज़ बताया।
अमेरिकी हिस्से को SPR से 172 मिलियन बैरल, यानी 17.2 करोड़ बैरल तक, की रिलीज़ के रूप में वर्णित किया गया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) ने 172 मिलियन बैरल योजना की पहली किस्त के रूप में 86 मिलियन बैरल तक के आपातकालीन एक्सचेंज के लिए प्रस्ताव आमंत्रण जारी किया था।
बाद में DOE ने SPR कच्चे तेल के 10 मिलियन बैरल तक के अतिरिक्त आपातकालीन एक्सचेंज के लिए भी प्रस्ताव आमंत्रण जारी किया।
उपलब्ध सबूत यह नहीं दिखाते कि तुर्किये के लिए कोई अलग, विशेष द्विपक्षीय तेल कार्यक्रम चलाया गया है। तस्वीर इससे ज्यादा व्यापक है: यह खेप आपात भंडारों से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों के दबाव को कम करने की कोशिश वाले बड़े कार्यक्रम का हिस्सा लगती है।
एक रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी रिज़र्व तेल के शुरुआती प्राप्तकर्ताओं में तुर्किये, नीदरलैंड्स और इटली शामिल थे। इसलिए तुर्किये के लिए पहली खेप वाली बात तो स्पष्ट है, लेकिन यह उपलब्ध स्रोतों से पूरी तरह तय नहीं होता कि दुनिया में पहला विदेशी प्राप्तकर्ता कौन था या तुर्किये कई शुरुआती प्राप्तकर्ताओं में से एक था।
तुर्किये जाने वाली खेप इस बहुत बड़े ड्रॉडाउन का सिर्फ एक हिस्सा है। उपलब्ध स्रोतों में मुख्य आंकड़े ये हैं:
क्योंकि स्रोत कई किस्तों, एक्सचेंज व्यवस्थाओं और रिलीज़ कार्यक्रमों का जिक्र करते हैं, उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं होता कि तुर्किये जाने वाली खास खेप किस किस्त में आती है।
रणनीतिक तेल भंडारों से रिलीज़ आम तौर पर सप्लाई शॉक के समय बाजार को अस्थायी सहारा देने का औजार होती है, सामान्य व्यापारिक तेल प्रवाह का स्थायी विकल्प नहीं। इस मामले में भी नीति का घोषित उद्देश्य तेल कीमतों को कम करना और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण आए बाजार व्यवधान को संभालना बताया गया है।
तुर्किये के लिए यह प्रतीकात्मक रूप से अहम है, क्योंकि इसे देश के लिए अमेरिकी आपात रिज़र्व तेल की पहली खेप बताया गया है। लेकिन वैश्विक बाजार के लिए बड़ी कहानी तुर्किये की एक खेप से भी आगे जाती है: IEA देशों की सैकड़ों मिलियन बैरल की समन्वित रिलीज़ और उसमें अमेरिका की बड़ी SPR भूमिका।
कुछ अहम सवाल अभी खुले हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में टैंकर का नाम, कच्चे तेल का ग्रेड, अमेरिका का लोडिंग टर्मिनल और तुर्किये में संभावित डिलीवरी तारीख नहीं बताई गई है।
यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि तुर्किये कुल मिलाकर पहला विदेशी प्राप्तकर्ता था या नीदरलैंड्स और इटली जैसे देशों के साथ शुरुआती प्राप्तकर्ताओं में शामिल था।
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