बैटरी उद्योग की नींव लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट जैसे खनिजों और प्रोसेस्ड मटेरियल पर टिकी है। यूरोप का लक्ष्य केवल तैयार बैटरी बनाना नहीं, बल्कि खनन, रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग, स्रोतों की विविधता और रीसाइक्लिंग तक सप्लाई चेन को मजबूत करना है। यह इसलिए अहम है क्योंकि यूरोपीय आयोग के अनुसार चीन की पकड़ सिर्फ तैयार बैटरियों पर नहीं, बल्कि बैटरी सप्लाई चेन के मिडस्ट्रीम और अपस्ट्रीम हिस्सों में भी बहुत मजबूत है ।
EU जिम्मेदार सोर्सिंग के नियमों को भी औद्योगिक नीति का हिस्सा बना रहा है। Transport & Environment के बैटरी ब्लूप्रिंट के अनुसार EU Battery Regulation के सोर्सिंग नियम लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे पदार्थों पर लागू होते हैं; यानी सामग्री यूरोप में बने या बाहर से आए, उसे जिम्मेदार तरीके से सोर्स करना होगा ।
यूरोप का एक बड़ा दांव यह है कि नियम सिर्फ बोझ न रहें, बल्कि प्रतिस्पर्धी बढ़त बनें। EU का बैटरी फ्रेमवर्क टिकाऊपन, ट्रेसबिलिटी, लाइफसाइकल जरूरतों और रीसाइक्लिंग पर केंद्रित है, केवल उत्पादन संख्या पर नहीं । सोच यह है कि अगर EU बाजार में बिकने वाली हर बैटरी को सख्त पर्यावरणीय और पारदर्शिता मानकों पर खरा उतरना पड़े, तो यूरोपीय निर्माता सिर्फ कम कीमत की दौड़ में नहीं फंसेंगे; वे साफ और ट्रेस करने योग्य सप्लाई चेन के आधार पर भी मुकाबला कर सकेंगे।
यही वजह है कि बैटरी नीति अब अलग-अलग फैक्ट्रियों की सूची भर नहीं रही। नीति प्रस्तावों और उद्योग रोडमैप में वित्तीय सहायता, मांग बढ़ाने के साधन, स्थानीय वैल्यू-चेन शर्तें और बैटरी के जीवन-समाप्ति यानी end-of-life नियमों को एक साथ इस्तेमाल करने की बात बढ़ रही है ।
बैटरी रीसाइक्लिंग यूरोप के लिए सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक उपायों में से एक है। इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों से मूल्यवान सामग्री वापस मिल सकती है, जिससे भविष्य में प्राथमिक कच्चे माल के आयात पर दबाव घट सकता है। यूरोपीय संसद का शोध टिकाऊपन और सुरक्षित सप्लाई चेन को EU बैटरी नीति के केंद्रीय लक्ष्य बताता है, जबकि EU बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े नीति प्रस्ताव end-of-life और eco-design नियमों को निवेश और मांग समर्थन के साथ जोड़ते हैं ।
लेकिन रीसाइक्लिंग तुरंत चमत्कार नहीं कर सकती। आज बेची जा रही ईवी बैटरियां बड़े पैमाने पर तभी वापस आएंगी जब उनका जीवनचक्र पूरा होगा। इसलिए यूरोप रीसाइक्लिंग को कच्चे माल की नई आपूर्ति, प्रोसेसिंग और बैटरी निर्माण के साथ मिलाकर देख रहा है, उसके विकल्प के रूप में नहीं।
बैटरी उद्योग पूंजी-गहन है। बड़ी फैक्ट्रियां लगाने, उत्पादन को स्थिर करने और वैश्विक कीमतों से मुकाबला करने के लिए सिर्फ निजी निवेश काफी नहीं माना जा रहा। यूरोपीय संसद के शोध के अनुसार EU बैटरी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए फंडिंग, समन्वय और नियमों को साथ-साथ इस्तेमाल कर रहा है । यूरोपीय आयोग की Battery Booster रणनीति भी EU निर्माताओं को स्केल करने, मजबूत अपस्ट्रीम वैल्यू चेन बनाने, मूल्य-वर्धक निवेश आकर्षित करने और EU में बने उत्पादों की मांग को सहारा देने पर जोर देती है
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यही इस नीति का औद्योगिक पक्ष है: यूरोप चाहता है कि बैटरी उत्पादन सिर्फ सब्सिडी पर टिके प्रोजेक्ट न रहे, बल्कि ऑटो कंपनियों की मांग, कच्चे माल की व्यवस्था और नियमों के साथ जुड़ा हुआ कारोबारी ढांचा बने। आयोग की अपनी समीक्षा यह मानती है कि पिछली कोशिशों के बावजूद EU बड़ा नेट बैटरी आयातक बन गया । इसलिए अब रुख अधिक स्पष्ट औद्योगिक रणनीति की ओर है।
यूरोप बैटरी सप्लाई चेन बनाने के साथ-साथ व्यापार नीति का इस्तेमाल भी कर रहा है। 29 अक्टूबर 2024 को यूरोपीय आयोग ने एंटी-सब्सिडी जांच पूरी की और चीन से आयातित बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों यानी BEV पर पांच साल के लिए निश्चित काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई । यह कदम Implementing Regulation (EU) 2024/2754 के तहत अपनाया गया और 30 अक्टूबर 2024 से लागू हुआ
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ड्यूटी दरें निर्माता के हिसाब से अलग हैं। आयोग ने BYD के लिए 17.0%, Geely के लिए 18.8%, SAIC के लिए 35.3%, अन्य सहयोगी कंपनियों के लिए 20.7% और व्यक्तिगत जांच के अनुरोध के बाद Tesla के लिए 7.8% दर बताई । यह उपाय चीन से आने वाले उन नए बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू है जिन्हें मुख्य रूप से चालक सहित अधिकतम नौ लोगों को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है
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ये शुल्क यूरोप की पूरी ईवी रणनीति नहीं हैं, लेकिन वे संकेत जरूर देते हैं: हरित बदलाव होगा, मगर यूरोप नहीं चाहता कि सब्सिडी वाले आयात उसके अपने औद्योगिक आधार को कमजोर कर दें।
यूरोप की रणनीति चीन को ईवी इकोसिस्टम से पूरी तरह बाहर करने की नहीं है। Bruegel के विश्लेषकों का तर्क है कि यूरोप को चीनी पूंजी को न तो निष्क्रिय तरीके से स्वीकार करना चाहिए और न ही उसे पूरी तरह रोकना चाहिए; बल्कि चीनी ईवी और बैटरी निवेश की शर्तें ऐसी बनानी चाहिए कि वे EU के जलवायु, औद्योगिक और सुरक्षा लक्ष्यों से मेल खाएं ।
यहां चुनौती समन्वय की है। Bruegel के अनुसार चीनी निवेश को लेकर EU सदस्य देशों के रुख अभी भी बिखरे हुए और असंगत हैं, जिससे यूरोप की सामूहिक सौदेबाजी क्षमता कमजोर होती है । इसलिए अगला चरण सिर्फ ब्रसेल्स में बने नियमों का नहीं होगा; यह भी देखना होगा कि सदस्य देश निवेश जांच, प्रोत्साहन और औद्योगिक प्राथमिकताओं पर कितना एक साथ चल पाते हैं।
यूरोप की ईवी बैटरी रणनीति एक व्यापक औद्योगिक पैकेज है: बैटरी फैक्ट्रियां बनाना, खनिज सुरक्षित करना, उच्च-मूल्य उत्पादन को स्थानीय बनाना, ट्रेसबिलिटी और टिकाऊपन के नियम लागू करना, रीसाइक्लिंग बढ़ाना, मांग को समर्थन देना और सब्सिडी वाले आयात से बचाव करना।
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