लेकिन असली पेच यहीं है: सार्वजनिक रिपोर्टों में यह नहीं बताया गया कि Google रैंकिंग की सीमा बदलेगा, प्रकाशकों को कोई छूट देगा, दंड कम करेगा, समीक्षा या अपील की नई व्यवस्था बनाएगा, या प्रवर्तन का दायरा सीमित करेगा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि Google ने नीति को पूरी तरह हटाने की पेशकश की है।
Google की “site reputation abuse” नीति उस तरीके को निशाना बनाती है जिसमें कोई वेबसाइट अपने मजबूत सर्च-रैंकिंग संकेतों का फायदा उठाने के लिए तीसरे पक्ष के पेज प्रकाशित करती है। SEO की भाषा में इसे अक्सर “parasite SEO” कहा जाता है।
Google इसे एंटी-स्पैम कदम के रूप में देखता है। विवाद इसलिए पैदा हुआ क्योंकि प्रकाशकों का कहना है कि इसका असर वैध कारोबारी व्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है—जैसे पार्टनर कंटेंट, स्पॉन्सर्ड कंटेंट या ऐसे व्यावसायिक सहयोग जिनसे मीडिया कंपनियां अपनी वेबसाइटों से कमाई करती हैं। European Commission ने कहा कि उसकी निगरानी में ऐसे संकेत मिले कि जब वेबसाइटों पर व्यावसायिक साझेदारों का कंटेंट शामिल होता है, तो Google Search में समाचार मीडिया और अन्य प्रकाशकों की वेबसाइटों व कंटेंट को नीचे किया जा रहा है।
Google Search, Alphabet की उन सेवाओं में शामिल है जिन्हें EU के Digital Markets Act के तहत core platform services के रूप में नामित किया गया है। 13 नवंबर 2025 को European Commission ने औपचारिक कार्यवाही शुरू की ताकि यह जांचा जा सके कि Google Search पर प्रकाशकों की वेबसाइटों तक पहुंच के लिए Google निष्पक्ष, उचित और गैर-भेदभावपूर्ण शर्तें लागू करता है या नहीं—DMA के तहत यह एक दायित्व है।
मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि Google स्पैम से लड़ सकता है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई “gatekeeper” प्लेटफॉर्म एंटी-स्पैम नीति को इस तरह लागू कर सकता है जिससे प्रकाशकों की दृश्यता, कमाई या व्यावसायिक साझेदारों के साथ काम करने की क्षमता अनुचित रूप से सीमित हो। TechCrunch ने रिपोर्ट किया कि Commission के अनुसार यह नीति प्रकाशकों द्वारा अपनी वेबसाइटों और कंटेंट से कमाई करने के एक सामान्य और वैध तरीके को सीधे प्रभावित करती दिखती है।
अब तक सार्वजनिक जानकारी सीमित है। सबसे ठोस विवरण यह है कि Google ने European Commission को DMA संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रस्ताव भेजे, जिनमें “site reputation abuse” नियमों में ऐसे बदलाव शामिल हैं जो यह प्रभावित करते हैं कि समाचार प्रकाशक तीसरे पक्ष का कंटेंट कैसे होस्ट करते हैं।
Reuters ने अलग से रिपोर्ट किया कि Google ने प्रकाशकों द्वारा आलोचित स्पैम नीति में बदलाव की पेशकश की है, और यह रिपोर्ट European Commission के उस दस्तावेज़ पर आधारित थी जिसे Reuters ने देखा था।
कुछ कवरेज ने इस पेशकश को समाचार-सर्च रैंकिंग या सर्च में समाचार दिखाने के तरीके में बदलाव के रूप में बताया है। यह दिशा समझने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे प्रकाशकों के लिए लागू होने वाली असल भाषा, तकनीकी नियम या संचालन संबंधी निर्देश स्पष्ट नहीं होते।
कई अहम बातें अब भी अधर में हैं:
जब तक Google या European Commission ठोस उपायों की शर्तें प्रकाशित नहीं करते, इन रिपोर्टों को नई “सुरक्षित राह” मान लेना ठीक नहीं होगा। व्यावहारिक तौर पर प्रकाशकों को संपादकीय कंटेंट और व्यावसायिक पार्टनर कंटेंट के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना चाहिए, तीसरे पक्ष के कंटेंट की वजह और प्रकृति का दस्तावेजी रिकॉर्ड रखना चाहिए, और Google या Commission की औपचारिक गाइडेंस पर नजर रखनी चाहिए।
SEO टीमों के लिए मुख्य फर्क है: जो जोखिम ज्ञात है और जिस उपाय का विवरण अज्ञात है। यह ज्ञात है कि EU यह जांच रहा है कि Google की नीति का इस्तेमाल उन प्रकाशकों के कंटेंट को नीचे दिखाने में हो सकता है जिनकी साइटों पर व्यावसायिक साझेदारों का कंटेंट शामिल है। लेकिन यह अभी ज्ञात नहीं है कि Google उस लागू करने के तरीके को कैसे बदलना चाहता है।
अगर Google का प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो यह तय करने में असर डाल सकता है कि EU में Google Search पर एंटी-स्पैम प्रवर्तन और प्रकाशकों के कारोबारी मॉडल के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। The Next Web ने रिपोर्ट किया कि अगर समझौता नहीं होता, तो DMA ढांचे के तहत Alphabet पर वैश्विक राजस्व के 10% तक का जुर्माना लग सकता है।
फिलहाल सबसे संतुलित निष्कर्ष यही है: Google ने कथित तौर पर अपनी “site reputation abuse” स्पैम नीति के प्रकाशकों पर असर को लेकर रियायतें दी हैं, और यह मुद्दा तीसरे पक्ष के व्यावसायिक कंटेंट व समाचार-सर्च व्यवहार से जुड़ा दिखता है। लेकिन असली बदलाव क्या होंगे, यह अभी सार्वजनिक रिपोर्टों से स्पष्ट नहीं है।