यहाँ bite या occlusion का मतलब है कि ऊपर और नीचे के दांत आपस में कैसे मिलते हैं। सर्जरी-फर्स्ट का केंद्रीय परीक्षण यही है कि ऑर्थोडॉन्टिस्ट और मैक्सिलोफेशियल सर्जन सर्जरी के समय stable transitional occlusion बना सकते हैं या नहीं ।
दांतों का सर्जरी से पहले बिल्कुल सीधा होना अनिवार्य नहीं है। लेकिन ऊपरी और निचले dental arches को इतना तालमेल देना चाहिए कि वे jaw positioning को guide कर सकें और बाद में orthodontics bite को finish कर सके । अगर सर्जरी से पहले ही बहुत अधिक alignment, leveling, decompensation, extraction-space management या arch coordination की जरूरत है, तो presurgical orthodontics छोड़ना सही नहीं माना जाता
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यह तरीका तब अधिक उपयुक्त होता है जब मुख्य समस्या skeletal jaw discrepancy हो और dental problems इतनी सीमित हों कि उन्हें सर्जरी के बाद संभाला जा सके । आम तौर पर अनुकूल संकेत ये हैं:
अगर दांतों की मौजूदा स्थिति jaw positioning को मुश्किल बनाती है या सर्जरी के तुरंत बाद bite को अस्थिर कर सकती है, तो presurgical orthodontics आम तौर पर plan में रहना चाहिए । सावधानी के संकेत ये हैं:
कई jaw-deformity patients में dental compensation होता है—यानी दांत इस तरह झुक या खिसक जाते हैं कि skeletal discrepancy कुछ हद तक छिप जाती है । पारंपरिक sequence में presurgical orthodontics का एक बड़ा उद्देश्य उन दांतों को decompensate करना होता है, ताकि जबड़ों को इच्छित skeletal relationship में ले जाया जा सके
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इस चरण को छोड़ना तभी समझदारी है जब compensation इतना हल्का हो कि वह surgical plan को distort न करे और सर्जरी के बाद orthodontics को बहुत कठिन finishing problem न दे । अगर compensation severe है, तो surgery-first में jaw movement की planning कम भरोसेमंद हो सकती है और postsurgical orthodontic finishing ज्यादा मुश्किल हो सकती है
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सर्जरी-फर्स्ट का फैसला केवल मरीज की पसंद पर नहीं होना चाहिए। इसे ऑर्थोडॉन्टिस्ट और मैक्सिलोफेशियल सर्जन को मिलकर तय करना चाहिए । मूल्यांकन में आम तौर पर clinical examination, cephalometric analysis, dental casts या digital scans, और model या virtual surgical planning से यह जांचा जाता है कि proposed jaw movement और bite व्यावहारिक हैं या नहीं
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सरल नियम यह है: surgery-first पर तभी विचार करें जब सर्जरी के समय stable transitional bite बन सके और बाकी orthodontic work सर्जरी के बाद वास्तविक रूप से पूरा किया जा सके । अगर accurate jaw positioning से पहले substantial tooth movement जरूरी है, तो orthodontics-first यानी पारंपरिक sequence बेहतर रहता है
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सर्जरी-फर्स्ट ऑर्थोग्नैथिक सर्जरी सही case में उपयोगी हो सकती है, लेकिन यह orthodontic fundamentals को bypass करने का तरीका नहीं है । सबसे अच्छे उम्मीदवार वे होते हैं जिनके dental arches, skeletal discrepancy, oral health, compliance और treating team मिलकर full presurgical tooth preparation से पहले भी stable surgical bite संभव बनाते हैं
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