यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है। उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: On the fifth anniversary of the Taliban's return to power, what has European Parliament member Hannah Neumann accused Europe of regarding it. Article summary: Neumann's central argument is that Europe's engagement with the Taliban — Germany's consulate-for-deportations deal, the EU's Brussels talks, and the framing of meetings as "technical" — amounts to a step-by-step politic. Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clic
तालिबान के अफगानिस्तान पर फिर से कब्ज़ा करने की पांचवीं बरसी पर, जर्मनी की ग्रीन पार्टी की यूरोपीय सांसद हन्ना न्यूमैन ने यूरोप पर तालिबान शासन के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' (step-by-step normalization) का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यूरोप, प्रवासन नियंत्रण से जुड़े अल्पकालिक सौदों के लिए मानवाधिकारों के सिद्धांतों का बलिदान दे रहा है। न्यूमैन के तर्क का केंद्र यह है कि जहां तालिबान के अत्याचार जस के तस हैं, वहीं यूरोप का रुख बदल रहा है — और वह इसके लिए कूटनीतिक फैसलों और मानवाधिकार रिपोर्टों को सबूत के तौर पर पेश करती हैं ।
न्यूमैन का मानना है कि पिछले पांच सालों में अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। उनके मुताबिक, जो चीज़ बदल रही है, वह है तालिबान शासन को समायोजित करने की यूरोप की इच्छा। "सबसे बड़ा खतरा आज सिर्फ वह नहीं है जो तालिबान कर रहे हैं। दुनिया उनके अत्याचार को नई सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने लगी है," उन्होंने रुखशाना मीडिया को बताया । उनका कहना है कि यूरोप अफगान महिलाओं और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा की अनदेखी करके निर्वासन सौदों को प्राथमिकता दे रहा है, जो उसकी जिम्मेदारी से भागना है
।
न्यूमैन ने जर्मन सरकार की तीखी आलोचना की है, जिसके बारे में उनका कहना है कि उसने तालिबान के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बर्लिन सरकार ने तालिबान को जर्मनी में कई वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) खोलने की अनुमति दी, जिसके बदले में उसे अफगानों को वापस भेजने की अनुमति मिली। इस तरह जर्मनी एक ऐसे शासन के साथ संबंधों को सामान्य बना रहा है जो महिलाओं पर अत्याचार करता है । न्यूमैन ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें दावा किया गया है कि जर्मन अधिकारी बिना किसी आपराधिक सजा वाले अफगानों को भी निर्वासित करने की तैयारी कर रहे थे, जबकि यूरोपीय आयोग (यूरोपियन कमीशन) का दावा था कि बातचीत सिर्फ आतंकवाद, हत्या और बलात्कार के दोषी लोगों तक सीमित है
। उन्होंने निर्वासन को "सिर्फ एक मानवीय विफलता नहीं, बल्कि एक सामरिक गलती" बताया, जो यूरोप को तालिबान के दबाव के प्रति संवेदनशील बनाती है
।
जून 2026 के अंत में, एक तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए ब्रुसेल्स का दौरा किया — सत्ता में आने के बाद ब्लॉक का तालिबान के साथ यह पहला सीधा संपर्क था । बेल्जियम ने प्रतिनिधिमंडल के लिए एक दिन का प्रतिबंधित वीज़ा जारी किया
। यूरोपीय आयोग ने इन बैठकों को 'तकनीकी वार्ता' (technical talks) करार दिया, जो प्रवासन वापसी पर केंद्रित थी। न्यूमैन ने इस फ्रेमिंग को पूरी तरह खारिज कर दिया: "तालिबान के साथ तकनीकी जुड़ाव जैसी कोई चीज़ नहीं है। यह जवाबदेही के बिना राजनीतिक सामान्यीकरण है"
। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: "आयोग ने आज ब्रुसेल्स में तालिबान के साथ 'तकनीकी वार्ता' की। क्या बकवास है। तालिबान यूरोपीय संघ से तकनीकी चर्चा नहीं चाहते; वे वैधता (legitimacy) चाहते हैं"
। उन्होंने 27 अन्य सांसदों और अफगान महिला पूर्व सांसदों के साथ मिलकर आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर को एक खुला पत्र लिखा, जिसमें यूरोपीय संघ की शर्तें पूरी होने तक ब्रुसेल्स में कोई वार्ता न करने की मांग की गई
।
न्यूमैन का कहना है कि तालिबान ने वह स्थापित कर दिया है जिसे कई अफगान महिलाएं जेंडर अपार्थीड (लैंगिक रंगभेद) बताती हैं — "महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से मिटाने के लिए बनाई गई एक सुसंगत व्यवस्था" । न्यूमैन और अन्य स्रोत जिन विशिष्ट स्थितियों का विवरण देते हैं उनमें शामिल हैं:
न्यूमैन का केंद्रीय तर्क यह है कि तालिबान के साथ यूरोप का जुड़ाव — जर्मनी का वाणिज्य दूतावास-के-बदले-निर्वासन का सौदा, ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ की वार्ता, और बैठकों को 'तकनीकी' करार देना — एक ऐसे शासन के राजनीतिक सामान्यीकरण के बराबर है जिसने महिलाओं और लड़कियों पर अपने अत्याचार और भी तेज कर दिए हैं। वह चेतावनी देती हैं कि यह तरीका यूरोप की विश्वसनीयता और सुरक्षा को कमजोर करता है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय "धीरे-धीरे तालिबान शासन को नई सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने लगा है" ।
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यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है।
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है। उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल रहा है जो निर्वासन समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है।