यूरोप पर तालिबान के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' का आरोप: जर्मन सांसद ने सत्ता संभालने की पांचवीं बरसी पर उठाए सवाल
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है। उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल...
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यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है।
उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल रहा है जो निर्वासन समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है।
On the fifth anniversary of the Taliban's return to power, what has European Parliament member Hannah Neumann accused Europe of regarding itAI-generated editorial visual representing the conflict between international diplomacy and human rights in Afghanistan, five years after the Taliban's return to power.
AI संकेत
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तालिबान के अफगानिस्तान पर फिर से कब्ज़ा करने की पांचवीं बरसी पर, जर्मनी की ग्रीन पार्टी की यूरोपीय सांसद हन्ना न्यूमैन ने यूरोप पर तालिबान शासन के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' (step-by-step normalization) का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यूरोप, प्रवासन नियंत्रण से जुड़े अल्पकालिक सौदों के लिए मानवाधिकारों के सिद्धांतों का बलिदान दे रहा है। न्यूमैन के तर्क का केंद्र यह है कि जहां तालिबान के अत्याचार जस के तस हैं, वहीं यूरोप का रुख बदल रहा है — और वह इसके लिए कूटनीतिक फैसलों और मानवाधिकार रिपोर्टों को सबूत के तौर पर पेश करती हैं ।
मुख्य आरोप: तालिबान नहीं, यूरोप बदल रहा है
न्यूमैन का मानना है कि पिछले पांच सालों में अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। उनके मुताबिक, जो चीज़ बदल रही है, वह है तालिबान शासन को समायोजित करने की यूरोप की इच्छा। "सबसे बड़ा खतरा आज सिर्फ वह नहीं है जो तालिबान कर रहे हैं। दुनिया उनके अत्याचार को नई सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने लगी है," उन्होंने रुखशाना मीडिया को बताया । उनका कहना है कि यूरोप अफगान महिलाओं और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा की अनदेखी करके निर्वासन सौदों को प्राथमिकता दे रहा है, जो उसकी जिम्मेदारी से भागना है ।
Studio Global AI
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"यूरोप पर तालिबान के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' का आरोप: जर्मन सांसद ने सत्ता संभालने की पांचवीं बरसी पर उठाए सवाल" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है। उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल रहा है जो निर्वासन समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है।
यूरोप पर तालिबान के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' का आरोप: जर्मन सांसद ने सत्ता संभालने की पांचवीं बरसी पर उठाए सवाल
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है। उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल...
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यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है।
उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल रहा है जो निर्वासन समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है।
On the fifth anniversary of the Taliban's return to power, what has European Parliament member Hannah Neumann accused Europe of regarding itAI-generated editorial visual representing the conflict between international diplomacy and human rights in Afghanistan, five years after the Taliban's return to power.
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तालिबान के अफगानिस्तान पर फिर से कब्ज़ा करने की पांचवीं बरसी पर, जर्मनी की ग्रीन पार्टी की यूरोपीय सांसद हन्ना न्यूमैन ने यूरोप पर तालिबान शासन के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' (step-by-step normalization) का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यूरोप, प्रवासन नियंत्रण से जुड़े अल्पकालिक सौदों के लिए मानवाधिकारों के सिद्धांतों का बलिदान दे रहा है। न्यूमैन के तर्क का केंद्र यह है कि जहां तालिबान के अत्याचार जस के तस हैं, वहीं यूरोप का रुख बदल रहा है — और वह इसके लिए कूटनीतिक फैसलों और मानवाधिकार रिपोर्टों को सबूत के तौर पर पेश करती हैं ।
मुख्य आरोप: तालिबान नहीं, यूरोप बदल रहा है
न्यूमैन का मानना है कि पिछले पांच सालों में अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। उनके मुताबिक, जो चीज़ बदल रही है, वह है तालिबान शासन को समायोजित करने की यूरोप की इच्छा। "सबसे बड़ा खतरा आज सिर्फ वह नहीं है जो तालिबान कर रहे हैं। दुनिया उनके अत्याचार को नई सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने लगी है," उन्होंने रुखशाना मीडिया को बताया । उनका कहना है कि यूरोप अफगान महिलाओं और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा की अनदेखी करके निर्वासन सौदों को प्राथमिकता दे रहा है, जो उसकी जिम्मेदारी से भागना है ।
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"यूरोप पर तालिबान के 'कदम-दर-कदम सामान्यीकरण' का आरोप: जर्मन सांसद ने सत्ता संभालने की पांचवीं बरसी पर उठाए सवाल" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
यूरोपीय संसद की जर्मन सांसद हन्ना न्यूमैन ने आरोप लगाया है कि यूरोप तालिबान शासन को 'कदम दर कदम सामान्य' बना रहा है और इसके लिए वह मानवाधिकारों की कुर्बानी दे रहा है। उनका कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं बरसी पर अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यूरोप का रुख बदल रहा है जो निर्वासन समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है।
न्यूमैन ने जर्मन सरकार की तीखी आलोचना की है, जिसके बारे में उनका कहना है कि उसने तालिबान के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बर्लिन सरकार ने तालिबान को जर्मनी में कई वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) खोलने की अनुमति दी, जिसके बदले में उसे अफगानों को वापस भेजने की अनुमति मिली। इस तरह जर्मनी एक ऐसे शासन के साथ संबंधों को सामान्य बना रहा है जो महिलाओं पर अत्याचार करता है । न्यूमैन ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें दावा किया गया है कि जर्मन अधिकारी बिना किसी आपराधिक सजा वाले अफगानों को भी निर्वासित करने की तैयारी कर रहे थे, जबकि यूरोपीय आयोग (यूरोपियन कमीशन) का दावा था कि बातचीत सिर्फ आतंकवाद, हत्या और बलात्कार के दोषी लोगों तक सीमित है । उन्होंने निर्वासन को "सिर्फ एक मानवीय विफलता नहीं, बल्कि एक सामरिक गलती" बताया, जो यूरोप को तालिबान के दबाव के प्रति संवेदनशील बनाती है ।
ब्रुसेल्स में तालिबान प्रतिनिधिमंडल के साथ यूरोपीय संघ की पहली सीधी बातचीत
जून 2026 के अंत में, एक तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए ब्रुसेल्स का दौरा किया — सत्ता में आने के बाद ब्लॉक का तालिबान के साथ यह पहला सीधा संपर्क था । बेल्जियम ने प्रतिनिधिमंडल के लिए एक दिन का प्रतिबंधित वीज़ा जारी किया । यूरोपीय आयोग ने इन बैठकों को 'तकनीकी वार्ता' (technical talks) करार दिया, जो प्रवासन वापसी पर केंद्रित थी। न्यूमैन ने इस फ्रेमिंग को पूरी तरह खारिज कर दिया: "तालिबान के साथ तकनीकी जुड़ाव जैसी कोई चीज़ नहीं है। यह जवाबदेही के बिना राजनीतिक सामान्यीकरण है" । उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: "आयोग ने आज ब्रुसेल्स में तालिबान के साथ 'तकनीकी वार्ता' की। क्या बकवास है। तालिबान यूरोपीय संघ से तकनीकी चर्चा नहीं चाहते; वे वैधता (legitimacy) चाहते हैं" । उन्होंने 27 अन्य सांसदों और अफगान महिला पूर्व सांसदों के साथ मिलकर आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर को एक खुला पत्र लिखा, जिसमें यूरोपीय संघ की शर्तें पूरी होने तक ब्रुसेल्स में कोई वार्ता न करने की मांग की गई ।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की आलोचना
ह्यूमन राइट्स वॉच ने 3 अगस्त 2026 को एक विस्तृत समयरेखा जारी कर दस्तावेज किया कि तालिबान ने "दुनिया के सबसे बुरे मानवाधिकार संकटों में से एक को स्थापित" कर दिया है और महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को व्यवस्थित रूप से खत्म कर दिया है। HRW ने स्पष्ट रूप से 22 जून की EU-तालिबान बैठक को सामान्यीकरण की परेशान करने वाली प्रवृत्ति के हिस्से के रूप में आलोचना की ।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने 13 अगस्त 2026 को जर्मन सरकार से आग्रह किया कि वह जोखिम वाले अफगानों को शरण देने के अपने सभी वादों को तत्काल पूरा करे और निर्वासन रोके। संगठन ने अफगानिस्तान में "विनाशकारी मानवाधिकार स्थिति" का हवाला दिया । जून 2026 में ही, एम्नेस्टी ने एक कानूनी विश्लेषण प्रकाशित किया, जिसमें दिखाया गया कि तालिबान का नया 'तलाक कोड' (डिक्री 18) बाल विवाह को संस्थागत रूप देने का रास्ता साफ करता है ।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी 13-14 अगस्त 2026 को तालिबान शासन के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के लिए मानवाधिकार बेंचमार्क पर ठोस प्रगति दिखाए बिना तालिबान को मान्यता देने की कोई भी कोशिश नहीं होनी चाहिए ।
महिलाओं और लड़कियों के लिए वर्तमान मानवाधिकार स्थिति
न्यूमैन का कहना है कि तालिबान ने वह स्थापित कर दिया है जिसे कई अफगान महिलाएं जेंडर अपार्थीड (लैंगिक रंगभेद) बताती हैं — "महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से मिटाने के लिए बनाई गई एक सुसंगत व्यवस्था" । न्यूमैन और अन्य स्रोत जिन विशिष्ट स्थितियों का विवरण देते हैं उनमें शामिल हैं:
12 साल से ऊपर की लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध: लड़कियों को माध्यमिक और उच्च शिक्षा से वंचित रखा गया है ।
महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से बाहर करना: महिलाओं को अधिकांश व्यवसायों, राजनीतिक भागीदारी और कई सार्वजनिक स्थानों से बाहर रखा गया है। "महिलाओं और लड़कियों को व्यवस्थित रूप से सार्वजनिक जीवन से मिटा दिया गया है। स्कूल। विश्वविद्यालय। नौकरियां। पार्क," न्यूमैन ने एक्स पर लिखा ।
सार्वजनिक कोड़े मारने और पत्थरवाद की वापसी: "सार्वजनिक कोड़े मारना और पत्थरवाद वापस आ गया है," उन्होंने कहा । तालिबान का 2026 का आपराधिक प्रक्रिया विनियमन भी यातना को संस्थागत रूप देता है और सजा के रूप में संपत्ति के विनाश को अधिकृत करता है ।
बाल विवाह को कानूनी मान्यता: एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने दस्तावेज किया कि तालिबान का डिक्री 18, जो मई 2026 में प्रकाशित हुआ, बाल विवाह को सक्षम बनाता है, जो महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए पहले से ही 'दयनीय स्थिति' को और खराब करता है ।
स्वास्थ्य सेवा पर प्रतिबंध: महिलाएं बिना किसी पुरुष अभिभावक के स्वास्थ्य सुविधाओं तक नहीं पहुंच सकतीं ।
निष्कर्ष
न्यूमैन का केंद्रीय तर्क यह है कि तालिबान के साथ यूरोप का जुड़ाव — जर्मनी का वाणिज्य दूतावास-के-बदले-निर्वासन का सौदा, ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ की वार्ता, और बैठकों को 'तकनीकी' करार देना — एक ऐसे शासन के राजनीतिक सामान्यीकरण के बराबर है जिसने महिलाओं और लड़कियों पर अपने अत्याचार और भी तेज कर दिए हैं। वह चेतावनी देती हैं कि यह तरीका यूरोप की विश्वसनीयता और सुरक्षा को कमजोर करता है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय "धीरे-धीरे तालिबान शासन को नई सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने लगा है" ।
afintl.com
Germany Gave In To Taliban Pressure, Says European Lawmaker
न्यूमैन ने जर्मन सरकार की तीखी आलोचना की है, जिसके बारे में उनका कहना है कि उसने तालिबान के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बर्लिन सरकार ने तालिबान को जर्मनी में कई वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) खोलने की अनुमति दी, जिसके बदले में उसे अफगानों को वापस भेजने की अनुमति मिली। इस तरह जर्मनी एक ऐसे शासन के साथ संबंधों को सामान्य बना रहा है जो महिलाओं पर अत्याचार करता है । न्यूमैन ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें दावा किया गया है कि जर्मन अधिकारी बिना किसी आपराधिक सजा वाले अफगानों को भी निर्वासित करने की तैयारी कर रहे थे, जबकि यूरोपीय आयोग (यूरोपियन कमीशन) का दावा था कि बातचीत सिर्फ आतंकवाद, हत्या और बलात्कार के दोषी लोगों तक सीमित है । उन्होंने निर्वासन को "सिर्फ एक मानवीय विफलता नहीं, बल्कि एक सामरिक गलती" बताया, जो यूरोप को तालिबान के दबाव के प्रति संवेदनशील बनाती है ।
ब्रुसेल्स में तालिबान प्रतिनिधिमंडल के साथ यूरोपीय संघ की पहली सीधी बातचीत
जून 2026 के अंत में, एक तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए ब्रुसेल्स का दौरा किया — सत्ता में आने के बाद ब्लॉक का तालिबान के साथ यह पहला सीधा संपर्क था । बेल्जियम ने प्रतिनिधिमंडल के लिए एक दिन का प्रतिबंधित वीज़ा जारी किया । यूरोपीय आयोग ने इन बैठकों को 'तकनीकी वार्ता' (technical talks) करार दिया, जो प्रवासन वापसी पर केंद्रित थी। न्यूमैन ने इस फ्रेमिंग को पूरी तरह खारिज कर दिया: "तालिबान के साथ तकनीकी जुड़ाव जैसी कोई चीज़ नहीं है। यह जवाबदेही के बिना राजनीतिक सामान्यीकरण है" । उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: "आयोग ने आज ब्रुसेल्स में तालिबान के साथ 'तकनीकी वार्ता' की। क्या बकवास है। तालिबान यूरोपीय संघ से तकनीकी चर्चा नहीं चाहते; वे वैधता (legitimacy) चाहते हैं" । उन्होंने 27 अन्य सांसदों और अफगान महिला पूर्व सांसदों के साथ मिलकर आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर को एक खुला पत्र लिखा, जिसमें यूरोपीय संघ की शर्तें पूरी होने तक ब्रुसेल्स में कोई वार्ता न करने की मांग की गई ।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की आलोचना
ह्यूमन राइट्स वॉच ने 3 अगस्त 2026 को एक विस्तृत समयरेखा जारी कर दस्तावेज किया कि तालिबान ने "दुनिया के सबसे बुरे मानवाधिकार संकटों में से एक को स्थापित" कर दिया है और महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को व्यवस्थित रूप से खत्म कर दिया है। HRW ने स्पष्ट रूप से 22 जून की EU-तालिबान बैठक को सामान्यीकरण की परेशान करने वाली प्रवृत्ति के हिस्से के रूप में आलोचना की ।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने 13 अगस्त 2026 को जर्मन सरकार से आग्रह किया कि वह जोखिम वाले अफगानों को शरण देने के अपने सभी वादों को तत्काल पूरा करे और निर्वासन रोके। संगठन ने अफगानिस्तान में "विनाशकारी मानवाधिकार स्थिति" का हवाला दिया । जून 2026 में ही, एम्नेस्टी ने एक कानूनी विश्लेषण प्रकाशित किया, जिसमें दिखाया गया कि तालिबान का नया 'तलाक कोड' (डिक्री 18) बाल विवाह को संस्थागत रूप देने का रास्ता साफ करता है ।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी 13-14 अगस्त 2026 को तालिबान शासन के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के लिए मानवाधिकार बेंचमार्क पर ठोस प्रगति दिखाए बिना तालिबान को मान्यता देने की कोई भी कोशिश नहीं होनी चाहिए ।
महिलाओं और लड़कियों के लिए वर्तमान मानवाधिकार स्थिति
न्यूमैन का कहना है कि तालिबान ने वह स्थापित कर दिया है जिसे कई अफगान महिलाएं जेंडर अपार्थीड (लैंगिक रंगभेद) बताती हैं — "महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से मिटाने के लिए बनाई गई एक सुसंगत व्यवस्था" । न्यूमैन और अन्य स्रोत जिन विशिष्ट स्थितियों का विवरण देते हैं उनमें शामिल हैं:
12 साल से ऊपर की लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध: लड़कियों को माध्यमिक और उच्च शिक्षा से वंचित रखा गया है ।
महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से बाहर करना: महिलाओं को अधिकांश व्यवसायों, राजनीतिक भागीदारी और कई सार्वजनिक स्थानों से बाहर रखा गया है। "महिलाओं और लड़कियों को व्यवस्थित रूप से सार्वजनिक जीवन से मिटा दिया गया है। स्कूल। विश्वविद्यालय। नौकरियां। पार्क," न्यूमैन ने एक्स पर लिखा ।
सार्वजनिक कोड़े मारने और पत्थरवाद की वापसी: "सार्वजनिक कोड़े मारना और पत्थरवाद वापस आ गया है," उन्होंने कहा । तालिबान का 2026 का आपराधिक प्रक्रिया विनियमन भी यातना को संस्थागत रूप देता है और सजा के रूप में संपत्ति के विनाश को अधिकृत करता है ।
बाल विवाह को कानूनी मान्यता: एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने दस्तावेज किया कि तालिबान का डिक्री 18, जो मई 2026 में प्रकाशित हुआ, बाल विवाह को सक्षम बनाता है, जो महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए पहले से ही 'दयनीय स्थिति' को और खराब करता है ।
स्वास्थ्य सेवा पर प्रतिबंध: महिलाएं बिना किसी पुरुष अभिभावक के स्वास्थ्य सुविधाओं तक नहीं पहुंच सकतीं ।
निष्कर्ष
न्यूमैन का केंद्रीय तर्क यह है कि तालिबान के साथ यूरोप का जुड़ाव — जर्मनी का वाणिज्य दूतावास-के-बदले-निर्वासन का सौदा, ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ की वार्ता, और बैठकों को 'तकनीकी' करार देना — एक ऐसे शासन के राजनीतिक सामान्यीकरण के बराबर है जिसने महिलाओं और लड़कियों पर अपने अत्याचार और भी तेज कर दिए हैं। वह चेतावनी देती हैं कि यह तरीका यूरोप की विश्वसनीयता और सुरक्षा को कमजोर करता है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय "धीरे-धीरे तालिबान शासन को नई सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने लगा है" ।
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