संदेह की सबसे बड़ी वजह सीधी है: बयान के साथ ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। ISW के मुताबिक पुतिन ने केवल अस्पष्ट रूप से संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन रूस की ओर से युद्ध समाप्त करने की मंशा का कोई प्रमाण नहीं दिया । ISW ने यह भी कहा कि रूसी सरकारी मीडिया ने इस टिप्पणी को इस तरह पेश किया मानो पुतिन ने साफ कह दिया हो कि युद्ध समाप्ति के करीब है, जबकि इसके समर्थन में ठोस संकेत मौजूद नहीं थे
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तीन बातें इस दावे को और कमजोर बनाती हैं:
बयान को पूरी तरह नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका समय राजनीतिक रूप से उपयोगी है। India Today ने रिपोर्ट किया कि यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब रूस और यूक्रेन ने अमेरिकी मध्यस्थता वाले समझौते की पुष्टि की थी, जिसमें तीन-दिवसीय युद्धविराम और दोनों पक्षों के 1,000-1,000 बंदियों की अदला-बदली शामिल थी ।
ऐसी स्थिति में “युद्ध अंत की ओर है” जैसा वाक्य मॉस्को को कूटनीति के लिए खुला दिखा सकता है, बिना यह बताए कि वह किस बात पर समझौता करने को तैयार है। इससे कई संदेश एक साथ दिए जा सकते हैं: घरेलू समर्थकों को यह भरोसा दिलाना कि रूस अनुकूल परिणाम की ओर बढ़ रहा है, पश्चिम और यूक्रेन की प्रतिक्रिया परखना, और भविष्य की किसी भी बातचीत को मॉस्को की पसंदीदा शर्तों के दायरे में दिखाना। उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर यह व्याख्या उस दावे से अधिक मजबूत लगती है कि रूस ने अचानक युद्ध रोकने का फैसला कर लिया है।
अगर रूस सचमुच दिशा बदल रहा है, तो संकेत सिर्फ भाषा में नहीं, जमीन पर दिखने चाहिए। देखने लायक बातें होंगी: युद्धविराम का लगातार पालन, हमलों में मापने योग्य कमी, अधिकार-प्राप्त वार्ताकार, समझौते की स्पष्ट शर्तें और अधिकतमवादी पूर्व-शर्तों के बिना बातचीत की तैयारी।
अब तक उपलब्ध रिपोर्टिंग ऐसा नहीं दिखाती। इसके बजाय तस्वीर यह है: एक अस्पष्ट बयान, नाज़ुक युद्धविराम माहौल और विश्लेषकों की चेतावनी कि मॉस्को ने युद्ध खत्म करने की ठोस मंशा नहीं दिखाई ।
पुतिन के बयान को बेअर्थ कहकर खारिज करना भी सही नहीं होगा—यह संभव है कि यह किसी कूटनीतिक स्थिति-निर्माण का हिस्सा हो। लेकिन इसे इस बात का भरोसेमंद प्रमाण मानना भी उचित नहीं कि युद्ध सचमुच खत्म होने जा रहा है। मौजूदा स्रोतों के आधार पर ज्यादा सुरक्षित निष्कर्ष यही है: पुतिन शांति जैसी भाषा का इस्तेमाल बातचीत की कथा को आकार देने के लिए कर रहे हैं, न कि अभी तक किसी सत्यापित और ठोस युद्ध-समाप्ति का संकेत दे रहे हैं ।
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