Monad ब्लॉकचेन पर चलने वाले Echo Protocol में हुए हालिया एक्सप्लॉइट ने शुरुआत में ऐसा दिखाया मानो DeFi इकोसिस्टम से $76.7 मिलियन की बड़ी चोरी हो गई हो। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि वास्तव में इतना पैसा निकाला नहीं गया था।
हमलावर ने एक कम्प्रोमाइज्ड एडमिन प्राइवेट‑की का उपयोग करके लगभग 1,000 अनऑथराइज्ड eBTC मिंट कर दिए—जो उस समय लगभग $76.7M के बराबर थे। लेकिन इन टोकनों का बड़ा हिस्सा सिर्फ कागज़ी या सिंथेटिक वैल्यू था; इन्हें पूरी तरह असली एसेट में बदलना संभव नहीं था।
जांच के अनुसार, असली नुकसान लगभग $816,000 से $870,000 के बीच रहा, जो हमलावर ने उधार लेकर सिस्टम से बाहर निकाल लिया।
Echo Protocol एक Bitcoin‑फोकस्ड DeFi प्लेटफ़ॉर्म है जो Monad ब्लॉकचेन पर बनाया गया है। इसका मुख्य टोकन eBTC है, जिसे Bitcoin से जुड़े लिक्विड एसेट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है—खासकर लेंडिंग और लिक्विडिटी स्ट्रेटेजीज़ में।
जब एडमिन की एक्सेस हमलावर के हाथ लगी, तो उसने सिस्टम में सीधे नए eBTC मिंट कर दिए। क्योंकि यह एडमिन‑लेवल परमिशन थी, इसलिए बाकी प्रोटोकॉल शुरुआत में इन्हें वैध टोकन की तरह स्वीकार कर रहे थे।
हमलावर ने एक सामान्य DeFi रणनीति का उपयोग किया—नकली कोलैटरल के खिलाफ असली एसेट उधार लेना।
क्योंकि eBTC मार्केट में लिक्विडिटी सीमित थी, हमलावर पूरे 1,000 eBTC को असली एसेट में नहीं बदल सका। इसलिए वास्तविक नुकसान $1 मिलियन से नीचे ही रहा।
जो $76.7 मिलियन की खबर सामने आई, वह असल में मिंट किए गए 1,000 नकली eBTC का अनुमानित मूल्य था—न कि सिस्टम से निकाले गए पैसे।
हमले के बाद लगभग 955 eBTC हमलावर के वॉलेट में ही पड़े रहे।
जब टीम ने एडमिन की कंट्रोल वापस हासिल कर लिया, तो Echo Protocol ने इन 955 eBTC को बर्न कर दिया, जिससे वे आगे इस्तेमाल नहीं किए जा सके।
घटना के सामने आते ही Monad इकोसिस्टम के कई प्रोजेक्ट्स ने तुरंत कदम उठाए।
Echo Protocol
Curvance
महत्वपूर्ण बात यह है कि Monad नेटवर्क खुद हैक नहीं हुआ था; समस्या Echo Protocol के एप्लिकेशन‑लेयर पर हुई थी।
विश्लेषकों ने कई ऑपरेशनल और गवर्नेंस कमियों की ओर इशारा किया:
इन कमजोरियों की वजह से एक बार की‑कम्प्रोमाइज होते ही हमलावर तुरंत बड़ी मात्रा में सिंथेटिक एसेट बना सका।
यह घटना DeFi सेक्टर के एक बड़े ट्रेंड को दिखाती है: कई बड़े हमले स्मार्ट‑कॉन्ट्रैक्ट बग से नहीं बल्कि प्राइवेट‑की या गवर्नेंस फेल्योर से होते हैं।
जब किसी प्रोटोकॉल की एडमिन की चोरी हो जाती है, तो हमलावर मूल रूप से उसी अधिकार के साथ काम कर सकता है जैसे कोई असली एडमिन—भले ही स्मार्ट‑कॉन्ट्रैक्ट कोड पूरी तरह सही क्यों न हो।
Echo Protocol की घटना यह दिखाती है कि DeFi में एडमिन‑लेवल एक्सेस अक्सर स्मार्ट‑कॉन्ट्रैक्ट बग से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
हालाँकि इस एक्सप्लॉइट में लाखों डॉलर के नकली एसेट बनाए गए, लेकिन तेज़ प्रतिक्रिया और सीमित लिक्विडिटी के कारण वास्तविक नुकसान $1 मिलियन से कम ही रहा।
DeFi प्रोजेक्ट्स के लिए संदेश साफ है: मजबूत मल्टी‑सिग वॉलेट, मिंट लिमिट, और टाइमलॉक जैसे गवर्नेंस सुरक्षा उपाय लागू करना उतना ही जरूरी है जितना स्मार्ट‑कॉन्ट्रैक्ट ऑडिट।
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हमलावर ने Echo Protocol के एडमिन प्राइवेट‑की को कम्प्रोमाइज करके लगभग 1,000 नकली eBTC (करीब $76.7M) मिंट किए, लेकिन वास्तविक रूप से लगभग $816k–$870k के एसेट ही निकाले जा सके।[1][2]
हमलावर ने Echo Protocol के एडमिन प्राइवेट‑की को कम्प्रोमाइज करके लगभग 1,000 नकली eBTC (करीब $76.7M) मिंट किए, लेकिन वास्तविक रूप से लगभग $816k–$870k के एसेट ही निकाले जा सके।[1][2] हमलावर ने 45 eBTC को Curvance में कोलैटरल के रूप में जमा कर 11.29 WBTC उधार लिए, फिर उन्हें Ethereum पर ब्रिज कर ETH में बदला और कुछ फंड Tornado Cash से गुजारे।[10][41]
Echo Protocol ने क्रॉस‑चेन ट्रांजैक्शन रोक दिए और बाद में बचे हुए 955 eBTC बर्न कर दिए, जबकि Curvance ने प्रभावित eBTC मार्केट को अस्थायी रूप से रोक दिया।[36][43]