वियतनाम की मुख्य रणनीति रही है कि तेल आपूर्ति के लिए केवल मध्य‑पूर्व पर निर्भर न रहा जाए।
रिफाइनरियों और ईंधन आयातकों ने अब पश्चिम अफ्रीका, भूमध्यसागरीय क्षेत्र और संयुक्त राज्य अमेरिका से अधिक खरीद शुरू की है, जबकि संभव होने पर सीमित मात्रा में मध्य‑पूर्व से भी आपूर्ति जारी रखी जा रही है।
इस रणनीति का उद्देश्य हॉर्मुज़ जैसे समुद्री chokepoint पर निर्भरता कम करना है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं है कि किस देश से कितनी मात्रा में आयात बढ़ा है—इससे संकेत मिलता है कि विविधीकरण की प्रक्रिया अभी जारी है।
नीतिगत स्तर पर सरकार ने ईंधन आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों और रिफाइनरी इनपुट पर आयात शुल्क अस्थायी रूप से 0% कर दिया। इससे वैश्विक बाजार से ईंधन खरीदना आसान हो गया।
वियतनाम की ईंधन आपूर्ति स्थिर रखने में दो प्रमुख रिफाइनरियों की बड़ी भूमिका है:
संकट के दौरान इन दोनों को अधिकतम उत्पादन पर चलाने को प्राथमिकता दी गई।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार घरेलू उत्पादन और बढ़े हुए आयात के संयोजन से देश में ईंधन आपूर्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
घरेलू रिफाइनिंग के बावजूद वियतनाम को अभी भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने पड़ते हैं।
हॉर्मुज़ संकट के दौरान आपूर्ति सुरक्षित करने की होड़ में आयात तेजी से बढ़ा। वियतनाम कस्टम्स के आंकड़ों के अनुसार:
इस वृद्धि के पीछे दो मुख्य कारण रहे:
साथ ही वैश्विक तेल कीमतों में उछाल ने आयात बिल को और बढ़ा दिया।
ऊंची तेल कीमतों और बढ़े हुए आयात का वियतनाम की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है।
क्योंकि देश ऊर्जा के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक कीमतें बढ़ने का मतलब है ऊंचा आयात बिल और व्यापार संतुलन पर दबाव।
तेल महंगा होने से परिवहन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक उत्पादन की लागत भी बढ़ती है। एशिया भर के विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज़ संकट जैसे झटके आयात‑निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में विकास दर को धीमा कर सकते हैं और महंगाई का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
सरकार ने टैक्स कटौती और मूल्य‑स्थिरीकरण उपायों से घरेलू प्रभाव को कम करने की कोशिश की है, लेकिन वैश्विक बाजार की कीमतें अभी भी निर्णायक कारक बनी हुई हैं।
विविधीकरण और उच्च रिफाइनरी उत्पादन के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि वियतनाम की ऊर्जा सुरक्षा अभी भी संरचनात्मक रूप से कमजोर है।
देश की रिफाइनरियां मिलकर राष्ट्रीय ईंधन मांग का लगभग 70% ही पूरा करती हैं। बाकी जरूरतें आयात से पूरी करनी पड़ती हैं।
आपूर्ति स्रोत बदलने से मार्ग जोखिम कम होता है, लेकिन जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है तो उससे बचाव संभव नहीं होता।
एशिया की कई अर्थव्यवस्थाएं अब भी मध्य‑पूर्वी ऊर्जा प्रवाह पर निर्भर हैं। इसलिए हॉर्मुज़ जैसे प्रमुख मार्गों में बाधा आने पर पूरे क्षेत्र में कीमतों का झटका महसूस होता है।
वियतनाम ने हॉर्मुज़ संकट के तत्काल प्रभाव को संभालने के लिए कई कदम उठाए—जैसे कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता, रिफाइनरियों का उच्च उपयोग, आयात शुल्क में कटौती और बढ़े हुए ईंधन आयात। इन उपायों से फिलहाल घरेलू ईंधन आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
लेकिन व्यापक तस्वीर अभी भी चुनौतीपूर्ण है। जब तक वियतनाम आयातित कच्चे तेल और ईंधन पर निर्भर रहेगा, तब तक हॉर्मुज़ जैसे वैश्विक ऊर्जा chokepoint पर होने वाले भू‑राजनीतिक संकट उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बने रहेंगे।
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