इस नई रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है कम कीमत वाली सतह‑से‑हवा (surface‑to‑air) मिसाइलों का विकास, जिन्हें खास तौर पर शहेद जैसे ड्रोन गिराने के लिए बनाया जा रहा है।
यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री मिखाइलो फेदोरोव के अनुसार ऐसी कई प्रणालियाँ पहले से परीक्षण चरण में हैं। लक्ष्य सिर्फ तकनीक तैयार करना नहीं बल्कि उत्पादन को “दर्जनों गुना” बढ़ाना और विशेष रूप से सर्दियों से पहले पर्याप्त भंडार तैयार करना है, क्योंकि उस समय रूस अक्सर ऊर्जा अवसंरचना पर हमले तेज कर देता है।
इन मिसाइलों को लड़ाकू विमानों या बैलिस्टिक मिसाइलों को गिराने के लिए नहीं बनाया जा रहा। वे मुख्य रूप से धीमी गति वाले एक‑तरफा हमलावर ड्रोन जैसे लक्ष्यों पर केंद्रित हैं, जिससे उनकी लागत काफी कम रखी जा सकती है।
यूक्रेन की रणनीति में सबसे तेज़ी से बढ़ता हिस्सा है ड्रोन‑विरुद्ध‑ड्रोन इंटरसेप्शन।
यूक्रेन ने विशेष इंटरसेप्टर UAV विकसित किए हैं जो हवा में दुश्मन ड्रोन का पीछा कर उन्हें नष्ट कर सकते हैं। उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है—2026 के पहले चार महीनों में यूक्रेनी सेना को जितने इंटरसेप्टर ड्रोन मिले, वह पूरे 2025 के मुकाबले दोगुने थे।
आज ये सिस्टम यूक्रेन के एयर‑डिफेंस ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार अब लगभग 30% हवाई लक्ष्यों को इंटरसेप्टर ड्रोन ही गिरा रहे हैं, खासकर दुश्मन के ड्रोन।
इनकी बड़ी ताकत लागत है। कुछ मॉडल की कीमत लगभग 1,000 डॉलर तक बताई जाती है, जिससे इन्हें बड़ी संख्या में तैनात किया जा सकता है।
ड्रोन झुंडों को रोकने के लिए सिर्फ इंटरसेप्टर होना पर्याप्त नहीं है—उन्हें समय रहते पहचानना और ट्रैक करना भी जरूरी है।
यूक्रेन ने इसी उद्देश्य से सेंसर और सॉफ्टवेयर का एक नेटवर्क बनाया है। इसका एक उदाहरण Sky Map प्लेटफॉर्म है, जो रडार, सेंसर और वीडियो फीड को जोड़कर आने वाले हवाई खतरों को ट्रैक करता है और एयर‑डिफेंस निर्णय लेने में मदद करता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस प्रणाली की शुरुआत काफी साधारण तरीकों से हुई थी। युद्ध के शुरुआती दौर में यूक्रेनियों ने खंभों पर लगाए गए स्मार्टफोन का उपयोग करके ड्रोन की आवाज़ पहचानने की कोशिश की, और उस डेटा को सॉफ्टवेयर के जरिए पूरे देश में साझा किया जाता था।
समय के साथ यह नेटवर्क अधिक उन्नत सेंसरों और सॉफ्टवेयर से जुड़कर एक बड़े सिस्टम में बदल गया। इसकी उपयोगिता इतनी साबित हुई कि अमेरिकी सेना ने भी अपने विदेशी ठिकानों की रक्षा के लिए यूक्रेन की कुछ एंटी‑ड्रोन तकनीक—जिसमें Sky Map शामिल है—को अपनाया है।
यूक्रेन का नया एयर‑डिफेंस ढांचा अब एक ही प्रकार के हथियार पर निर्भर नहीं रहता। इसमें कई परतें शामिल हैं:
इस व्यवस्था का फायदा यह है कि महंगी मिसाइलें सिर्फ सबसे खतरनाक लक्ष्यों के लिए बचाकर रखी जा सकती हैं, जबकि अधिकतर ड्रोन सस्ते साधनों से रोके जा सकते हैं।
आधुनिक ड्रोन युद्ध में तकनीक जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आर्थिक संतुलन भी है।
अगर हमला करने वाला पक्ष हजारों सस्ते ड्रोन बना सकता है, तो बचाव करने वाले को भी उतनी ही तेजी और कम लागत पर जवाब देने वाली प्रणालियाँ चाहिए। इसी कारण यूक्रेन एयर डिफेंस को एक तरह की **औद्योगिक प्रणाली—सस्ती, नेटवर्क‑आधारित और बड़े पैमाने पर बनने वाली—**में बदलने की कोशिश कर रहा है।
लगातार ड्रोन हमलों का सामना करते हुए यूक्रेन एक ऐसा प्रयोगशाला‑जैसा वातावरण बन गया है जहाँ कम लागत वाले एंटी‑ड्रोन समाधान विकसित हो रहे हैं। अब कई देश इन अनुभवों का अध्ययन कर रहे हैं क्योंकि दुनिया भर में ड्रोन युद्ध तेजी से फैल रहा है।
संक्षेप में, यूक्रेन का लक्ष्य सिर्फ ड्रोन गिराना नहीं है—बल्कि ऐसी प्रणाली बनाना है जो लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में भी आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित हो सके।
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