सबसे बड़ा बदलाव autocomplete से आगे का है। पहले AI coding tools अक्सर अगली लाइन सुझाने तक सीमित समझे जाते थे। उबर में तस्वीर agentic workflows की ओर बढ़ती दिखती है—ऐसे सिस्टम जिन्हें छोटे-बड़े coding tasks दिए जा सकते हैं और जो बदलाव तैयार कर सकते हैं।
उबर के CTO प्रवीण नेप्पल्ली नागा ने कहा कि कंपनी AI coding में काफी आगे बढ़ी है; उनके मुताबिक 95% उबर इंजीनियर हर महीने AI tools इस्तेमाल करते हैं और कंपनी का एक internal AI agent प्रति सप्ताह करीब 1,800 code changes कर रहा है ।
यह काम सिर्फ code draft करने तक सीमित नहीं दिखता। Developer Productivity Engineering के एक session में उबर के AI प्रयास को software development lifecycle के कई हिस्सों में फैला बताया गया—बड़े monorepos, यानी विशाल साझा codebases, के लिए coding assistants को customize करना; बड़े पैमाने पर code migrations के लिए agentic systems; और testing तथा code-review workflows में AI का इस्तेमाल ।
फिर भी नियंत्रण बिंदु वही है: review. खोसरोशाही के अनुसार AI-generated code को repository में जोड़ने से पहले कर्मचारी जांचते हैं । यानी उबर AI agents से ज्यादा काम तैयार करवा रहा है, लेकिन इसे बिना निगरानी वाले production engineering मॉडल के रूप में पेश नहीं कर रहा।
यहां एक जरूरी बारीकी है। उबर से जुड़े AI आँकड़े अलग-अलग चीजें मापते हैं, इसलिए उन्हें एक ही metric में नहीं मिलाना चाहिए।
खोसरोशाही का 10% वाला आंकड़ा autonomous agents द्वारा तैयार code changes के बारे में है । दूसरी ओर, The Pragmatic Engineer की रिपोर्ट के अनुसार उबर के 84% developers agentic coding users थे—यानी वे command-line agents इस्तेमाल कर रहे थे या अपने IDE में simple tab-completion से आगे के agentic requests कर रहे थे
। उसी रिपोर्ट में कहा गया कि IDE-based tools के भीतर 65% से 72% code AI-generated था
।
ये सारे आंकड़े एक साथ सही हो सकते हैं, क्योंकि वे अलग-अलग स्तर मापते हैं: autonomous-agent code changes, agentic workflows का adoption, और IDE tools के अंदर AI-generated code. व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि AI शायद code draft करने में बहुत बड़ा हिस्सा निभा रहा हो, जबकि merged changes में autonomous agents के नाम से गिने गए बदलावों का हिस्सा छोटा दिखाई दे ।
अगर वही इंजीनियरिंग टीम अधिक काम ship कर सके, तो कंपनी software output बढ़ाते हुए headcount उतनी तेजी से नहीं बढ़ाती। यही उबर की AI और hiring रणनीति का आर्थिक तर्क है: AI पर ज्यादा खर्च, hiring growth पर ज्यादा अनुशासन ।
हालांकि लागत गायब नहीं होती, बस उसका रूप बदलता है। नए कर्मचारियों के अलावा अब AI tools, agents और compute पर खर्च आता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक Anthropic के coding tool Claude Code के इस्तेमाल में तेज उछाल ने उबर के 2026 AI coding budget को उम्मीद से पहले खत्म कर दिया; रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उबर Claude Code और Cursor जैसे tools इस्तेमाल कर रहा है । इसे उबर की पूरी AI economics का हिसाब नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन यह trade-off साफ दिखाता है: software capacity अब लोगों, agents, tools और infrastructure के मिश्रण की तरह plan हो रही है।
उबर के लिए AI नया नहीं है। खोसरोशाही ने कहा कि कंपनी वर्षों से ridesharing trips की pricing और drivers को passengers से match करने में AI का इस्तेमाल करती रही है । नया चरण generative AI और agentic AI को रोजमर्रा के workflows में डालने का है।
हाल की रिपोर्टिंग के अनुसार उबर customer support, driver onboarding और engineering development lifecycle के कुछ हिस्सों में generative AI और agentic AI लगा रहा है, जिससे कुछ workflows में manual intervention कम हुआ है । यह coding जितना headline-friendly नहीं दिखता, लेकिन productivity के लिहाज से अहम है। अगर support तेज हो, onboarding कम friction वाली हो या internal-service issues जल्दी diagnose हों, तो bottlenecks हट सकते हैं—बिना हर जगह उसी अनुपात में नए लोगों को जोड़ने की जरूरत के
।
उबर का मौजूदा मॉडल no-engineer भविष्य नहीं दिखाता; यह supervised AI engineering की तरफ इशारा करता है। Agents code draft कर सकते हैं, बदलाव तैयार कर सकते हैं, migrations में मदद कर सकते हैं और testing या review workflows को तेज कर सकते हैं, लेकिन AI-written code को merge करने से पहले human review अभी भी जरूरी बताया गया है ।
सबसे बड़ा असर incremental headcount growth पर पड़ सकता है। अगर AI tools वास्तविक workflows में भरोसेमंद productivity gains देते हैं, तो उबर engineering capacity बढ़ाते हुए उतनी अतिरिक्त hiring नहीं करेगा जितनी शायद पहले करनी पड़ती ।
लेकिन अंतिम सवाल measurement का है। 95% monthly usage, 84% agentic coding adoption या 65% से 72% AI-generated code जैसे आंकड़े adoption की ताकत दिखाते हैं । वे अपने आप यह साबित नहीं करते कि quality, reliability, maintenance और long-term engineering cost में ठीक-ठीक कितना सुधार हुआ। उबर की रणनीति इसलिए jobs खत्म करने की सीधी कहानी से ज्यादा hiring math बदलने की कहानी है—जहां नया सवाल है: अगली unit of software capacity इंसान से आएगी, agent से, या दोनों के संयोजन से?
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