दिलचस्प बात यह है कि कई जगहों पर जेट फ्यूल की कीमतें कच्चे तेल से भी तेज बढ़ीं। कारण यह है कि विमानन ईंधन की आपूर्ति रिफाइनरियों और शिपिंग नेटवर्क पर अधिक निर्भर होती है, इसलिए किसी भी व्यवधान का असर तुरंत दिखता है।
एयरलाइंस के लिए ईंधन आम तौर पर सबसे बड़ा खर्च होता है। ऐसे में कीमतों का अचानक बढ़ना कंपनियों को तीन विकल्पों के बीच संतुलन बनाने पर मजबूर करता है—लागत खुद झेलना, टिकट महंगे करना या उड़ानों की संख्या घटाना।
यूरोप की कई एयरलाइंस ने पहले ही अपने उड़ान कार्यक्रम में कटौती शुरू कर दी है। इसका मकसद ईंधन बचाना और बढ़ती लागत को नियंत्रित करना है।
सबसे बड़ा कदम लुफ्थांसा ग्रुप ने उठाया, जिसने अपनी गर्मियों की उड़ान योजना से लेकर शरद ऋतु तक लगभग 20,000 शॉर्ट‑हॉल उड़ानें रद्द करने की योजना घोषित की।
इसके अलावा कई कंपनियों ने:
इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ सकता है, जैसे:
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपूर्ति मार्गों में बाधा लंबे समय तक बनी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी थी कि यदि व्यवधान जारी रहा तो यूरोप के पास केवल लगभग छह सप्ताह का जेट फ्यूल भंडार रह सकता है। इससे ईंधन की कमी के कारण उड़ानें रद्द होने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि यूरोपीय अधिकारियों ने बाद में कहा कि फिलहाल वास्तविक कमी के सबूत नहीं हैं, लेकिन ईंधन भंडार पर दबाव जरूर है और बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है।
स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन हर एयरलाइन को समान स्तर की समस्या नहीं हो रही है।
ब्रिटेन की एयरलाइंस easyJet और Jet2 ने यात्रियों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल उन्हें जेट फ्यूल की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं दिख रही और वे अपनी गर्मियों की पूरी उड़ान योजना संचालित करने की तैयारी में हैं।
ब्रिटिश एयरवेज की मूल कंपनी IAG ने भी कहा है कि निकट भविष्य में ईंधन आपूर्ति की समस्या की उम्मीद नहीं है।
इसके पीछे कुछ कारण हैं:
हालांकि यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं या हेजिंग अनुबंध समाप्त हो जाते हैं, तो यह सुरक्षा धीरे‑धीरे कमजोर पड़ सकती है।
यात्रियों के लिए सबसे तुरंत असर टिकट की कीमतों पर पड़ सकता है।
कई एयरलाइंस पहले ही किराए बढ़ा चुकी हैं या अतिरिक्त शुल्क लगा रही हैं। उदाहरण के लिए कुछ कंपनियों ने लंबी दूरी की उड़ानों पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ा है, जबकि अन्य ने चेतावनी दी है कि गर्मियों के अंत तक टिकट और महंगे हो सकते हैं।
जब उड़ानों की संख्या कम होती है और सीटें सीमित हो जाती हैं, तो लोकप्रिय रूट्स पर किराया और भी बढ़ सकता है।
जिन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था हवाई यात्रा पर ज्यादा निर्भर है, वहां प्रभाव दिखने लगा है।
पूर्वी भूमध्यसागर के पर्यटन स्थलों—जैसे साइप्रस—में बुकिंग पैटर्न बदलते दिखाई दे रहे हैं। कुछ यात्री संघर्ष क्षेत्र के करीब वाले रूट्स से बचते हुए वैकल्पिक गंतव्यों का चयन कर रहे हैं।
हालांकि अभी पर्यटन मांग पूरी तरह नहीं टूटी है, लेकिन उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि यदि अस्थिरता लंबी चली तो रद्द यात्राओं, कम उड़ानों और कमजोर पर्यटन मांग का जोखिम बढ़ सकता है।
अभी वैश्विक विमानन उद्योग पूरी तरह ठप होने की स्थिति में नहीं है, लेकिन वह एक गंभीर ईंधन लागत और आपूर्ति संकट से गुजर रहा है।
इस समय उद्योग को प्रभावित करने वाले प्रमुख रुझान हैं:
यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो जाती है तो विमानन बाजार अपेक्षाकृत जल्दी स्थिर हो सकता है। लेकिन यदि व्यवधान पूरे यात्रा सीजन तक जारी रहा, तो एयरलाइंस को और अधिक क्षमता घटानी पड़ सकती है और यात्रियों के लिए हवाई यात्रा अधिक महंगी तथा कम पूर्वानुमानित हो सकती है।
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