युद्ध से पहले ASEAN का औद्योगिक क्षेत्र मजबूत गति से बढ़ रहा था। फरवरी 2026 में क्षेत्रीय मैन्युफैक्चरिंग PMI 53.8 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जो तेज़ विस्तार का संकेत देता है।
लेकिन इसके बाद हालात बदलने लगे। S&P Global के सर्वेक्षणों के अनुसार क्षेत्र में:
रोज़गार के मोर्चे पर भी गति कमजोर हुई है। सर्वेक्षण बताते हैं कि फैक्ट्री रोजगार में वृद्धि अभी भी हो रही है, लेकिन यह केवल मामूली रही है, यानी कंपनियाँ नई भर्ती करने में सतर्क हैं।
देश‑स्तरीय आंकड़े बताते हैं कि इस झटके का असर हर जगह समान नहीं है।
हालांकि दोनों आंकड़े अभी भी 50 से ऊपर हैं—जो विस्तार का संकेत है—लेकिन इससे यह स्पष्ट है कि साल की शुरुआत की तुलना में औद्योगिक गतिविधि काफी धीमी हो गई है।
इन देशों में गिरावट के पीछे मुख्य कारण हैं:
इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और औद्योगिक सामान के बड़े निर्यातक होने के कारण इन अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा लागत का असर ज्यादा पड़ता है।
मलेशिया की तस्वीर कुछ हद तक अलग दिखाई देती है।
देश की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत विविधीकृत है और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में उसकी मजबूत भूमिका है। इसके अलावा कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से LNG निर्यात से होने वाली आय मलेशिया के लिए आंशिक लाभ भी दे सकती है।
इसी वजह से, हॉर्मुज़ संकट से आपूर्ति बाधित होने के बावजूद मलेशिया की समग्र आर्थिक स्थिति कई क्षेत्रीय देशों की तुलना में अधिक स्थिर बनी हुई है।
इस भू‑राजनीतिक संकट का असर केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है—यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है।
विश्व बैंक के अनुसार पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि 2026 में 4.2% रहने की उम्मीद है, जबकि 2025 में यह 5.0% थी। इसके पीछे प्रमुख कारणों में ऊर्जा कीमतों का झटका और मध्य‑पूर्व संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता शामिल हैं।
एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भी चेतावनी दी है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो एशिया की आर्थिक वृद्धि और कम हो सकती है।
इन चुनौतियों के बावजूद दक्षिण‑पूर्व एशिया का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी तक व्यापक गिरावट में नहीं गया है।
इसका एक बड़ा कारण इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की मजबूत वैश्विक मांग है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और डिजिटल डिवाइस से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात कई ASEAN देशों में तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों में यही मांग ऊर्जा लागत और अन्य झटकों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर रही है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट ने दक्षिण‑पूर्व एशिया की मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था को गंभीर दबाव में डाल दिया है, लेकिन अभी तक यह पूर्ण औद्योगिक मंदी में नहीं बदला है।
अब तक दिखाई देने वाले प्रमुख प्रभाव हैं:
इंडोनेशिया और वियतनाम में गिरावट सबसे स्पष्ट दिख रही है, जबकि मलेशिया अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात अभी भी पूरे क्षेत्र के उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं।
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