उदाहरण के तौर पर, यूरोज़ोन में ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि ने वार्षिक महंगाई को लगभग 3% तक पहुंचाने में भूमिका निभाई, जिसमें ऊर्जा लागत में 10.9% की वृद्धि एक बड़ा कारण रही।
विश्व बैंक ने भी चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व का संघर्ष जारी रहता है तो 2026 में ऊर्जा कीमतें लगभग 24% तक बढ़ सकती हैं, और अन्य कमोडिटी की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।
क्योंकि ऊर्जा परिवहन, उद्योग, कृषि और बिजली उत्पादन जैसी लगभग हर आर्थिक गतिविधि की बुनियादी लागत का हिस्सा है, इसलिए इसके महंगे होने का असर पूरी अर्थव्यवस्था में फैल सकता है।
भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता का कारण है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष और होरमुज़ जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
RBI के अनुसार इसके असर कई माध्यमों से दिख सकते हैं:
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक यह देख रहा है कि क्या यह आपूर्ति झटका व्यापक कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बन रहा है। यदि महंगाई अस्थायी न रहकर स्थायी रूप लेती है तो नीति‑स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
हालांकि RBI का यह भी कहना है कि भारत की आर्थिक बुनियाद पहले की तुलना में अधिक मजबूत है, जिससे देश को ऐसे झटकों को संभालने में कुछ मदद मिल सकती है।
यूरोप की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यूरोपीय संघ ऊर्जा का बड़ा आयातक है। इसी वजह से ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल का असर वहां की अर्थव्यवस्था पर अधिक पड़ता है।
यूरोपीय आयोग के ताजा अनुमानों के अनुसार:
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर केवल ऊर्जा कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। बढ़ती लागत, अनिश्चितता और कमजोर मांग से निवेश, व्यापार और उपभोक्ता खर्च भी प्रभावित हो सकते हैं।
नीति‑निर्माताओं के लिए सबसे कठिन स्थिति वह होती है जब महंगाई बढ़ रही हो लेकिन आर्थिक वृद्धि कमजोर हो। यही स्टैगफ्लेशन की स्थिति कहलाती है।
ईरान से जुड़ा ऊर्जा संकट वही आर्थिक समीकरण पैदा कर सकता है जो इतिहास में बड़े ऊर्जा संकटों के समय देखा गया था—जहां लागत‑प्रेरित महंगाई और धीमी आर्थिक गतिविधि साथ‑साथ दिखाई देती हैं।
ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंकों के सामने मुश्किल विकल्प होते हैं:
इसी कारण कई केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार इस संकट का असर लगभग एक ही आर्थिक चैनल से गुजरता है:
ईरान संघर्ष → ऊर्जा आपूर्ति जोखिम → तेल कीमतों में वृद्धि → परिवहन और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी → महंगाई का दबाव → आर्थिक वृद्धि में कमी
भले ही संघर्ष भौगोलिक रूप से सीमित रहे, लेकिन यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। ऐसी स्थिति में महंगाई लंबे समय तक ऊंची रह सकती है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर दबाव बना रह सकता है। इसलिए कई विशेषज्ञ इसे आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम मान रहे हैं।
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