मेमोरी की किल्लत टेक बाज़ार के दोनों सिरों पर असर डाल रही है। डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को महंगे पुर्जों और सीमित सप्लाई का सामना है, जबकि स्मार्टफोन चिप की शिपमेंट कमजोर पड़ रही है—खासकर कम कीमत वाले फोन सेगमेंट में। दूसरी ओर, मेमोरी कंपनियों के शेयर भी गिरे हैं; निवेशक यह परख रहे हैं कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भविष्य में भी मौजूदा उम्मीदों को सहारा देगा या नहीं।
5
49
29
Apple के सामने बढ़ती लागत और सीमित सप्लाई
Apple के CEO जॉन टर्नस ने मेमोरी की मौजूदा कीमतों को “अभूतपूर्व” बताया और कहा कि दिसंबर तिमाही में कंपनी को मेमोरी के लिए और ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है। अब तक Apple ने पहले कम कीमत पर खरीदे गए मेमोरी स्टॉक, अन्य जगहों पर लागत घटाकर और कुछ उत्पादों के दाम बढ़ाकर इस दबाव को आंशिक रूप से संभाला है।
2
Apple ने दिसंबर तिमाही के लिए 45% से 46% ग्रॉस मार्जिन का अनुमान दिया है। सितंबर तिमाही में यह 47.9% था।
4 हालांकि इस तुलना में एक अहम बात है: Apple के मुताबिक सितंबर तिमाही के मार्जिन में टैरिफ रिफंड से लगभग एक प्रतिशत अंक का फायदा शामिल था। इसलिए अनुमानित गिरावट को केवल मेमोरी लागत से जोड़ना ठीक नहीं होगा।
16
कंपनी ने Mac और iPad समेत कुछ डिवाइसों की सप्लाई में भी बाधाओं की बात कही है।
7 नतीजों के बाद Apple के शेयर करीब 4% गिरे, क्योंकि निवेशकों का ध्यान लागत और मार्जिन के अनुमान पर था।
5
स्मार्टफोन बाज़ार में मांग की कमजोरी
Qualcomm ने हैंडसेट चिप से करीब 5.14 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया—साल-दर-साल 26% कम। स्मार्टफोन चिप की बिक्री वॉल स्ट्रीट के अनुमानों से भी कमजोर रही। रिपोर्टों ने इसकी वजह सुस्त मांग और Apple से जुड़ा घटता राजस्व बताई।
11
54 नतीजों के बाद कारोबार के विस्तारित घंटों में Qualcomm के शेयर 6% से ज्यादा गिरे; Reuters ने 5 नवंबर को प्रीमार्केट कारोबार में 10.1% की गिरावट दर्ज की।
17
54
बड़े बाज़ार का संकेत भी कमजोर है: तीसरी तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन प्रोसेसर शिपमेंट साल-दर-साल 21% घटे, और सबसे ज्यादा दबाव एंट्री-लेवल व मिड-रेंज फोन पर बताया गया।
49 ये आंकड़े प्रोसेसर की शिपमेंट मापते हैं—फोन की बिक्री या मेमोरी चिप की शिपमेंट नहीं। इससे हैंडसेट बाज़ार में दबाव का पता चलता है, लेकिन यह अपने आप साबित नहीं करता कि गिरावट की हर वजह मेमोरी की कीमतें ही थीं।
खरीदारों के लिए महंगे पुर्जों का मतलब महंगे डिवाइस या किफायती मॉडल के कम विकल्प हो सकते हैं। Apple के दाम बढ़ाने की रिपोर्ट एक उदाहरण है कि निर्माता लागत के कुछ हिस्से की भरपाई कैसे कर सकते हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टें यह नहीं बतातीं कि दूसरी कंपनियां भी कितनी लागत ग्राहकों पर डालेंगी।
2
कमी के बीच भी चिप शेयर क्यों गिरते हैं?
किसी चिप की कमी का मतलब यह नहीं कि उससे जुड़ी कंपनियों के शेयर हमेशा चढ़ेंगे। 5 नवंबर को Micron, SK hynix और अन्य मेमोरी या स्टोरेज कंपनियों के शेयर व्यापक चिप बिकवाली के दौरान गिरे।
29 बाज़ार की रिपोर्टों ने इस दबाव की एक वजह AI डेटा-सेंटर पर खर्च कितने समय तक तेज रहेगा, इसे लेकर निवेशकों की चिंता बताई। यह अहम है, क्योंकि निवेशक यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में सप्लायर कितनी मांग पर भरोसा कर सकते हैं।
17
20
इससे मेमोरी कंपनियों के सामने दो सवाल हैं: क्या सप्लाई AI की मांग के साथ कदम मिला पाएगी, और बढ़ती लागत के बीच उपभोक्ता डिवाइसों की मांग कितनी टिकेगी? ऊंची कीमतें सप्लायर के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन डिवाइस की कमजोर मांग या डेटा-सेंटर निवेश को लेकर संदेह शेयरों पर दबाव डाल सकता है।
20
29
Micron की ताइवान में 4.5 अरब डॉलर की प्रस्तावित मेमोरी फैक्टरी भी चर्चा में रही। Reuters के मुताबिक Bloomberg ने बताया कि कंपनी ने श्रम विवाद के कारण इस संयंत्र की योजना रोक दी है। Reuters ने कहा कि वह इस रिपोर्ट की तत्काल पुष्टि नहीं कर सका। इसलिए इसे प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी अपुष्ट खबर मानना चाहिए—Micron का मौजूदा उत्पादन बंद होने का प्रमाण नहीं।
18
कमी कितने समय तक रह सकती है?
SK hynix के CFO ने कहा कि मेमोरी की सप्लाई मांग से कम रहने का माहौल 2030 तक जारी रह सकता है। यह कंपनी का अनुमान है, तय समय-सीमा नहीं।
40 अलग रिपोर्टिंग के अनुसार, SK hynix ने 14 बड़े ग्राहकों के साथ ऐसे समझौते किए थे जो 2027 और 2028 की उसकी क्षमता के आधे से अधिक हिस्से को कवर करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि भविष्य के उत्पादन का बड़ा हिस्सा पहले ही तय हो चुका था।
36
व्यावहारिक तौर पर, खरीदारों को कीमत और उपलब्धता का दबाव जारी रह सकता है, हालांकि असर हर डिवाइस और कीमत-श्रेणी में एक जैसा नहीं होगा। प्रोसेसर शिपमेंट में गिरावट यह भी दिखाती है कि बढ़ती कीमतें मांग को चुनौती दे सकती हैं—खासकर स्मार्टफोन बाज़ार के उन हिस्सों में जहां खरीदार कीमत को लेकर ज्यादा संवेदनशील हैं।
49
53