सबसे बड़ा दबाव मेमोरी चिप्स पर है, खासकर DRAM और NAND फ्लैश पर। ये दोनों कंपोनेंट AI सर्वर और स्मार्टफोन—दोनों में इस्तेमाल होते हैं।
AI सिस्टम विशाल डेटा को प्रोसेस और स्टोर करने के लिए बहुत ज्यादा हाई‑स्पीड मेमोरी का उपयोग करते हैं। डेटा‑सेंटर से आने वाली मांग इतनी तेज़ी से बढ़ी है कि सप्लाई उसके साथ कदम नहीं मिला पा रही। नतीजतन मेमोरी की कीमतें बढ़ रही हैं।
स्मार्टफोन उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि DRAM और NAND फोन की बिल ऑफ मैटेरियल्स (BoM) लागत का बड़ा हिस्सा होते हैं। जब इनकी कीमत बढ़ती है, तो फोन बनाना भी महंगा हो जाता है। कुछ अनुमानों के अनुसार कम कीमत वाले स्मार्टफोन में कंपोनेंट लागत साल की शुरुआत से 20–30% तक बढ़ चुकी है।
जब मेमोरी चिप महंगी हो जाती हैं, तो स्मार्टफोन कंपनियों के सामने कुछ विकल्प होते हैं:
प्रीमियम ब्रांड—जैसे हाई‑एंड फ्लैगशिप फोन—अक्सर लागत सीधे ग्राहकों तक पहुंचा देते हैं। लेकिन बजट और मिड‑रेंज फोन के मार्जिन कम होते हैं, इसलिए इन पर लागत का असर ज्यादा पड़ता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह सप्लाई दबाव आने वाले समय में वैश्विक स्मार्टफोन उत्पादन को धीमा कर सकता है। Counterpoint Research के अनुसार 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट लगभग 2.1% घट सकते हैं क्योंकि बढ़ती मेमोरी कीमतें उत्पादन लागत बढ़ा रही हैं।
कुछ अन्य अनुमानों में गिरावट इससे भी ज्यादा बताई गई है, जो इस बात को दिखाता है कि बाजार का भविष्य अभी अनिश्चित है।
इसके साथ ही स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत (ASP) भी बढ़ सकती है क्योंकि निर्माता बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने की कोशिश करेंगे।
चिप की महंगाई का असर सभी स्मार्टफोन सेगमेंट पर एक जैसा नहीं होगा।
उभरते बाजार—जैसे भारत—जहां ग्राहक कीमत को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वहां असर और स्पष्ट हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार 2026 में बढ़ती RAM कीमतों और कमजोर मांग के कारण स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट के संकेत पहले से दिखाई दे रहे हैं।
यह स्थिति तकनीकी उद्योग में एक बड़े बदलाव को भी दिखाती है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर अब सेमीकंडक्टर मांग का प्रमुख चालक बन चुका है। निर्माता अधिक लाभ देने वाले सर्वर‑ग्रेड कंपोनेंट बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जब तक बड़ी टेक कंपनियां AI डेटा‑सेंटर में अरबों डॉलर का निवेश करती रहेंगी, तब तक DRAM और NAND जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट के लिए प्रतिस्पर्धा तेज बनी रह सकती है। इसका मतलब है कि AI बूम की कीमत आखिरकार उपभोक्ताओं को अपने रोज़मर्रा के उपकरण—जैसे स्मार्टफोन—की बढ़ती कीमतों के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
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