AI डेटा‑सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण मेमोरी चिप की मांग बढ़ गई है, जिससे स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ सकती है। हाइपरस्केलर कंपनियां बड़ी मात्रा में DRAM और NAND खरीद रही हैं, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सप्लाई कम पड़ रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट लगभग 2.1% तक घट...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How is the global AI boom causing a chip shortage that could raise smartphone prices, according to BT CEO Allison Kirkby, and what role do h. Article summary: The mechanism is: AI data-center buildouts are absorbing scarce advanced chips and memory capacity, leaving less DRAM/NAND and related semiconductor supply for consumer electronics; smartphone makers then face higher bil. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "BT has said that the cost of smartphones could rise as technology companies buy up semiconductor chips due to the boom in artificial" source context "BT warns of smartphone price rises due to chip…" Reference image 2: visual subject "BT has said that the cost of smartphones could rise as technology companies buy
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए बड़े‑बड़े डेटा‑सेंटर बनाए जा रहे हैं। लेकिन इस तेज़ विस्तार का असर अब आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है—खासकर स्मार्टफोन खरीदने वालों तक।
तकनीकी उद्योग के कई विशेषज्ञों का कहना है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दौड़ से सेमीकंडक्टर सप्लाई‑चेन पर भारी दबाव पड़ रहा है। BT Group की सीईओ एलिसन किर्कबी ने चेतावनी दी है कि डेटा‑सेंटर कंपनियां बड़ी मात्रा में चिप्स और मेमोरी खरीद रही हैं, जिससे चिप की कमी पैदा हो रही है और स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
आज की बड़ी क्लाउड कंपनियों—जिन्हें अक्सर हाइपरस्केलर कहा जाता है—AI मॉडल को ट्रेन और रन करने के लिए विशाल डेटा‑सेंटर बना रही हैं। इन सिस्टमों को हाई‑परफॉर्मेंस GPU, खास AI एक्सेलरेटर और बहुत बड़ी मात्रा में मेमोरी की जरूरत होती है।
सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता सीमित होती है। इसलिए जब AI कंपनियां बड़ी मात्रा में चिप्स खरीदती हैं, तो वही उत्पादन क्षमता स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य उपभोक्ता उपकरणों के लिए कम पड़ने लगती है। इससे पूरे टेक उद्योग में सप्लाई टाइट हो सकती है।
किर्कबी के अनुसार यह समस्या सिर्फ टेलीकॉम सेक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स—विशेषकर स्मार्टफोन—पर भी असर दिखने लगा है।
सबसे बड़ा दबाव मेमोरी चिप्स पर है, खासकर DRAM और NAND फ्लैश पर। ये दोनों कंपोनेंट AI सर्वर और स्मार्टफोन—दोनों में इस्तेमाल होते हैं।
AI सिस्टम विशाल डेटा को प्रोसेस और स्टोर करने के लिए बहुत ज्यादा हाई‑स्पीड मेमोरी का उपयोग करते हैं। डेटा‑सेंटर से आने वाली मांग इतनी तेज़ी से बढ़ी है कि सप्लाई उसके साथ कदम नहीं मिला पा रही। नतीजतन मेमोरी की कीमतें बढ़ रही हैं।
स्मार्टफोन उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि DRAM और NAND फोन की बिल ऑफ मैटेरियल्स (BoM) लागत का बड़ा हिस्सा होते हैं। जब इनकी कीमत बढ़ती है, तो फोन बनाना भी महंगा हो जाता है। कुछ अनुमानों के अनुसार कम कीमत वाले स्मार्टफोन में कंपोनेंट लागत साल की शुरुआत से 20–30% तक बढ़ चुकी है।
जब मेमोरी चिप महंगी हो जाती हैं, तो स्मार्टफोन कंपनियों के सामने कुछ विकल्प होते हैं:
प्रीमियम ब्रांड—जैसे हाई‑एंड फ्लैगशिप फोन—अक्सर लागत सीधे ग्राहकों तक पहुंचा देते हैं। लेकिन बजट और मिड‑रेंज फोन के मार्जिन कम होते हैं, इसलिए इन पर लागत का असर ज्यादा पड़ता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह सप्लाई दबाव आने वाले समय में वैश्विक स्मार्टफोन उत्पादन को धीमा कर सकता है। Counterpoint Research के अनुसार 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट लगभग 2.1% घट सकते हैं क्योंकि बढ़ती मेमोरी कीमतें उत्पादन लागत बढ़ा रही हैं।
कुछ अन्य अनुमानों में गिरावट इससे भी ज्यादा बताई गई है, जो इस बात को दिखाता है कि बाजार का भविष्य अभी अनिश्चित है।
इसके साथ ही स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत (ASP) भी बढ़ सकती है क्योंकि निर्माता बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने की कोशिश करेंगे।
चिप की महंगाई का असर सभी स्मार्टफोन सेगमेंट पर एक जैसा नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि $200 से कम कीमत वाले फोन सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
उभरते बाजार—जैसे भारत—जहां ग्राहक कीमत को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वहां असर और स्पष्ट हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार 2026 में बढ़ती RAM कीमतों और कमजोर मांग के कारण स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट के संकेत पहले से दिखाई दे रहे हैं।
यह स्थिति तकनीकी उद्योग में एक बड़े बदलाव को भी दिखाती है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर अब सेमीकंडक्टर मांग का प्रमुख चालक बन चुका है। निर्माता अधिक लाभ देने वाले सर्वर‑ग्रेड कंपोनेंट बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जब तक बड़ी टेक कंपनियां AI डेटा‑सेंटर में अरबों डॉलर का निवेश करती रहेंगी, तब तक DRAM और NAND जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट के लिए प्रतिस्पर्धा तेज बनी रह सकती है। इसका मतलब है कि AI बूम की कीमत आखिरकार उपभोक्ताओं को अपने रोज़मर्रा के उपकरण—जैसे स्मार्टफोन—की बढ़ती कीमतों के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
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AI डेटा‑सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण मेमोरी चिप की मांग बढ़ गई है, जिससे स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ सकती है।
AI डेटा‑सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण मेमोरी चिप की मांग बढ़ गई है, जिससे स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ सकती है। हाइपरस्केलर कंपनियां बड़ी मात्रा में DRAM और NAND खरीद रही हैं, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सप्लाई कम पड़ रही है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट लगभग 2.1% तक घट सकते हैं और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।