सालों तक, चीनी EV निर्माताओं ने कीमत के मोर्चे पर कड़ी टक्कर ली, यहां तक कि कुछ स्मार्ट EVs की कीमत 10,000 डॉलर (लगभग 8.5 लाख रुपये) से भी नीचे चली गई । लेकिन अब यह रणनीति अपनी धार खो रही है। जैसा कि ह्सियाओ कहते हैं, "कार निर्माताओं के लिए केवल नई EVs पेश करके खुद को अलग दिखाना मुश्किल होगा। ऐसा करने के लिए, उन्हें अपनी ऑटोनॉमस ड्राइविंग AI क्षमताओं को अपग्रेड करना होगा" ।
यह नया युद्धक्षेत्र अब इन-कार AI अनुभवों से लेकर उन्नत ड्राइविंग सहायता प्रणालियों तक सब कुछ समेटे हुए है। विसर्स 2026 की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि उपभोक्ताओं के शीर्ष ट्रेंडिंग कीवर्ड में से 80% अब अत्याधुनिक तकनीक—जैसे LiDAR (लेज़र आधारित सेंसिंग तकनीक), AI स्मार्ट केबिन और 800V सुपरचार्जिंग—से संबंधित हैं, न कि कीमत से ।
इस AI होड़ का सबसे तात्कालिक परिणाम लेवल 3 (L3) कंडीशनली ऑटोनॉमस ड्राइविंग को तेजी से अपनाना है। जहां आज का उद्योग मानक L2 या L2+ पर अटका हुआ है, वहीं ह्सियाओ को उम्मीद है कि L3 "जल्द ही एक आम मानक बन सकता है" ।
L3 के तहत, वाहन हाईवे ड्राइविंग जैसी विशेष परिस्थितियों में ड्राइविंग के सभी कार्य स्वयं संभालता है, हालांकि जरूरत पड़ने पर मानव चालक को नियंत्रण लेने के लिए तैयार रहना होता है। यह मौजूदा सिस्टम से एक बड़ी छलांग है जिनमें लगातार चालक की निगरानी की आवश्यकता होती है।
कार निर्माता पहले से ही L3 से आगे की सोच रहे हैं। मिसाल के तौर पर, BYD ने खुद से डिजाइन की गई एक 4nm इंटेलिजेंट ड्राइविंग चिप विकसित की है जो L3 और L4 ऑटोनॉमी दोनों को सपोर्ट करती है—L4 में कार परिभाषित परिस्थितियों में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के चल सकती है। कंपनी ने "शून्य सड़क दुर्घटनाओं" की खोज के लिए अनुसंधान और विकास में 100 अरब युआन (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है ।
मॉर्गन स्टैनली का व्यापक विश्लेषण वैश्विक ऑटोनॉमस ड्राइविंग के लिए एक क्रांतिकारी तस्वीर पेश करता है। बैंक का अनुमान है कि 2030 तक सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों का बाजार 200 अरब डॉलर का हो जाएगा, और इसके केंद्र में चीन होगा। वैश्विक स्तर पर 2030 तक बिकने वाले लगभग 30% वाहनों में लेवल 2+ स्मार्ट ड्राइविंग फीचर्स होने की उम्मीद है—और अनुमान है कि इनमें से 60% वाहन चीन में होंगे ।
अधिक ठोस शब्दों में कहें तो, 2030 तक चीन में लगभग 60% पैसेंजर कारों में स्मार्ट ड्राइविंग फंक्शन होने चाहिए, जो कि 2025 के अनुमानित 60 लाख यूनिट से बढ़कर 1.5 करोड़ यूनिट तक की बिक्री दर्शाता है । ह्सियाओ कहते हैं, "2030 तक मात्रा के हिसाब से चीन के वैश्विक स्मार्ट-ड्राइविंग बाजार में आधी हिस्सेदारी होने की संभावना है" ।
रोबोटैक्सी एक और नई सीमा है। अनुमान है कि पूरी तरह से स्वचालित टैक्सियां पांच वर्षों के भीतर चीन के कुल टैक्सी और राइड-शेयरिंग बेड़े का 8% हिस्सा बन जाएंगी, जो कुल मिलाकर लगभग 3,60,000 यूनिट होंगी । इस बीच, शाओपेंग (Xpeng) जैसे प्रतिस्पर्धी टेस्ला (Tesla) की फुल सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक के साथ तेजी से अंतर पाट रहे हैं, और हालिया परीक्षणों के दौरान सुधार की रफ्तार देखकर मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषक भी हैरान रह गए ।
मूल्य प्रतिस्पर्धा से AI विभेदीकरण की ओर यह बदलाव चीन के EV क्षेत्र के परिपक्व होने का संकेत है। जहां पहले निर्माता इस बात पर प्रतिस्पर्धा करते थे कि कौन सबसे कम कीमत की पेशकश कर सकता है, अब वे इस पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं कि कौन सबसे भरोसेमंद ऑटोनॉमस ड्राइविंग अनुभव और सबसे स्मार्ट इन-कार AI दे सकता है। इस दौड़ के विजेताओं का फैसला अब उत्पादन पैमाने या सब्सिडी हासिल करने की क्षमता से नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, चिप डिजाइन और वास्तविक दुनिया में ऑटोनॉमस ड्राइविंग के प्रदर्शन से होगा।