इन मामलों में एआई को फिल्मकारों के लिए एक दक्षता बढ़ाने वाले टूल के रूप में देखा जा रहा है, न कि निर्देशक, लेखक, अभिनेता या संपादक का विकल्प ।
हालाँकि एआई का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन कान्स फिल्म फेस्टिवल अपने सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में मानव रचनात्मकता की रक्षा करना चाहता है। रिपोर्टों के अनुसार, जिन फिल्मों में जेनरेटिव एआई “principal authoring tool” यानी मुख्य रचनात्मक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया हो, वे पाल्मे द’ओर और आधिकारिक प्रतियोगिता के लिए पात्र नहीं होंगी ।
इसमें ऐसे मामलों को शामिल किया गया है जहाँ:
इस नीति का मतलब है कि कान्स एआई‑सहायता प्राप्त फिल्म निर्माण और एआई‑द्वारा निर्मित फिल्म निर्माण के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहता है।
एआई को लेकर फिल्म उद्योग में बहस अभी खत्म नहीं हुई है।
समर्थकों का कहना है कि एआई फिल्म निर्माण को अधिक लोकतांत्रिक बना सकता है। कम बजट वाले फिल्मकार भी अब बड़े पैमाने के दृश्य और विचार साकार कर सकते हैं। साथ ही, तकनीकी और दोहराए जाने वाले कामों को स्वचालित करके कलाकारों को कहानी और रचनात्मकता पर ध्यान देने का ज्यादा समय मिल सकता है ।
आलोचक अलग चिंता जताते हैं। उनका कहना है कि जेनरेटिव टूल्स कलाकारों की शैली की नकल कर सकते हैं, विज़ुअल इफेक्ट्स और पोस्ट‑प्रोडक्शन में नौकरियों को प्रभावित कर सकते हैं, और मानव प्रदर्शन तथा डिजिटल छवियों के बीच की सीमा धुंधली कर सकते हैं ।
इन सभी बदलावों को देखते हुए फिल्म उद्योग में एक तरह की दोहरी दिशा बनती दिखाई दे रही है।
एक तरफ व्यावसायिक और स्वतंत्र फिल्मकार एआई का उपयोग तेजी से अपना रहे हैं—खासकर वहाँ जहाँ इससे समय और पैसा बचता है। दूसरी तरफ कान्स जैसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोह नियम बनाकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सिनेमा की मूल रचनात्मकता इंसानों के हाथ में ही रहे।
फिलहाल उद्योग इसी समझौते की ओर बढ़ता दिख रहा है: एआई एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है, लेकिन अंतिम रचनात्मक आवाज़ मानव की ही रहनी चाहिए।
Comments
0 comments