नया लैपटॉप देखते समय सिर्फ कीमत बढ़ने पर ध्यान देना काफी नहीं होगा। संभव है कि उसी बजट में मिलने वाले मॉडल की रैम, स्टोरेज या स्क्रीन भी बदल गई हो। मेमोरी चिप की इस कमी को ‘RAMageddon’ कहा जा रहा है: AI डेटा सेंटरों की मांग बढ़ रही है और आपूर्तिकर्ता अधिक मूल्य वाले मेमोरी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका दबाव लैपटॉप और फोन बनाने वाली कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है।
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भारत के बजट लैपटॉप पर असर
क्वालकॉम के अधिकारी केदार कोंडप के मुताबिक, मेमोरी और स्टोरेज महंगे होने से निर्माताओं के लिए लैपटॉप की सही कीमत तय करना मुश्किल हो गया है। उनके अनुसार, तय कीमत के भीतर उत्पाद रखने के लिए कंपनियां दूसरे पुर्जे बदल रही हैं—मिसाल के तौर पर OLED की जगह LCD स्क्रीन चुन रही हैं।
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कम कीमत वाले मॉडल में यह समझौता ज्यादा मायने रखता है। लागत बढ़ने पर निर्माता कीमत बढ़ा सकता है या रैम और स्क्रीन जैसी सुविधाओं में कटौती कर शुरुआती कीमत बनाए रख सकता है। इसलिए दो लैपटॉप की तुलना करते समय केवल प्रोसेसर या विज्ञापन में दिख रही शुरुआती कीमत नहीं, पूरा स्पेसिफिकेशन देखें। क्वालकॉम की Snapdragon C श्रृंखला को कम कीमत वाले लैपटॉप तक पहुंचने की कोशिश के रूप में भी रिपोर्ट किया गया है; रिपोर्ट में आया 300 डॉलर का लक्ष्य किसी तैयार लैपटॉप की गारंटीकृत कीमत नहीं है।
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फोन भी इससे अछूते नहीं हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में कई स्मार्टफोन ब्रांड ने कुछ मॉडलों की कीमतें बढ़ाई हैं, हालांकि बढ़ोतरी हर मॉडल में अलग है।
12 अमेरिका में iPhone 18 Pro और Pro Max की शुरुआती कीमतें पिछले मॉडलों से 100 डॉलर अधिक रहीं। मेमोरी लागत एक अहम दबाव है, लेकिन पूरी खुदरा बढ़ोतरी का कारण अकेले उसी को नहीं माना जा सकता।
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AI की मांग से सामान्य मेमोरी क्यों प्रभावित होती है?
AI प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी यानी HBM और दूसरे अधिक मूल्य वाले उत्पाद उत्पादन क्षमता तथा निवेश खींच रहे हैं। TrendForce के अनुसार, बड़े आपूर्तिकर्ता HBM और उन्नत 3D NAND को प्राथमिकता दे रहे हैं। संस्था का अनुमान है कि 2027 में सामान्य DRAM की मांग, उसकी आपूर्ति में विस्तार से आगे निकल सकती है। DRAM लैपटॉप और फोन की काम करने वाली मेमोरी है, जबकि NAND डेटा स्टोरेज में इस्तेमाल होती है—इसलिए दबाव उपकरण की लागत के एक से अधिक हिस्सों पर पड़ सकता है।
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दबाव दूसरी तरह की मेमोरी चिप तक भी पहुंचा है। TrendForce के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, अधिक क्षमता वाली NOR Flash चिप की कीमत 2026 की पहली छमाही में अनुमानित 100–120% बढ़ी। TrendForce ने दूसरी छमाही में इसी श्रेणी के लिए और 90–110% बढ़ोतरी का अनुमान दिया है। ये चिप की कीमतों के आंकड़े हैं, तैयार लैपटॉप या फोन की कीमतों में इतनी ही बढ़ोतरी का अनुमान नहीं; अलग-अलग NOR उत्पादों के रुझान भी अलग हैं।
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कमी कब दूर होगी, इस पर सहमति नहीं है। TrendForce को 2027 में भी DRAM की आपूर्ति तंग रहने की आशंका है। माइक्रॉन के एक अधिकारी का हवाला देने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, नए उत्पादन से उल्लेखनीय आपूर्ति 2028 तक न आए। दूसरी ओर, एसर के मुख्य कार्यकारी ने इस धारणा को खारिज किया है कि कमी अनिवार्य रूप से 2030 तक चलेगी। ये आकलन हैं, पक्की समयसीमा नहीं।
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अमेरिकी आयात शुल्क से क्या बदल सकता है?
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन घरेलू निवेश बढ़ाने के लिए आयातित मेमोरी चिप पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन अमेरिका में मौजूदा उत्पादन क्षमता सीमित होने के कारण, पर्याप्त घरेलू आपूर्ति आने से पहले ऐसा शुल्क एशियाई कारखानों से चिप खरीदने वाली कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है। प्रस्ताव की अंतिम शर्तें और खुदरा कीमतों पर उसका असर अभी अनिश्चित हैं।
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खरीदार के लिए सवाल सीधा है: क्या पुराने बजट में अब भी उतनी ही रैम, स्टोरेज और वैसी ही स्क्रीन मिल रही है? निर्माताओं के लिए भी सस्ता प्रोसेसर या भविष्य में बनने वाला कारखाना आज की मेमोरी आपूर्ति की कमी तुरंत दूर नहीं करता।
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