इसी प्रदर्शन के आधार पर बैंक ने अपने अगले लक्ष्य तय किए हैं:
इस रणनीति का एक अहम हिस्सा लागत और संरचना को अधिक कुशल बनाना है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने कहा है कि वह 2030 तक कॉर्पोरेट और सपोर्ट फंक्शन की 15% से अधिक भूमिकाएँ घटाएगा।
ये कटौती मुख्यतः बैक‑ऑफिस और प्रशासनिक क्षेत्रों में होगी। बैंक का कहना है कि इसका उद्देश्य सिर्फ कर्मचारियों की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि काम करने के तरीके को तकनीक‑आधारित बनाना है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का मानना है कि तकनीक उसके अगले विकास चरण का मुख्य आधार होगी। बैंक कई क्षेत्रों में तकनीक का विस्तार कर रहा है, जैसे:
इन उपकरणों से बैंक के आंतरिक वर्कफ़्लो तेज होंगे, जोखिम प्रबंधन बेहतर होगा और ग्राहकों को सेवाएँ अधिक कुशल तरीके से दी जा सकेंगी। साथ ही सपोर्ट कार्यों में मैनुअल काम कम होगा।
लागत कम करना ही रणनीति का एक हिस्सा है। बैंक का दूसरा बड़ा लक्ष्य उन व्यवसायों को बढ़ाना है जिनमें मुनाफा अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।
प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की भौगोलिक मौजूदगी मुख्य रूप से एशिया, मध्य‑पूर्व और अफ्रीका में है। बैंक का मानना है कि इन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रवाह से उसकी क्रॉस‑बॉर्डर बैंकिंग विशेषज्ञता को फायदा मिलेगा।
नई रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब बैंक का वित्तीय प्रदर्शन बेहतर रहा है। प्रमुख संकेतक इस प्रकार हैं:
बैंक के निवेशक प्रेजेंटेशन में यह भी बताया गया कि उसकी 2024‑2026 की रणनीतिक योजना के कई लक्ष्य अपेक्षा से पहले पूरे हो गए थे।
रणनीति के क्रियान्वयन के साथ नेतृत्व स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं।
बैंक की योजना दो मोर्चों पर सफलता पर निर्भर करती है:
अगर दोनों मोर्चों पर लक्ष्य पूरे होते हैं, तो स्टैंडर्ड चार्टर्ड को उम्मीद है कि वह 2028 तक 15% से अधिक और 2030 तक लगभग 18% RoTE हासिल कर सकता है।
हालांकि अंतिम परिणाम वैश्विक आर्थिक स्थिति, क्रेडिट जोखिम और बैंक के प्रमुख बाजारों की वृद्धि पर भी निर्भर करेगा। आने वाले कुछ साल यह तय करेंगे कि तकनीक‑आधारित दक्षता और रणनीतिक फोकस वास्तव में बैंक को लगातार उच्च‑रिटर्न देने वाली संस्था में बदल पाते हैं या नहीं।
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