इस तरह Spotify का लक्ष्य है कि यूज़र ऐप में केवल ब्राउज़ न करें, बल्कि AI सहायक से बातचीत करते हुए संगीत खोजें।
Spotify ऑडियोबुक इंडस्ट्री में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।
कंपनी ने AI वॉइस स्टार्टअप ElevenLabs के साथ साझेदारी की है, जिसके बाद प्लेटफ़ॉर्म पर AI‑नैरेटेड ऑडियोबुक स्वीकार किए जाने लगे हैं। साथ ही, Spotify ने Spotify for Authors के अंदर एक AI टूल भी शुरू किया है जिससे लेखक अपनी किताबों को ऑडियोबुक के रूप में प्रकाशित कर सकते हैं।
AI नैरेशन का सबसे बड़ा फायदा लागत में कमी है। पारंपरिक ऑडियोबुक रिकॉर्ड करना महँगा होता है, जबकि AI आवाज़ इसे बहुत सस्ता बना सकती है।
ElevenLabs की तकनीक से लेखक कई भाषाओं में और अलग‑अलग टोन या शैली में आवाज़ तैयार कर सकते हैं, जिससे उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा लचीली हो जाती है।
Spotify के लिए इसका मतलब है—प्लेटफ़ॉर्म पर ऑडियोबुक की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
Spotify अब म्यूज़िक क्रिएशन में भी AI को शामिल करना चाहता है।
2026 में कंपनी ने Universal Music Group (UMG) के साथ एक लाइसेंसिंग समझौता किया। इसके तहत Spotify प्रीमियम यूज़र AI की मदद से अपने पसंदीदा गानों के कवर और रीमिक्स बना सकेंगे।
यह टूल जनरेटिव AI का उपयोग करेगा, लेकिन इसमें कलाकारों और अधिकार धारकों के लिए क्रेडिट और राजस्व‑शेयरिंग की व्यवस्था भी होगी।
यह पहल पहली बार बड़े पैमाने पर किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म के लाइसेंस्ड कैटलॉग में जनरेटिव म्यूज़िक टूल को शामिल करती है। इससे श्रोताओं को केवल सुनने वाले नहीं बल्कि संगीत निर्माण में भाग लेने वाले उपयोगकर्ता के रूप में देखा जा रहा है।
Spotify ने प्रयोग के तौर पर कुछ AI‑जनरेटेड ऑडियो फ़ॉर्मेट भी लॉन्च किए हैं। उदाहरण के लिए, कंपनी ने Spotify Wrapped के लिए एक AI‑जनरेटेड पॉडकास्ट रिकैप पेश किया, जिसमें दो AI होस्ट उपयोगकर्ता की सुनने की आदतों का सार बताते हैं।
ऐसे प्रयोग दिखाते हैं कि कंपनी भविष्य में हर यूज़र के लिए कस्टम ऑडियो कंटेंट तैयार करने की दिशा में काम कर रही है—जहाँ पारंपरिक पॉडकास्ट या रेडियो की जगह अधिक व्यक्तिगत अनुभव मिल सकता है।
Spotify की AI रणनीति को लेकर कई विशेषज्ञों और यूज़रों ने चिंता भी जताई है।
सबसे बड़ा मुद्दा है ऐप की जटिलता। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि Spotify इतनी तेज़ी से नए फीचर जोड़ रहा है कि ऐप का इंटरफ़ेस भारी और उलझा हुआ लगने लगा है।
दूसरी चिंता है कि अगर प्लेटफ़ॉर्म पर AI‑जनरेटेड गाने, पॉडकास्ट और ऑडियोबुक की संख्या बहुत बढ़ गई, तो सिफारिश एल्गोरिदम सस्ते सिंथेटिक कंटेंट से भर सकते हैं। इससे असली कलाकारों के लिए दिखना और भी कठिन हो सकता है।
कुछ उपयोगकर्ताओं का यह भी कहना है कि ऐप में पहले से ही बहुत अधिक सुझाव, प्रमोशन और अलग‑अलग प्रकार का कंटेंट दिखाई देता है, जिससे सीधे म्यूज़िक तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है।
Spotify का AI दांव इस विचार पर आधारित है कि भविष्य के मीडिया प्लेटफ़ॉर्म केवल कंटेंट वितरित नहीं करेंगे—वे रचनात्मक भागीदारी और व्यक्तिगत अनुभव भी देंगे।
एक तरफ AI टूल्स नए रचनात्मक फ़ॉर्मेट खोल सकते हैं, उत्पादन लागत घटा सकते हैं और श्रोताओं को ज्यादा इंटरैक्टिव अनुभव दे सकते हैं। दूसरी तरफ, अगर बहुत ज्यादा फीचर जुड़ते गए तो वही चीज़ खतरे में पड़ सकती है जिसने Spotify को लोकप्रिय बनाया था—सरल तरीके से नया संगीत खोजने का अनुभव।
आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि Spotify वास्तव में सफल “everything‑audio” प्लेटफ़ॉर्म बन पाता है या फीचर‑ओवरलोड से जूझता हुआ ऐप बन जाता है।
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