प्रस्तावित सुविधा AI, रोबोटिक्स और प्रयोग के दौरान ही माप लेने वाली तकनीक को एक खुले, स्वचालित प्रयोगशाला ढांचे में जोड़ेगी। यह केवल प्रकाशित शोध-आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि खुद ऐसे प्रयोगात्मक आंकड़े तैयार करेगी जिनसे पता चलेगा कि अलग-अलग synthesis conditions—यानी सामग्री बनाने की परिस्थितियां—वास्तविक प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करती हैं। फिर इन परिणामों से AI मॉडल सुधरेंगे और अगले प्रयोगों का चयन किया जाएगा। इस तरह भविष्यवाणी और भौतिक परीक्षण के बीच लगातार feedback loop बनेगा।
प्रोजेक्ट के घोषित लक्ष्यों में बड़ी संख्या में प्रयोग करना और ऐसी व्यावहारिक, दोहराई जा सकने वाली synthesis recipes तैयार करना शामिल है। संभावित क्षेत्रों में silicon से आगे की या quantum सामग्री, स्वच्छ हाइड्रोजन से जुड़े electrocatalysts और जंग-रोधी कोटिंग्स शामिल हैं। यानी इसका लक्ष्य केवल AI द्वारा सुझाए गए compounds की सूची बनाना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि promising सामग्री को वास्तव में कैसे बनाया और परखा जा सकता है।
एक अलग S$10 मिलियन कार्यक्रम A*STAR और Imperial के नेतृत्व में चलाया जाएगा। इसमें Surface Science Foundation Model और एक cloud platform विकसित करने की योजना है, जो कैटेलिस्ट के गुणों और उन्हें बनाने की परिस्थितियों का अनुमान लगा सके। शोध का संबंध स्वच्छ ईंधन, carbon dioxide से बने feedstocks और जैव-आधारित रसायनों जैसे क्षेत्रों से है।
कार्यक्रम के विवरण में computational screening को 500 गुना तेज करने का लक्ष्य बताया गया है। यह कंप्यूटर पर संभावित विकल्पों को छांटने की गति का लक्ष्य है—इसका अर्थ यह नहीं कि कोई तैयार ईंधन या रासायनिक प्रक्रिया 500 गुना जल्दी बाजार में आ जाएगी। इसी तरह, “लगभग पांच गुना तेज और सस्ता” जैसे दावों को सावधानी से पढ़ना चाहिए, जब तक यह स्पष्ट न हो कि वे किसी अलग downstream metric पर आधारित हैं। असली कसौटी यह होगी कि कंप्यूटर द्वारा चुने गए कैटेलिस्ट प्रयोगों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं या नहीं और उनसे व्यवहार्य औद्योगिक प्रक्रिया बन सकती है या नहीं।
AI4S में सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता को भी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग शोध की समस्या माना गया है। NUS और Imperial ऐसे program-reasoning tools विकसित कर रहे हैं जो कोड का विश्लेषण और परीक्षण कर सकें, उसके कुछ गुणों का formal verification कर सकें और जहां संभव हो, correctness साबित कर सकें। इनका परीक्षण network protocols और Linux kernel के components जैसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर किया जाना है।
एक संभावित उपयोग यह है कि एक AI सिस्टम दूसरे AI सिस्टम द्वारा लिखे गए कोड का audit करे। इससे AI-assisted programming अधिक भरोसेमंद हो सकती है। फिर भी automated analysis को सुरक्षा की सार्वभौमिक गारंटी नहीं समझना चाहिए। Formal methods तय assumptions के भीतर कुछ विशिष्ट गुणों को साबित कर सकते हैं; व्यापक विश्वसनीयता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि specifications, tests और वह पूरा system कितना अच्छा है जिसमें कोड इस्तेमाल होगा।
बायोमेडिसिन के क्षेत्र में AI4S के कुछ प्रोजेक्ट उन आंकड़ों को एक साथ देखने की कोशिश करेंगे जिन्हें शोधकर्ता अक्सर अलग-अलग विश्लेषित करते हैं।
NUS और A*STAR का MultiOmicsFM प्रोजेक्ट Singapore के multi-ethnic datasets से DNA, RNA और gene activity से जुड़े आंकड़ों को एक foundation model में जोड़ने की योजना रखता है। इसके शोध-लक्ष्यों में बीमारी के जोखिम का अध्ययन और mRNA therapies के design तथा delivery में सुधार शामिल हैं।
दूसरी ओर, BloodCounts! प्रोजेक्ट complete blood-count tests के सभी raw parameters को blood-smear images के साथ मिलाकर DeepCBC मॉडल विकसित करेगा। उद्देश्य एक आम रक्त-जांच से अधिक diagnostic information निकालना और यह जांचना है कि संयुक्त आंकड़े stroke तथा cancer जैसी स्थितियों से जुड़े जोखिमों का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं या नहीं।
यह अभी संभावित शोध-उपयोग है, यह दावा नहीं कि routine blood test आज ही इन बीमारियों का निदान कर सकता है। किसी भी clinical use से पहले model validation, regulatory review और अलग-अलग आबादी तथा स्वास्थ्य-सेवा परिस्थितियों में विश्वसनीय प्रदर्शन का प्रमाण आवश्यक होगा।
एक अन्य प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्व एशिया की कृषि भूमि के लिए knowledge-guided agricultural digital twins विकसित करेगा। Digital twin किसी खेत या कृषि-प्रणाली का ऐसा virtual representation होता है, जिसमें वास्तविक आंकड़ों को crop science के सिद्धांतों के साथ जोड़ा जाता है। इससे planting, संसाधनों के इस्तेमाल और supply chains के लिए forecasts तथा decision tools तैयार करने का लक्ष्य है।
वैज्ञानिक ज्ञान को मॉडल में शामिल करने पर जोर महत्वपूर्ण है। Agronomic constraints को समझने वाला digital twin किसी opaque prediction की तुलना में अधिक interpretable और चुनौती देने योग्य हो सकता है। हालांकि, इसकी उपयोगिता फिर भी underlying data की गुणवत्ता, coverage और समय पर उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
आठ प्रोजेक्ट्स के इस portfolio में energy transport को बेहतर बनाने के लिए AI-designed interfaces भी शामिल हैं। कुल मिलाकर ये पहल materials, computing, genomics, health, energy, agriculture और climate resilience जैसे कई क्षेत्रों में फैली है, किसी एक commercial sector तक सीमित नहीं।
इन सभी प्रोजेक्ट्स में एक साझा operating model दिखाई देता है:
Materials Data Foundry इस closed loop को सबसे स्पष्ट रूप से दिखाता है, क्योंकि इसे AI predictions को automated synthesis और measurement से सीधे जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। यही सोच catalyst screening, software verification और biomedical modelling में भी दिखाई देती है: तेज prediction तभी मूल्यवान है, जब वह भरोसेमंद evidence तक पहुंचे।
यह पहल केवल research funding नहीं, बल्कि talent और infrastructure strategy भी है। NRF ने AI4S को AI researchers और materials science, life science तथा quantum science जैसे क्षेत्रों के वैज्ञानिकों के सहयोग के रूप में आगे बढ़ाया है। महत्वाकांक्षा ऐसे “bilingual” researchers तैयार करने की है, जो computational methods और उन वास्तविक वैज्ञानिक समस्याओं—दोनों को समझते हों, जिन पर ये methods लागू किए जाते हैं।
इन प्रोजेक्ट्स में Singapore के NUS, NTU और A*STAR जैसे संस्थान University of Toronto, Imperial College London, University of Cambridge और Kyoto University जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम कर रहे हैं। Imperial के दोनों कार्यक्रम CREATE campus स्थित Imperial Global Singapore के माध्यम से चलाए जाएंगे, जहां अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग और पहुंच पर जोर है।
इस ढांचे से सिंगापुर AI-आधारित शोध में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है: चुनौती-आधारित प्रोजेक्ट्स को वित्तपोषित करना, साझा प्रयोगात्मक और digital infrastructure बनाना, वैश्विक सहयोगियों को आकर्षित करना और ऐसे शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करना जो AI models और laboratories के बीच प्रभावी संवाद कर सकें।
AI4S का मूल्यांकन इस आधार पर कम होगा कि उसके models ने कितनी predictions बनाईं और इस आधार पर अधिक होगा कि उनमें से कितने परिणाम वास्तविक दुनिया की कसौटी पर खरे उतरते हैं। संभावित मजबूत नतीजों में शामिल होंगे:
सिंगापुर का S$120 मिलियन का यह कार्यक्रम AI को प्रयोगों, verification और domain expertise से जोड़ने पर दांव लगा रहा है। इससे वैज्ञानिक खोज अधिक व्यवस्थित हो सकती है और idea से prototype तक पहुंचने का समय घट सकता है। लेकिन केंद्रीय सवाल अभी खुला है: क्या ये आठ शोध-प्रोजेक्ट AI की promising predictions को scalable, सुरक्षित और उपयोगी तकनीकों में बदल पाएंगे?