रूस की 2026 राजकोषीय योजना पर युद्ध-संबंधी खर्च का दबाव तेजी से बढ़ा है। वित्त मंत्री एंतोन सिलुआनोव का कहना है कि संघीय बजट घाटा GDP के 3% के भीतर रहेगा। यह बजट कानून में तय 1.6% GDP के लक्ष्य से लगभग दोगुना है। जनवरी-अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि मूल योजना कितनी जल्दी पीछे छूट गई।
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मूल वार्षिक लक्ष्य से ऊपर पहुंच चुका है घाटा
जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान रूस का संघीय बजट घाटा 5.8 ट्रिलियन रूबल, यानी GDP का 2.5%, रहा। यह पूरे साल के लिए रखे गए मूल लक्ष्य—3.8 ट्रिलियन रूबल या GDP के 1.6%—से अधिक है। इस अवधि में संघीय खर्च सालाना आधार पर 14.7% बढ़ा, जबकि राजस्व में 9.2% वृद्धि हुई। यानी खर्च की रफ्तार आय से तेज रही।
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अगस्त में अकेले 660 अरब रूबल का अधिशेष दर्ज हुआ, जो एक वर्ष का सबसे बड़ा मासिक अधिशेष था। इसका मुख्य कारण बड़ी सरकारी बैंकों और कंपनियों द्वारा पिछले वर्ष के मुनाफे पर दिए गए लाभांश थे; ब्लूमबर्ग के अनुसार, इन लाभांशों से बजट को 691 अरब रूबल मिले। यह नकदी प्रवाह के लिहाज से अहम है, लेकिन यह एकमुश्त राजस्व प्रभाव है—संचित घाटा खत्म होने का संकेत नहीं।
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इससे पहले सरकारी बजट पोर्टल के आंकड़ों से भी संकेत मिला था कि 2026 में खर्च योजना से ऊपर जा सकता है, जबकि राजस्व अनुमान अपरिवर्तित रह सकता है। ऐसी स्थिति में नियोजित रूबल घाटा 1 ट्रिलियन रूबल से अधिक बढ़ सकता था।
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सैन्य खर्च बजट की गुंजाइश समेट रहा है
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स द्वारा रूसी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में सैन्य खर्च 10.7 ट्रिलियन रूबल रहा। यह 2025 की समान अवधि से 30% अधिक है। यह रकम 2026 के अनुमानित पूर्ण-वर्ष GDP के 4.7% और पहली छमाही के GDP के 10.5% के बराबर थी।
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तुलना के लिए, रूस के 2026 बजट में सैन्य खर्च के लिए 14.9 ट्रिलियन रूबल, यानी GDP का 6.3%, नियोजित था। इस हिसाब से पहली छमाही का खर्च ही पूर्ण-वर्षीय योजना का लगभग 72% पहुंच गया।
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युद्ध-पूर्व स्तर की तुलना और भी तीखी है: इसी बजट डेटा पर आधारित रिपोर्टिंग के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में सैन्य खर्च 2021 के स्तर से पांच गुना से अधिक था।
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इन आंकड़ों से अंतिम वार्षिक सैन्य व्यय निश्चित नहीं हो जाता। लेकिन ये समझाते हैं कि सरकार नागरिक खर्च पर रोक क्यों लगा रही है। रक्षा और सुरक्षा की जरूरतें अनुमान से तेजी से बढ़ें तो उनके लिए नकदी बचाने का सबसे त्वरित तरीका गैर-जरूरी या विवेकाधीन नागरिक भुगतान टालना होता है। अगस्त की रिपोर्टों में कहा गया कि वित्तीय कमी और बढ़ते घाटे के बीच एजेंसियों को गैर-आवश्यक खर्च स्थगित करने को कहा गया।
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घाटे की भरपाई कैसे होगी
सिलुआनोव ने कहा है कि बजट लागू होने के दौरान अतिरिक्त वित्तपोषण और खर्च की जरूरतें सामने आईं, जिनके लिए अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराए जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार जमा खाते के शेष धन का उपयोग करेगी और घरेलू ऋण बाजार से उधार लेगी।
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कर नीति भी इसी जवाब का हिस्सा है। सैन्य कार्रवाई के वित्तपोषण और घाटे को काबू में रखने के प्रयास में रूस ने 2026 में कर बढ़ाए, जिनमें वर्ष की शुरुआत से वैट को बढ़ाकर 22% करना शामिल है।
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वित्त मंत्रालय कंपनियों द्वारा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और ड्रोन हमलों से हुए नुकसान की मरम्मत पर आने वाले खर्च को कर कानून में शामिल करने के लिए बदलाव भी तैयार कर रहा है। इससे पता चलता है कि युद्ध का वित्तीय असर केवल प्रत्यक्ष सैन्य आवंटन तक सीमित नहीं है; घरेलू परिसंपत्तियों की सुरक्षा और पुनर्निर्माण भी बजट तथा कर नीति का प्रश्न बन रहे हैं।
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नागरिक कार्यक्रमों के सामने कठिन विकल्प
दबाव खर्च की प्राथमिकता तय करने में साफ दिखता है। नागरिक कार्यक्रमों के भुगतान टालने से सरकार की जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होतीं, केवल उनका भुगतान बाद में होता है। लेकिन इससे क्रेमलिन को कर बढ़ाने और उधारी जुटाने के दौरान निकट अवधि के संसाधन रक्षा, सुरक्षा और युद्ध-संबंधी जरूरतों की ओर मोड़ने की सुविधा मिलती है।
तनाव केवल सामान्य बजट प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। अगस्त के अंत में पुतिन ने एक डिक्री जारी की, जिसके तहत यदि मालिक महत्वपूर्ण अवसंरचना को—ड्रोन हमलों समेत—पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं रख पाते, तो उसे बाहरी प्रबंधन को सौंपा जा सकता है। कार्नेगी के विश्लेषण के मुताबिक, यह तंत्र परिसंपत्तियों के पुनर्वितरण का रास्ता भी बना सकता है।
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नागरिक खर्च को टालना, कर बढ़ाना, उधारी लेना, अवसंरचना सुरक्षा की लागत और मरम्मत-खर्च से जुड़े प्रस्तावित कर बदलाव—ये सभी एक साथ कई मांगों से जूझते बजट की तस्वीर पेश करते हैं। बात केवल युद्धक्षेत्र के खर्च की नहीं है, बल्कि रूस के भीतर संपत्तियों की सुरक्षा और उन्हें बहाल करने की लागत की भी है।
2027 का लक्ष्य कम है, पर कई मान्यताओं पर टिका है
पुतिन ने कहा है कि 2027 के बजट में घाटा शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब GDP का 2% रह सकता है। यह अनुमान तेल की लगभग 50 डॉलर प्रति बैरल की कीमत संबंधी एक “बहुत सतर्क” धारणा पर आधारित है।
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यह 2026 के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा अब चर्चा में लाई गई 3% की सीमा से कम है, लेकिन यह अनुमान है, गारंटी नहीं। इसकी व्यवहार्यता राजस्व, तेल कीमतों, उधारी की परिस्थितियों और सबसे बढ़कर सैन्य व सुरक्षा खर्च की दिशा पर निर्भर करेगी।
पुतिन का सार्वजनिक रुख यह रहा है कि बढ़ता घाटा रूस की अर्थव्यवस्था के लिए कोई “गंभीर” जोखिम नहीं है और इसे संभाला जा सकता है। उन्होंने यह बात तब कही थी, जब जनवरी-जुलाई का घाटा GDP के 2.8% तक पहुंच चुका था और मूल वार्षिक लक्ष्य से ऊपर था।
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मुख्य निष्कर्ष सीधा है: अगस्त का अधिशेष अस्थायी राहत लेकर आया, लेकिन जनवरी-अगस्त का घाटा और रक्षा खर्च की रफ्तार बताते हैं कि रूस 1.6% के घाटे की मूल योजना से हटकर 3% की सीमा की ओर क्यों बढ़ा है—और नागरिक खर्च को बजट के सबसे अधिक समायोज्य हिस्से की तरह क्यों देखा जा रहा है।
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