उदाहरण के लिए, इस मेटाडेटा में यह जानकारी हो सकती है कि:
C2PA में क्रिप्टोग्राफिक साइनिंग और प्रोवेनेंस रिकॉर्ड का उपयोग होता है, जिससे समर्थित टूल्स किसी फाइल का इतिहास सत्यापित कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे कई AI कंपनियां, कैमरा निर्माता, मीडिया संगठन और सॉफ्टवेयर कंपनियां अपनाने लगी हैं।
मेटाडेटा उपयोगी है, लेकिन इसकी एक बड़ी कमजोरी भी है।
जब तस्वीरें इंटरनेट पर शेयर होती हैं, तो अक्सर उनका मेटाडेटा गायब हो जाता है। उदाहरण के लिए:
इन स्थितियों में मूल मेटाडेटा हट सकता है या बदल सकता है। अगर ऐसा होता है तो तस्वीर की उत्पत्ति से जुड़ा संकेत भी खो सकता है। यही वजह है कि OpenAI ने केवल मेटाडेटा पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी तकनीक भी जोड़ी है।
SynthID Google DeepMind द्वारा विकसित एक तकनीक है जो तस्वीर के पिक्सेल के भीतर ही एक अदृश्य संकेत (watermark) एम्बेड करती है।
चूंकि यह सिग्नल सीधे इमेज डेटा के अंदर डाला जाता है, इसलिए कई सामान्य बदलावों—जैसे क्रॉपिंग, कंप्रेशन या फाइल फॉर्मेट बदलने—के बाद भी यह अक्सर बचा रह सकता है।
इस तरह C2PA और SynthID को साथ इस्तेमाल करने से दोहरा सुरक्षा तंत्र बनता है। यदि मेटाडेटा हट भी जाए, तो पिक्सेल‑लेवल वॉटरमार्क अभी भी तस्वीर की पहचान में मदद कर सकता है।
OpenAI एक पब्लिक ‘Verify’ टूल का भी प्रीव्यू दिखा रहा है, जो उपयोगकर्ताओं को किसी तस्वीर की उत्पत्ति जांचने में मदद करेगा।
इस टूल में उपयोगकर्ता एक इमेज अपलोड कर सकेंगे और सिस्टम जांच करेगा कि क्या वह OpenAI के किसी मॉडल से बनी है, जैसे:
हालांकि इस टूल की कुछ सीमाएं भी होंगी। यदि किसी तस्वीर को बहुत ज्यादा एडिट किया गया हो या पहचान संकेत पूरी तरह हट गए हों, तो सिस्टम उसे सही तरीके से पहचान न भी पाए।
इंटरनेट पर पहले से ही बड़ी मात्रा में अत्यंत वास्तविक दिखने वाला AI‑जनित कंटेंट मौजूद है। जैसे‑जैसे जनरेटिव मॉडल बेहतर होते जा रहे हैं, यह पहचानना और कठिन हो जाता है कि कोई तस्वीर असली है या AI से बनी हुई।
OpenAI का यह प्रयास इस समस्या को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इससे मदद मिल सकती है:
हालांकि यह प्रणाली पूरी तरह से नकली तस्वीरों को रोक नहीं सकती—खासकर तब जब अन्य AI टूल्स ऐसे मानकों का उपयोग न करें—लेकिन OpenAI के सिस्टम से बनी तस्वीरों को अधिक पारदर्शी और ट्रेस करने योग्य बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है।
OpenAI की यह पहल तकनीकी उद्योग में उभरते एक बड़े रुझान का हिस्सा है—मानकीकृत कंटेंट प्रोवेनेंस।
आज कई कंपनियां मेटाडेटा, डिजिटल वॉटरमार्किंग और वेरिफिकेशन टूल्स को मिलाकर ऐसी प्रणालियां बना रही हैं जिनसे डिजिटल मीडिया की उत्पत्ति का रिकॉर्ड रखा जा सके।
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