OpenAI अब AI‑जनित तस्वीरों में दो पहचान संकेत जोड़ रहा है: C2PA Content Credentials मेटाडेटा और Google DeepMind का SynthID इनविज़िबल वॉटरमार्क। मेटाडेटा फाइल के साथ जुड़ी जानकारी देता है, जबकि SynthID तस्वीर के पिक्सेल में छिपा सिग्नल डालता है जो कई एडिट के बाद भी बच सकता है। एक नया सार्वजनिक ‘Verify’ टूल लोगों को त...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How is OpenAI improving the verification of AI‑generated images by integrating C2PA Content Credentials metadata and Google DeepMind’s Synth. Article summary: OpenAI is moving to a layered provenance system for AI-generated images by combining C2PA Content Credentials metadata with Google DeepMind’s SynthID invisible watermarking, plus an early public verification tool. The go. Topic tags: general, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "OpenAI introduced new AI image transparency tools, including SynthID watermarking, C2PA metadata, and a public verification system for AI-generated content. # OpenAI Introduces AI" source context "OpenAI Introduces AI Image Verification Tool And SynthID ..." Reference image 2: visual subject "OpenAI introduced new AI image trans
AI से बनाई गई तस्वीरें अब इतनी वास्तविक दिखने लगी हैं कि उन्हें असली फोटो से अलग पहचानना मुश्किल हो सकता है। इसी समस्या को देखते हुए OpenAI एक नया content‑provenance सिस्टम लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कोई डिजिटल तस्वीर कहाँ से आई है और क्या वह AI से बनाई गई है।
इस नई रणनीति में तीन मुख्य तत्व शामिल हैं: C2PA Content Credentials मेटाडेटा, Google DeepMind का SynthID इनविज़िबल वॉटरमार्क, और एक पब्लिक वेरिफिकेशन टूल। इनका मकसद पत्रकारों, प्लेटफॉर्म्स और आम यूज़र्स को यह पता लगाने में मदद करना है कि कोई तस्वीर OpenAI के सिस्टम—जैसे ChatGPT, Codex या OpenAI API—से बनाई गई है या नहीं।
OpenAI अपनी इस रणनीति को "multi‑layered, ecosystem‑driven" मॉडल कहता है, यानी ऐसी व्यवस्था जिसमें कई तकनीकों को साथ मिलाकर डिजिटल कंटेंट की उत्पत्ति ट्रैक की जा सके।
इस सिस्टम के तहत OpenAI के टूल से बनाई गई तस्वीरों में दो अलग‑अलग पहचान संकेत जोड़े जाएंगे:
दोनों तकनीकों का उद्देश्य एक ही है—तस्वीर की उत्पत्ति को पहचानना—लेकिन वे अलग तरीकों से काम करती हैं।
C2PA (Coalition for Content Provenance and Authenticity) एक ओपन स्टैंडर्ड है जो डिजिटल मीडिया के साथ मेटाडेटा जोड़कर बताता है कि वह कंटेंट कैसे बनाया गया या उसमें क्या बदलाव हुए।
उदाहरण के लिए, इस मेटाडेटा में यह जानकारी हो सकती है कि:
C2PA में क्रिप्टोग्राफिक साइनिंग और प्रोवेनेंस रिकॉर्ड का उपयोग होता है, जिससे समर्थित टूल्स किसी फाइल का इतिहास सत्यापित कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे कई AI कंपनियां, कैमरा निर्माता, मीडिया संगठन और सॉफ्टवेयर कंपनियां अपनाने लगी हैं।
मेटाडेटा उपयोगी है, लेकिन इसकी एक बड़ी कमजोरी भी है।
जब तस्वीरें इंटरनेट पर शेयर होती हैं, तो अक्सर उनका मेटाडेटा गायब हो जाता है। उदाहरण के लिए:
इन स्थितियों में मूल मेटाडेटा हट सकता है या बदल सकता है। अगर ऐसा होता है तो तस्वीर की उत्पत्ति से जुड़ा संकेत भी खो सकता है। यही वजह है कि OpenAI ने केवल मेटाडेटा पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी तकनीक भी जोड़ी है।
SynthID Google DeepMind द्वारा विकसित एक तकनीक है जो तस्वीर के पिक्सेल के भीतर ही एक अदृश्य संकेत (watermark) एम्बेड करती है।
यह वॉटरमार्क इंसानों को दिखाई नहीं देता, लेकिन विशेष टूल्स से इसे पहचाना जा सकता है।
चूंकि यह सिग्नल सीधे इमेज डेटा के अंदर डाला जाता है, इसलिए कई सामान्य बदलावों—जैसे क्रॉपिंग, कंप्रेशन या फाइल फॉर्मेट बदलने—के बाद भी यह अक्सर बचा रह सकता है।
इस तरह C2PA और SynthID को साथ इस्तेमाल करने से दोहरा सुरक्षा तंत्र बनता है। यदि मेटाडेटा हट भी जाए, तो पिक्सेल‑लेवल वॉटरमार्क अभी भी तस्वीर की पहचान में मदद कर सकता है।
OpenAI एक पब्लिक ‘Verify’ टूल का भी प्रीव्यू दिखा रहा है, जो उपयोगकर्ताओं को किसी तस्वीर की उत्पत्ति जांचने में मदद करेगा।
इस टूल में उपयोगकर्ता एक इमेज अपलोड कर सकेंगे और सिस्टम जांच करेगा कि क्या वह OpenAI के किसी मॉडल से बनी है, जैसे:
यह जांच मुख्य रूप से C2PA मेटाडेटा या SynthID वॉटरमार्क जैसे संकेतों की मौजूदगी के आधार पर होगी।
हालांकि इस टूल की कुछ सीमाएं भी होंगी। यदि किसी तस्वीर को बहुत ज्यादा एडिट किया गया हो या पहचान संकेत पूरी तरह हट गए हों, तो सिस्टम उसे सही तरीके से पहचान न भी पाए।
इंटरनेट पर पहले से ही बड़ी मात्रा में अत्यंत वास्तविक दिखने वाला AI‑जनित कंटेंट मौजूद है। जैसे‑जैसे जनरेटिव मॉडल बेहतर होते जा रहे हैं, यह पहचानना और कठिन हो जाता है कि कोई तस्वीर असली है या AI से बनी हुई।
OpenAI का यह प्रयास इस समस्या को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इससे मदद मिल सकती है:
हालांकि यह प्रणाली पूरी तरह से नकली तस्वीरों को रोक नहीं सकती—खासकर तब जब अन्य AI टूल्स ऐसे मानकों का उपयोग न करें—लेकिन OpenAI के सिस्टम से बनी तस्वीरों को अधिक पारदर्शी और ट्रेस करने योग्य बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है।
OpenAI की यह पहल तकनीकी उद्योग में उभरते एक बड़े रुझान का हिस्सा है—मानकीकृत कंटेंट प्रोवेनेंस।
आज कई कंपनियां मेटाडेटा, डिजिटल वॉटरमार्किंग और वेरिफिकेशन टूल्स को मिलाकर ऐसी प्रणालियां बना रही हैं जिनसे डिजिटल मीडिया की उत्पत्ति का रिकॉर्ड रखा जा सके।
यदि यह मॉडल व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो C2PA और SynthID जैसी तकनीकें आने वाले समय में इंटरनेट पर कंटेंट की विश्वसनीयता जांचने के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं।
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OpenAI अब AI‑जनित तस्वीरों में दो पहचान संकेत जोड़ रहा है: C2PA Content Credentials मेटाडेटा और Google DeepMind का SynthID इनविज़िबल वॉटरमार्क।
OpenAI अब AI‑जनित तस्वीरों में दो पहचान संकेत जोड़ रहा है: C2PA Content Credentials मेटाडेटा और Google DeepMind का SynthID इनविज़िबल वॉटरमार्क। मेटाडेटा फाइल के साथ जुड़ी जानकारी देता है, जबकि SynthID तस्वीर के पिक्सेल में छिपा सिग्नल डालता है जो कई एडिट के बाद भी बच सकता है।
एक नया सार्वजनिक ‘Verify’ टूल लोगों को तस्वीर अपलोड करके जांचने देगा कि वह ChatGPT, Codex या OpenAI API से बनी है या नहीं।