लेकिन अप्रैल के अंत तक स्थिति काफी बदल गई। शिपिंग डेटा विश्लेषण कंपनी Vortexa के अनुसार 13 से 25 अप्रैल के बीच ओमान की खाड़ी से ईरानी तेल लेकर निकलने वाले जहाज़ों की संख्या मार्च के समान समय की तुलना में 80% से अधिक घट गई।
टैंकर गतिविधि पूरी तरह स्पष्ट न होने के कारण अलग‑अलग संस्थानों के अनुमान थोड़ा भिन्न हैं, लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि नाकाबंदी के बाद निर्यात में तेज गिरावट आई।
नाकाबंदी सख्त होने से पहले:
अप्रैल के मध्य के बाद:
इन दोनों अनुमानों से संकेत मिलता है कि संघर्ष के शुरुआती दौर की तुलना में ईरान का निर्यात करीब 80% या उससे अधिक गिर चुका है।
ईरान के निर्यात में गिरावट के साथ‑साथ खाड़ी क्षेत्र के अन्य उत्पादकों पर पड़े असर ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
IEA के अनुसार:
इसका मतलब है कि मांग और बाधित आपूर्ति के बीच अंतर को भरने के लिए दुनिया को अपने मौजूदा भंडार पर तेज़ी से निर्भर रहना पड़ा है।
IEA के आकलन के मुताबिक पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाज़ार से भारी मात्रा में आपूर्ति गायब हो चुकी है।
मुख्य अनुमान:
ये आंकड़े आधुनिक ऊर्जा बाज़ार के सबसे बड़े आपूर्ति झटकों में से एक की ओर इशारा करते हैं।
ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास प्रतिबंध लंबे समय तक बने रहे तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और बढ़ सकता है।
तेल की कीमतें: निवेश बैंकों का अनुमान है कि लंबा व्यवधान Brent कच्चे तेल की कीमत को 130 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा सकता है।
भंडार: पहले से रिकॉर्ड गति से घटते भंडार लंबे संकट की स्थिति में खतरनाक रूप से कम हो सकते हैं, खासकर रिफाइंड ईंधनों के लिए।
वित्तीय बाज़ार: भू‑राजनीतिक तनाव के दौरान तेल कीमतों में उछाल ने वैश्विक शेयर बाज़ार में अस्थिरता बढ़ाई है और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मांग को मजबूत किया है।
नाकाबंदी और कड़े समुद्री प्रतिबंधों के बावजूद ईरान कुछ सीमित टैंकर गतिविधि और कम पारदर्शी शिपिंग तरीकों की मदद से तेल निर्यात जारी रखने में सफल रहा है। हालांकि वैश्विक बाज़ार तक पहुँचने वाली मात्रा पहले के एक मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर अब कुछ लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है।
लेकिन व्यापक प्रभाव सिर्फ ईरान के निर्यात तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन बंद होने और वैश्विक भंडार के तेज़ी से घटने के कारण तेल बाज़ार का सुरक्षा‑बफर तेजी से कम हो रहा है — और यही वजह है कि पूरी दुनिया की ऊर्जा कीमतें अब इस संकट की अवधि पर निर्भर करती दिख रही हैं।
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