सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि यदि अधिकारी उनसे मिलने जाएँ या डिजिटल संचार का उपयोग करें तो विदेशी खुफिया एजेंसियाँ उनके ठिकाने का पता लगा सकती हैं। इसलिए उनसे संपर्क बेहद सीमित रखा गया है।
इस स्थिति को कुछ विश्लेषक “इनविज़िबल लीडरशिप” (अदृश्य नेतृत्व) कहते हैं—जहाँ देश का सर्वोच्च नेता औपचारिक रूप से मौजूद है, लेकिन सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देता।
डिजिटल निगरानी से बचने के लिए रिपोर्टों के अनुसार मोजतबा खामेनेई बेहद पुराने तरीके का संचार तंत्र इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें हाथ से लिखे निर्देश भरोसेमंद कुरियरों के जरिए भेजे जाते हैं।
बताया जाता है कि ये संदेश कागज़ पर लिखकर लिफाफों में सील किए जाते हैं और फिर एक तरह की “मानव श्रृंखला” के माध्यम से अधिकारियों या सैन्य कमांडरों तक पहुँचाए जाते हैं। कई बार कुरियर लंबी दूरी मोटरसाइकिल या कार से तय करते हैं। जवाब भी उसी रास्ते से वापस भेजे जाते हैं।
इस प्रणाली का मकसद यह है कि फोन कॉल, एन्क्रिप्टेड ऐप या अन्य डिजिटल सिग्नल के जरिए किसी तरह की ट्रैकिंग या लोकेशन का पता न लगाया जा सके।
हालाँकि यह तरीका सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इससे निर्णय‑प्रक्रिया धीमी हो जाती है और सुप्रीम लीडर का दैनिक प्रशासन पर सीधा नियंत्रण सीमित हो जाता है।
मोजतबा खामेनेई की सीमित पहुँच और अलग‑थलग स्थिति के कारण कई रिपोर्टों में कहा गया है कि सत्ता का केंद्र धीरे‑धीरे एक छोटे प्रभावशाली समूह की ओर खिसक गया है।
अब कई अहम फैसले—जैसे युद्ध रणनीति, विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा—इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और राजनीतिक हस्तियों के एक छोटे समूह के बीच तय होते दिखाई देते हैं।
रिपोर्टों में जिन नामों का अक्सर उल्लेख होता है, उनमें शामिल हैं:
कई विश्लेषक इस नेटवर्क को सुरक्षा‑राज्य के प्रभावशाली नेताओं का एक क़रीबी “बैंड ऑफ ब्रदर्स” बताते हैं, जो सुप्रीम लीडर के निर्देशों को नीति और कार्रवाई में बदलने का काम करता है।
विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई की स्थिति उनके पिता से कई मायनों में अलग है।
अली खामेनेई ने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान के धार्मिक संस्थानों, सेना और राजनीतिक गुटों के बीच अपना प्रभाव मजबूत किया था। इसलिए वे सत्ता के अलग‑अलग धड़ों के बीच मध्यस्थता कर सकते थे।
मोजतबा के सामने कई सीमाएँ हैं:
फिर भी कुछ खुफिया आकलन कहते हैं कि वे अभी भी युद्ध और कूटनीतिक रणनीति तय करने में “महत्वपूर्ण भूमिका” निभा रहे हैं।
लेकिन वही रिपोर्टें यह भी बताती हैं कि सत्ता संरचना पहले की तुलना में ज्यादा बिखरी हुई और सैन्य‑केंद्रित हो गई है, जहाँ IRGC और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं का प्रभाव बढ़ गया है।
नेतृत्व परिवर्तन के महीनों बाद भी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि मोजतबा खामेनेई ईरान की नीतियों पर कितना सीधा नियंत्रण रखते हैं।
मौजूदा रिपोर्टों से जो तस्वीर सामने आती है, वह एक हाइब्रिड सत्ता संरचना की है:
इस वजह से ईरान का वर्तमान नेतृत्व ढाँचा पहले की तुलना में अधिक विकेंद्रीकृत और सैन्य प्रभाव वाला दिखाई देता है।
यह व्यवस्था अस्थायी है या ईरान की राजनीति का नया सामान्य बन जाएगी—यह अभी भी एक खुला सवाल बना हुआ है।
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