बड़े AI मॉडल को ट्रेन करना और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर चलाना अत्यधिक बिजली मांगता है। जैसे‑जैसे कंपनियाँ AI सेवाएँ बढ़ाती हैं, वैसे‑वैसे डेटा सेंटर की ऊर्जा खपत भी बढ़ती जाती है।
गूगल की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में उसके डेटा सेंटरों की बिजली खपत साल‑दर‑साल लगभग 27% बढ़ी।
दिलचस्प बात यह है कि बढ़ती मांग के बावजूद डेटा‑सेंटर ऊर्जा से होने वाले उत्सर्जन में 12% की गिरावट दर्ज की गई।
कंपनी के मुताबिक इसका बड़ा कारण कई नई साफ ऊर्जा परियोजनाएँ हैं, जो हाल के वर्षों में बनाए गए लंबे‑अवधि के ऊर्जा समझौतों के तहत 2024 में चालू हुईं।
गूगल की रणनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह पारंपरिक renewable ऊर्जा मॉडल से कैसे अलग है।
कई कंपनियाँ दावा करती हैं कि वे 100% renewable ऊर्जा पर चलती हैं। लेकिन अक्सर इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि वे पूरे साल में अपनी कुल बिजली खपत के बराबर renewable ऊर्जा खरीद लेती हैं।
इस स्थिति में वास्तविक समय पर इस्तेमाल हो रही बिजली अभी भी कोयला या गैस जैसे स्रोतों से आ सकती है। बाद में सौर या पवन ऊर्जा से उस खपत की "भरपाई" कर दी जाती है।
गूगल इस अंतर को खत्म करना चाहता है। कंपनी का लक्ष्य है कि हर घंटे और हर ग्रिड क्षेत्र में बिजली की खपत को कार्बन‑फ्री स्रोतों से मिलाया जाए।
इसका मतलब है कि कंपनी को ऊर्जा खरीदने की रणनीति पूरी तरह बदलनी पड़ती है:
इसी वजह से गूगल केवल सौर और पवन ऊर्जा पर निर्भर नहीं रह सकता। कंपनी ऊर्जा भंडारण, भू‑तापीय ऊर्जा, उन्नत परमाणु तकनीक और अधिक लचीले डेटा‑सेंटर संचालन जैसे विकल्पों में भी निवेश कर रही है।
हाल के वर्षों के कई आँकड़े दिखाते हैं कि ऊर्जा मांग बढ़ने के बावजूद गूगल साफ ऊर्जा की खरीद और परियोजनाओं का विस्तार कर रहा है।
2010 से 2024 के बीच गूगल ने 170 से अधिक समझौतों के जरिए लगभग 22 गीगावाट साफ ऊर्जा उत्पादन क्षमता के लिए अनुबंध किए हैं।
गूगल की पर्यावरण रिपोर्ट बताती है कि 2024 में 25 से अधिक साफ ऊर्जा परियोजनाएँ चालू हुईं, जिससे लगभग 2.5 गीगावाट नई क्षमता उन ग्रिडों में जुड़ी जहाँ कंपनी के डेटा सेंटर काम करते हैं।
उदाहरण के तौर पर, डेवलपर Clearway के साथ गूगल के समझौते के तहत करीब 1.2 गीगावाट कार्बन‑फ्री ऊर्जा मिसौरी, टेक्सास और वेस्ट वर्जीनिया की परियोजनाओं से उपलब्ध कराई जाएगी।
ये परियोजनाएँ उन क्षेत्रीय बिजली ग्रिडों को साफ ऊर्जा देंगी जहाँ गूगल के डेटा सेंटर संचालित होते हैं।
गूगल अपनी प्रगति को Carbon‑Free Energy Percentage नामक मीट्रिक से मापता है।
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी लगभग 66% hourly carbon‑free energy तक पहुँच चुकी है, जबकि कई क्षेत्रों में यह आंकड़ा 80% से भी अधिक है।
यह प्रगति दिखाती है कि लक्ष्य की दिशा में काम जारी है, हालांकि 2030 तक पूर्ण 24/7 मिलान हासिल करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
गूगल मानता है कि केवल renewable बिजली खरीदना पर्याप्त नहीं है। इसलिए कंपनी अपने डेटा‑सेंटर संचालन को भी बदल रही है।
एक तरीका है carbon‑aware computing—जिसमें कुछ कंप्यूटिंग कार्य उन स्थानों या समयों पर शिफ्ट किए जाते हैं जहाँ बिजली अधिक साफ होती है।
दूसरा तरीका demand response है, जिसके तहत डेटा सेंटर जरूरत पड़ने पर अस्थायी रूप से बिजली उपयोग घटा या स्थानांतरित कर सकते हैं ताकि ग्रिड पर दबाव कम हो।
ऊर्जा दक्षता भी अहम भूमिका निभाती है। गूगल के शोध के अनुसार, कुछ तकनीकों के संयोजन से AI मॉडल को ट्रेन करने में लगने वाली ऊर्जा को 100 गुना तक और उससे जुड़ी उत्सर्जन को 1,000 गुना तक कम किया जा सकता है।
गूगल की जलवायु रणनीति सिर्फ अपने संचालन तक सीमित नहीं है।
मई 2026 में Google DeepMind ने एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में “AI for the Planet” नाम का एक accelerator कार्यक्रम शुरू किया।
तीन महीने का यह कार्यक्रम स्टार्टअप, शोध समूह और गैर‑लाभकारी संस्थाओं को मदद देता है ताकि वे उन्नत AI मॉडल का उपयोग पर्यावरण और जलवायु समस्याओं के समाधान में कर सकें।
कार्यक्रम के प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं:
यह पहल गूगल की उस व्यापक सोच को दर्शाती है जिसमें AI सिर्फ साफ ऊर्जा पर चलना ही नहीं चाहिए, बल्कि खुद जलवायु समाधान को तेज़ करने का उपकरण भी बन सकता है।
2030 तक 24/7 कार्बन‑फ्री ऊर्जा का लक्ष्य टेक उद्योग के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है। गूगल का दृष्टिकोण वार्षिक renewable संतुलन से आगे जाकर हर घंटे और हर क्षेत्र में साफ बिजली मिलान की दिशा में है।
हालाँकि AI के कारण बिजली मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन नई ऊर्जा परियोजनाएँ, दीर्घकालिक बिजली समझौते, दक्षता सुधार और लचीला डेटा‑सेंटर संचालन इस चुनौती को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह अभी निश्चित नहीं है कि गूगल 2030 तक पूरी तरह 24/7 कार्बन‑फ्री मिलान हासिल कर पाएगा या नहीं। लेकिन इसकी रणनीति पहले ही बड़े डेटा‑सेंटर ऑपरेटरों और क्लाउड कंपनियों के लिए साफ ऊर्जा के बारे में सोचने का तरीका बदल रही है।