कई AI मॉडल केवल सांख्यिकीय पैटर्न पर आधारित होते हैं। लेकिन Dunia अपने प्लेटफ़ॉर्म में physics‑informed AI का उपयोग करती है—यानी ऐसे एल्गोरिद्म जो भौतिक और रासायनिक नियमों को भी ध्यान में रखते हैं।
इसका फायदा यह है कि AI द्वारा सुझाए गए उम्मीदवार केवल सैद्धांतिक रूप से ही नहीं बल्कि प्रयोगशाला में वास्तव में बनाए जा सकने वाले होते हैं। इससे बेकार प्रयोगों की संख्या कम हो जाती है।
क्लाइमेट‑टेक एक्सेलरेटर Third Derivative के अनुसार, physics‑informed AI और रोबोटिक प्रयोगों का संयोजन कुछ इलेक्ट्रोएक्टिव सामग्रियों की खोज को लगभग 10 गुना तेज़ और पारंपरिक R&D लागत के लगभग एक‑तिहाई में संभव बना सकता है।
Dunia की शुरुआती रिसर्च खास तौर पर उन सामग्रियों पर केंद्रित है जो ऊर्जा संक्रमण में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उदाहरण के लिए:
कंपनी विशेष रूप से electroactive materials पर काम कर रही है जो power‑to‑X तकनीकों में इस्तेमाल होती हैं—ये तकनीकें नवीकरणीय बिजली को ईंधन या रासायनिक फीडस्टॉक में बदलती हैं।
Dunia की औद्योगिक सहयोग का एक बड़ा उदाहरण ASCEND catalyst‑discovery consortium है, जिसे जर्मनी में शुरू किया गया है।
इस पहल में कई प्रमुख संगठन शामिल हैं:
जर्मन संघीय सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए €30 मिलियन की फंडिंग दी है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा‑गहन उद्योगों के लिए बेहतर कैटालिस्ट विकसित करना है।
Dunia Innovations की स्थापना 2022 में हुई थी और कंपनी ने अब तक लगभग €10.6 मिलियन (करीब $11.5 मिलियन) जुटाए हैं।
इसके निवेशकों में शामिल हैं:
यह निवेश यूरोप में AI‑आधारित वैज्ञानिक खोज और क्लाइमेट टेक पर बढ़ते फोकस को भी दर्शाता है।
स्वचालित प्रयोगशालाएँ केवल एक लैब नहीं होतीं—वे कई तकनीकों के मेल से बनती हैं। उदाहरण के लिए:
ऐसी तकनीकें—डिजिटल ट्विन, AI सिमुलेशन और रोबोटिक्स—स्वचालित वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अगर इस तरह के प्लेटफ़ॉर्म बड़े पैमाने पर सफल होते हैं, तो वैज्ञानिक खोज की अर्थव्यवस्था ही बदल सकती है।
ऑटोनॉमस लैब के संभावित फायदे हैं:
यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्नत सामग्री ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और विनिर्माण जैसे बड़े उद्योगों की नींव हैं।
Dunia Innovations उस नई दिशा का उदाहरण है जिसमें AI, रोबोटिक्स और वास्तविक प्रयोग एक ही सिस्टम के रूप में काम करते हैं।
कंपनी का क्लोज़्ड‑लूप प्लेटफ़ॉर्म पहले से ही ऊर्जा और कैटालिसिस से जुड़ी सामग्रियों की खोज में इस्तेमाल हो रहा है। अगर ऐसे ऑटोनॉमस लैब मॉडल बड़े पैमाने पर अपनाए जाते हैं, तो भविष्य की वैज्ञानिक खोज पारंपरिक प्रयोगशाला से हटकर एक लगातार चलने वाली “AI‑संचालित शोध फैक्टरी” में बदल सकती है।
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